पल्मोनरी विभाग में बाईपैप मशीन

न होने से मरीजों को परेशानी

जुगाड़ के सहारे चलाई जा रही है बाईपैप मशीन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। केजीएमयू के पल्मोनरी विभाग में बाइपैप मशीन की कमी होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां पर आने वाले गंभीर मरीजों की जान पर बनी है। कारण केजीएमयू के क्षय रोग विभाग में टीबी व सांस की बीमारी से पीडि़त मरीजों को जिस जीवन रक्षक प्रणाली के सहारे रखा जाता है, उन मशीनों की भारी कमी है।
विभाग में मात्र एक बाईपैप मशीन है, जिसकी हालत खस्ता है। इस मशीन के कई कलपुर्जे भी खराब हो चुके हैं और मशीन को जुगाड़ के सहारे चलाया जा रहा है। जिससे गंभीर मरीज जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। करीब 120 बेड के पल्मोनरी विभाग में टीबी और सांस रोगों से ग्रस्त मरीज आते हैं। पल्मोनरी विभाग में अक्सर बेड फु ल रहते हैं। सांस और टीबी से ग्रस्त मरीजों को लिए आक्सीजन की बहुत जरूरत होती है क्योंकि इन बीमारियों का सम्बन्ध सीधे सांस से होता है। बाईपैप मशीन का प्रयोग सांस और टीबी के मरीजों को आक्सीजन देने के लिए किया जाता है। पहले पल्मोनरी विभाग में दो और बाईपैप मशीनें थी, जिसमे दो मशीनों को ट्रामा भेज दिया गया। कई चिकित्सकों का मानना है कि पल्मोनरी विभाग में कम से कम 10 मशीनें होनी ही चाहिए ताकि मरीजों की जान बचाई जा सके।
क्या है बाईपैप मशीन
बाईपैप मशीन एक प्रकार का वेंटीलेटर है। जब मरीज होश में होता है और उस समय उसकी सांसें अटक रही हों, तब बाईपैप मशीन लगाकर मरीज को ऑक्सीजन दिया जाता है। वेंटीलेटर दो प्रकार होते हैं एक इंवेजिव और दूसरा नॉनइंवेजिव। इंवेजिव वेंटिलेटर को सामान्यता आईसीयू कहा जाता है। जब मरीज बेहोशी में चला जाता है तो मरीज को इंवेजिव वेंटिलेटर पर रखा जाता है वहीं नॉनइंवेजिव वेंटिलेटर जिसमे मरीज को होश के दौरान सांस अटकने पर लगाया जाता है, इसे ही बाईपैप मशीन कहते हैं।

पल्मोनरी विभाग में बाईपैप मशीनें कितनी है, इसकी जानकारी नहीं है। अगर मशीनें कम होने से मरीजों को दिक्कत हो रही है, तो व्यवस्था की जायेगी।
-डॉ. वेद प्रकाश, डिप्टी सीएमएस, केजीएमयू

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