पर्यावरण संतुलन की जरूरत

देश में हर तरफ पेड़ों का अनियंत्रित कटान हो रहा है। तालाबों को पाटकर बड़े-बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, होटल, इंस्टीट्यूट और कालोनियां विकसित की जा रही हैं। इससे पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है। सरकार इस समस्या से निपटने के लिए अभियान चला रही है, लेकिन जब तक हम खुद जागरूक नहीं होंगे तब तक पर्यावरण संतुलन स्थापित कर पाना मुश्किल है।

sanjay sharma editor5पर्यावरण का सीधा संबंध मनुष्य के जीवन से होता है। पर्यावरण और विकास एक दूसरे के पूरक हैं। पर्यावरण की समृद्धि का ध्यान रखकर विकास की गति और गुणवत्ता दोनों को बरकरार रखा जा सकता है। हम और हमारी सरकारें विकास की ऊंचाइयों को छूने की चाहत तो रखते हैं लेकिन पर्यावरण को लेकर गंभीर नहीं हैं। दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में 50 प्रतिशत शहर भारत के हैं। यह आंकड़ा पर्यावरण के प्रति लोगों की जागरूकता और हकीकत को बयां करने के लिए काफी हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पिछले महीने दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों की रिपोर्ट जारी की है। ईरान का जालोब शहर दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर माना गया है। इसमें भारत के 10 शहरों के नाम शामिल हैं, जिसमें यूपी के तीन शहरों-इलाहाबाद को तीसरा, कानपुर को 15वां और लखनऊ को 18वां स्थान दिया गया है। इसके अलावा ग्वालियर का दूसरा पटना का चौथा और रायपुर का पंचवा स्थान है। डब्लूएचओ की निदेशक मारिया नीरा ने अपने बयान में कहा था कि हवा में पार्टिक्युलेट मैटर यानी घातक धूल के बेहद बारीक कणों के मामले में दिल्ली की आबोहवा में पहले से काफी सुधार हुआ है। इसके लिए सरकार की तरफ से किए गए प्रयास काफी कारगर साबित हुए हैं। इसमें स्मार्ट सिटीज की सुविधाएं और सीएनजी का अधिक इस्तेमाल प्रदूषण को नियंत्रित करने के अस्थायी प्रावधानों में काफी लाभदायक साबित हुआ है।
आंकड़ों पर गौर करें, तो दुनिया में वायु प्रदूषण के कारण देश में 70 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। लंबे समय तक धूल और गंदगी भरे वातावरण रहने वाले लोगों को कैंसर और हृदय से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा अधिक रहता है। बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों से निकलने वाली गंदगी, धुआं, पेट्रोल और डीजल गाडिय़ों से काफी प्रदूषण फैलता है, जो काफी नुकसानदायक है। देश में हर तरफ पेड़ों का अनियंत्रित कटान हो रहा है। तालाबों को पाटकर बड़े-बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, होटल, इंस्टीट्यूट और कालोनियां विकसित की जा रही हैं। इससे पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है। वहीं बरसात कम होने के कारण पानी का संकट उत्पन्न हो गया है। सरकार जल संकट और पर्यावरण की समस्या से निपटने के लिए जल संरक्षण और पेड़ लगाओ अभियान चला रही है। लेकिन जब तक इंसान खुद जागरूक नहीं होगा, पर्यावरण संतुलन स्थापित कर पाना मुश्किल है। इसलिए बेहतर है, हम अपनी जीवन शैली में सुधार करें। हमें समझना होगा, यदि पानी और पेड़-पौधे बचेंगे, तो ही जीवन और उद्योग बचेंगे। इसलिए पर्यावरण संतुलन की दिशा में मिलकर काम करें।

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