पहले लापरवाही फिर लाठीचार्ज…

इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब विधानसभा के समक्ष धरना-प्रदर्शन प्रतिबंधित है तो फिर यहां कैसे इतनी भारी संख्या में लोग इक_ïा हो गए। उन्हें वहां जाने से रोका क्यों नहीं गया? ऐसा तो नहीं है कि जो लोग धरना-प्रदर्शन करते हैं वे प्रशासन को इससे अवगत नहीं कराते।sanjay sharma editor5

हाईकोर्ट के सख्त निर्देश के बावजूद विधानसभा के समक्ष धरना-प्रदर्शन का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा। जिस तरह से कल हजारों की संख्या में प्रशिक्षित बी.पी.एड. उपाधि धारकों ने विधानसभा का घेराव किया, उससे शासन-प्रशासन और एलआईयू की सर्तकता का अंदाजा लगाया जा सकता है। पूरे प्रदेश से आए हजारों की संख्या में बीपीएड डिग्री धारकों को वहां से हटाने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। ये सभी लोग मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी समस्या बताना चाहते थे। इन लोगों का आरोप है कि सरकार उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं ले रही है। इसलिए विधानसभा के समक्ष धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब विधानसभा के समक्ष धरना-प्रदर्शन प्रतिबंधित है तो फिर यहां कैसे इतनी भारी संख्या में लोग इक_ïा हो गए। उन्हें वहां जाने से रोका क्यों नहीं गया? ऐसा तो नहीं है कि जो लोग धरना-प्रदर्शन करते हैं वे प्रशासन को इससे अवगत नहीं कराते। महीनों पहले धरना-प्रदर्शन करने वाले लोग प्रशासन को इसकी सूचना देते हैं कि अमुक तारीख को कहां प्रदर्शन करेंगे। फिर आखिर प्रशासन से यह चूक क्यों हो गई। विधानसभा के सामने हजारों की संख्या में बीपीएड उपाधि धारक इक_ïा हो गए और प्रशासन मूकदर्शक बना रहा।
बीपीएड धारक मंगलवार से ही राजधानी में जुट गए थे। प्रशासन को उसी समय सख्ती से निपटना चाहिए था। जब छोटी-छोटी संख्या में विधानसभा के समक्ष बीपीएड धारक आ रहे थे तभी प्रशासन को प्रदर्शनकारियों पर प्रभावी कार्रवाई कर सक्रियता दिखानी चाहिये थी। पर प्रशासन ने ऐसा न कर भीड़ इक_ïा होने का इंतजार किया। यदि शुरू में ही प्रदर्शनकारियों को विधानसभा के पास जाने से रोका गया होता तो इस मामले की नौबत ही नहीं आई होती। इस घटना में अनेक लोग घायल हो गए। कई महिलाएं भी बुरी तरह जख्मी हुईं। कई गाडिय़ां जला दी गईं। घायलों में बीपीएड धारक ही नहीं बल्कि पुलिस के आला अधिकारी भी शामिल हैं। ऐसी घटनाएं यदि होती हैं तो निश्चित ही इसकी जिम्मेदार प्रशासन की लापरवाही ही है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि विधानसभा राजधानी का सबसे सुरक्षित क्षेत्र है। इस प्रतिबंधित क्षेत्र में इस तरह हजारों की संख्या में लोग इक_ïा हो जाते हैं तो निश्चित ही यह सुरक्षा में चूक है। भीड़ इक_ïा कर उन्हें वहां से भगाने के लिए बल प्रयोग करना कहीं से उचित नहीं है। सरकार यदि इन प्रदर्शनकारियों की मांगों को गंभीरता से लेती तो शायद यह लोग प्रदर्शन ही नहीं करते।

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