पहली बार लोहिया के बहाने मुलायम को घेरने में जुटीं माया

अपने जन्मदिन पर मायावती ने दिये दूर तक की लड़ाई लडऩे के संकेत

Captureअखिलेश कृष्ण मोहन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की जमीन पर एक बार फिर नीला झंडा फहराने की तैयारी में मायावती जुट गई हैं। इसका संकेत उन्होंने अपने 60वें जन्मदिन पर लखनऊ पार्टी मुख्यालय पर ब्लू बुक और कैलेंडर लांच करने के दौरान दिया है। उन्होंने पहली बार मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर निशाना साधने के लिए राम मनोहर लोहिया का सहारा लिया। इसके पहले मायावती सीधे तौर पर मुलायम के परिवारवाद और अन्य मामलों को लेकर सवाल उठाती रहती थीं, लेकिन समाजवाद के पुरोधा को इस लड़ाई में शामिल करने का मतलब है कि वह यह लड़ाई दूर तक लडऩा चाहती हैं।
ऐसा नहीं है कि मुलायम के समाजवाद और उनकी समाजवादी पार्टी में कुछ नया हो रहा है, लेकिन इसको लेकर मायावती का पैतरा जरूर बदला-बदला है। मायावती का निशाना भी सटीक है। वे लोहिया पर हमला करके यह संदेश देना चाहती हैं कि समाजवादी पार्टी जिस महापुरुष के आदर्श पर चलने का दावा करती है। हकीकत में वे उन महापुरुष के सिद्धांतों से कहीं अलग हटकर काम कर रही है। यही वजह है कि मायावती ने सीधे हमला बोलते हुए कहा है कि यदि लोहिया जिंदा होते तो वह मुलायम सिंह यादव को सपा से बाहर का रास्ता दिखा देते। लोहिया ठीक उसी तरह से हैं, जिस तरह से बहुजन समाज पार्टी अंबेडकर को मानती है। हालांकि महापुरुष किसी पार्टी के नहीं होते हैं, लेकिन सियासी समीकरण साधने और वोट बैंक को सहेजने के लिए यह सियासत यूपी में फलती-फूलती रही है। मुलायम भी इसी रास्ते पर चलकर लोहिया को ही समाजवाद का असली मसीहा मानते हैं। ऐसे मे मायावती का लोहिया और मुलायम के समाजवाद को लेकर हमला करना सपा के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
लोहिया के समाजवाद पर हमला करने के साथ ही मायावती ने अपनी पार्टी के बारे में भी साफ किया है कि वह अभी भी ज्योतिबा फूले और भीमराव अंबेडकर की विचारधारा से हटी नहीं है। यही वजह है कि वह अपना जन्मदिन जनकल्याणकारी दिवस के रूप में मनाती हैं। इसके विपरीत मुलायम सिंह यादव का जन्मदिन शाही तरीके से मनाया जाता है। यही नहीं, सैफई महोत्सव में भी करोड़ों रुपए जश्न के नाम पर खर्च होते हैं ऐसे में समाजवादी पार्टी का यह उत्सव हो सकता है, लेकिन लोहिया का समाजवाद इसे बिलकुल स्वीकार नहीं करेगा। जन्मदिन के अवसर पर मायावती की लोहिया को लेकर बैटिंग बिलकुल सटीक साबित हो सकती है। यदि बसपा इसको लेकर हमलावर हुई तो समाजवादी पार्टी को इसका जवाब देना थोड़ा मुश्किल भी हो सकता है।

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