पाकिस्तान का फिर कश्मीर राग

पाकिस्तान का बयान ऐसे समय में आया है, जब उफा में मोदी और शरीफ के बीच मुलाकात में मुंबई हमले की सुनवाई में तेजी लाने और दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) के बीच बातचीत पर सहमति बनी थी। यह अजीव विडंबना है कि जिस कश्मीर को पाकिस्तान अपनी गरिमा और सम्मान बता रहा है वह भारत का अभिन्न अंग है।

sanjay sharma editor5एक बार फिर पाकिस्तान ने कश्मीर राग अलापना शुरू कर दिया है। वह भी ऐसे समय में जब रूस के उफा में चार दिन पहले ही भारत व पाक के प्रधानमंत्री के बीच करीब एक घंटे वार्ता हुई। उसके बाद ही भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अगले साल पाकिस्तान दौरे की बात कही गई। जब भी दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच वार्ता होती है तो एक उम्मीद जगती है कि दोनों देशों के बीच के तल्ख रिश्तों में शायद कुछ मिठास आ जाए, पर यह कटु सत्य है कि पाकिस्तान, भारत से अपने रिश्ते मधुर करना ही नहीं चाहता। पाकिस्तान के राष्टï्रीय सुरक्षा एवं विदेशी मामलों पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सलाहकार सरताज अजीज ने कहा है कि भारत से वार्ता तभी होगी जब एजेंडे में कश्मीर होगा। हम अभी भी पुराने मसले पर ही खड़े हैं। पाकिस्तान अपनी गरिमा और सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की वार्ता को ‘तनाव हटाने पर केन्द्रित एक अच्छी शुरुआत’ कहा है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान का बयान ऐसे समय में आया है, जब उफा में मोदी और शरीफ के बीच मुलाकात में मुंबई हमले की सुनवाई में तेजी लाने और दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) के बीच बातचीत पर सहमति बनी थी। यह अजीव विडंबना है कि जिस कश्मीर को पाकिस्तान अपनी गरिमा और सम्मान बता रहा है वह भारत का अभिन्न अंग है। भारत की कश्मीर के लिए कटिबद्धता किसी से छिपी नहीं है। कश्मीर की रक्षा के लिए प्रत्येक वर्ष कितने जवान शहीद होते हैं फिर भी जब-तब पाकिस्तान कश्मीर का राग अलाप ही देता है। भारत, पाक की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाता है और वह पीछे से वार करता है। पाकिस्तानी पीएम के सलाहकार सरताज अजीज ने लखवी के मुद्दे पर भारत से ज्यादा सूचना और सबूतों की मांग की है। पाकिस्तान भी चीन की बोली बोलने लगा है। जैसे चीन ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया है कि भारत ने संयुक्त राष्टï्र को लखवी से संबंधित पर्याप्त सुबूत नहीं दिये हैं, जबकि भारत ने कई बार आतंकवादियों के खिलाफ सुबूत दिये हैं पर नतीजा सिफर रहा है।
पाकिस्तानी दूतावास ने हुर्रियत कांफ्रेस को ईद मिलन समारोह में आने का न्योता भेजा है। जबकि पाक अच्छी तरह जानता है कि अब्दुल बासित और हुर्रियत नेताओं के प्रति भारत सरकार की क्या सोच है। इसके पहले उफा में मोदी-नवाज की मुलाकात के कारण बासित ने हुर्रियत नेताओं के साथ इफ्तार डिनर को रद्द कर दिया था। इसके पहले भी अगस्त 2014 में अब्दुल बासित और हुर्रियत नेताओं की मुलाकात पर ऐतराज जताते हुए भारत ने पाकिस्तान के साथ विदेश सचिव स्तर की वार्ता रद्द कर दी थी, फिर भी पाकिस्तान ने ईद मिलन समारोह में हुर्रियत कांफ्रेस को न्योता भेजा है। इससे पाकिस्तान की मंशा का अंदाजा लगाया जा सकता है कि पाक, भारत से अच्छा रिश्ता चाहता ही नहीं है।

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