पांच करोड़ रुपये लेकर गलत शासनादेश जारी किया था बदनाम प्रमुख सचिव चंचल तिवारी ने

  • ग्राम पंचायतों के विकास के लिए आए तीन हजार आठ सौ इकसठ करोड़ रुपये को ठिकाने लगाने के लिए चंचल तिवारी ने सब कुछ रखा ताक पर 
  • प्रदेश भर में सफाई कर्मचारियों से 500-500 रुपए वसूले गए आंदोलन के नाम पर

15 June PAGE-1 REV1संजय शर्मा
लखनऊ। कोई आईएएस अफसर अपनी नौकरी ताक पर रखकर पैसे कमाने के लिए क्या-क्या गुल खिला सकता है। यह देखना हो तो प्रमुख सचिव पंचायती राज चंचल तिवारी के कारनामों पर एक नजर डाल लेनी चाहिए। मौजूदा वित्तीय वर्ष में ग्राम पंचायतों के लिए तीन हजार आठ सौ इकसठ करोड़ रुपये क्या आए इस प्रमुख सचिव की नीयत ही डोल गई। इस रुपये को ठिकाने लगाने के लिए चंचल तिवारी ने नायाब तरकीब निकाली और उन्होंने एक विवादास्पद शासनादेश निकलाने की तैयारी शुरू की। उन्होंने विभाग के कुछ कर्मचारी नेताओं से अपने बिचौलियों के माध्यम से संपर्क साधा और कहा कि वह एक ऐसा शासनादेश करने को तैयार जिससे सारा पैसा ग्राम पंचायत अधिकारियों को ही मिलेगा और उसमें खंड विकास अधिकारियों का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। मगर इस शासनादेश के लिए उन्होंने पांच करोड़ की मांग की। हालांकि चंचल तिवारी इन आरोपों को निराधार बता रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि उन्हें यह धनराशि देने का वादा कर लिया गया और इस बदनाम अफसर ने सब नियम कायदे ताक पर रखकर यह शासनादेश जारी कर दिया। इस रुपये की वसूली जिला स्तर पर पंचायत राज्य विभाग के लोगों से की जाने लगी और इसकी शिकायतें मुख्यालय तक पहुंचने लगी।
इस शासनादेश के मुताबिक खंड विकास अधिकारियों का ग्राम पंचायत अधिकारियों पर कोई नियंत्रण नहीं रह जाता। यहीं नहीं ग्राम पंचायत अधिकारियों की वार्षिक रिपोर्ट लिखने का अधिकार भी जिलाधिकारियों से ले लिया गया। इस शासनादेश के जारी होते ही हडक़ंप मंच गया। ग्राम्य विकास के लोगों ने इसका विरोध करते हुए एक महापरिषद का गठन किया और कई अन्य कर्मचारी संगठन भी उनके साथ आ गए। इन लोगों ने विरोध स्वरूप एक घंटे अतिरिक्त काम करने का फैसला किया। पूरे प्रदेश के सभी जिलों में खंड विकास अधिकारियों ने आंदोलन का फैसला लेते हुए जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन दिया और मुख्यमंत्री से मांग की कि इस शासनादेश को तत्काल रद्द किया जाए। क्योंकि इससे सारी प्रशासनिक व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी।
बदले में जब पंचायत विभाग के कर्मचारियों को लगा कि अगर यह शासनादेश रद्द हुआ तो उनका भारी नुकसान हो जायेगा। तब उन्होंने भी आन्दोलन करने का फैसला किया और घोषणा की कि वह लखनऊ में बड़ा आन्दोलन करके मुख्यमंत्री के घर का घेराव करेंगे, मगर इस बीच प्रदेश स्तर पर कई जगह से जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा सफाई कर्मचारियों से भी पांच-पांच सौ रुपये वसूली करने की शिकायत सामने आने लगी और यह बात भी समाने आई कि राजधानी लखनऊ में आंदोलन करने के नाम पर प्रदेश भर में इस तरह की अवैध वसूली की जा रही है। कई स्थानों पर इसकी शिकायत भी की गई। उधर शासन में बैठे अफसर भी इस बात से बेहद परेशान थे कि सरकार के दो विभाग आमने-सामने आ गए हैं। प्रदेश के तमाम आईएएस अफसर भी चंचल तिवारी के इस बेतुके फरमान से बेहद हैरान थे, उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि कोई इतना वरिष्ठï अधिकारी इस तरह के बेतुके फैसले ले सकता है। विवाद बढऩे के बाद आखिर मुख्य सचिव ने एपीसी प्रवीर कुमार को मामले की जांच सौंपी और उनकी रिपोर्ट के बाद में फैसला हुआ कि पंचायती राज कर्मचारी पूर्व की भांति खंड विकास अधिकारियों के अधीन ही काम करेंगे और चौदहवें वित्त आयोग की जिस राशि के हेर-फेर के लिए यह सारी कवायद की गई थी, वह धनराशि भी अब खंड विकास अधिकारी और एडीओ पंचायत के संयुक्त खाते से ही खोली जा सकेगी।

खंड विकास अधिकारी के नियंत्रण में ही रहेंगे पंचायत राज कर्मी

कृषि उत्पादन आयुक्त प्रवीर कुमार ने कहा कि इस पूरे मामले का पटाक्षेप हो गया है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को बुलाकर उनकी बात सुन ली गई और उसका समाधान कर दिया गया। विकास खंड के स्तर पर खंड विकास अधिकारी ही राजपत्रित अधिकारी होता है इसलिए उसके नियंत्रण में ही सभी कर्मचारी रहेंगे। इस बैठक के मिनट तय हो गए हैं। जल्दी ही नया शासनादेश जारी हो जायेगा।

नौकरियों की भर्ती में भी बदनामी हुई थी चंचल की

प्रमुख सचिव पंचायती राज चंचल तिवारी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले पंचायती राज विभाग में सैंकड़ों भर्तियों होनी थी। यहां भी चंचल तिवारी ने गुल खिलाते हुए नायाब हथकंडा निकाला और अपनी कुछ चहेती संस्थाओं को यह काम आवंटित कर दिया। इसमें से कुछ संस्थाए तों ऐसी थी जो सिर्फ तीन दिन पहले ही रजिस्टर्ड हुई थीं। इस हथकंडे का पर्दाफाश इंडिया न्यूज यूपी के ब्यूरो चीफ अरविन्द चतुर्वेदी ने कर दिया और अपने चैनल पर लगातार यह खबरे दिखाई। इसके बाद ये सारी भर्तियां तो निरस्त कर दी गईं मगर चंचल तिवारी का कुछ नहीं बिगड़ा।

ग्राम पंचायत राज सफाई कर्मचारी संघ का वह खत जिसमें वसूली की बात कहीं गई है।

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