परमाणु परीक्षण, युद्ध की आशंका और अपील

“आज विश्व के कई देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। आतंकी हमलों को लेकर भारत-पाक, दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन-वियतनाम समेत कई अन्य राष्ट्रों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। दक्षिण चीन सागर में भारत के हित भी है, जिसके कारण भी तनाव की स्थितियां बनती रहती हैं। दक्षिण कोरिया को लेकर अमेरिका और उत्तर कोरिया की तनातनी जगजाहिर है।”

sanjay sharma editor5संयुक्त राष्ट्रों ने दुनिया के तमाम राष्ट्रों से एक बार फिर परमाणु परीक्षणों को रोकने की अपील की है। साथ ही इस मामले पर 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में अमेरिका द्वारा तैयार मसौदा भी पेश किया गया। मसौदे के पक्ष में 14 वोट पड़े, जबकि मिस्र ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। सवाल यह है कि आखिर वे कौन सी वजहें हैं जिसके कारण संयुक्त राष्ट्रों को यह अपील करनी पड़ी? क्या परमाणु हथियारों की होड़ से तमाम परमाणु संपन्न राष्ट्रों चिंतित हो रहे हंै या फिर उन्हें लगने लगा है कि दुनिया एक विनाशकारी युद्ध के निकट पहुंच गई है? सवाल यह है कि क्या यह दुनियाभर में अपनी दादागिरी दिखाने वाले अमेरिका की नई चाल तो नहीं? दरअसल, यह अपंील उत्तर कोरिया के पांचवें परमाणु परीक्षण के तत्काल बाद की गई। हालांकि उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु परीक्षण को आत्मरक्षा का ईमानदार प्रयास बताया है। वह मानता है कि परमाणु संपन्न अमेरिका से मिल रही धमकियों के कारण उसे ऐसा करना पड़ा। दूसरी ओर अमेरिका के कूटनीतिक मानते हैं कि उत्तर कोरिया के पास परमाणु बम का होना खतरनाक हो सकता है। लेकिन अपील की केवल यही एक वजह नहीं है। आज विश्व के कई देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। आतंकी हमलों को लेकर भारत-पाक, दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन-वियतनाम समेत कई अन्य राष्टï्रों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। दक्षिण चीन सागर में भारत के हित भी है, जिसके कारण भी तनाव की स्थितियां बनती रहती है। दक्षिण कोरिया को लेकर अमेरिका और उत्तर कोरिया की तनातनी जगजाहिर हैं। कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि स्थितियां नहीं संभली और परमाणु शक्तियों से लैस राष्टï्रों ने संयम और समझदारी का परिचय नहीं दिया तो परिणाम भयावह हो सकती है। एक छोटा युद्ध दुनिया को विनाशकारी युद्ध की कगार पर खड़ा कर सकता है। हालांकि वे यह भी मानते हैं कि आज कोई भी देश इस स्थिति में नहीं है कि वह परमाणु युद्ध कर सके क्योंकि इससे संबंधित राष्टï्र का ही नहीं बल्कि प्रयोगकर्ता राष्टï्र का भी नुकसान होगा। जाहिर है संयुक्त राष्टï्र की सुरक्षा परिषद में चीन, अमेरिका, भारत, इजराइल, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया समेत कई देशों से परमाणु परीक्षण पर रोक लगाने की अपील की। ऐसा नहीं है कि परीक्षणों को लेकर इस तरह का कोई प्रयास नहीं किया गया है। गौरतलब है कि वर्ष 1996 में 160 से अधिक देशों ने व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) को मंजूरी दी थी। कुल मिलाकर संयुक्त राष्टï्र का यह प्रस्ताव सभी देशों को परमाणु परीक्षण से दूर रहने की अपील करता है। हालांकि अमेरिका के कई सांसद ऐसे मसौदे पर हस्ताक्षर करने के विरोधी है। उनका कहना है कि ऐसा करना अमेरिका के सुरक्षा विकल्पों को सीमित कर देगा। जाहिर है, जब अमेरिका में ही इस मामले पर दो राय है तो संरा की अपील कितनी कारगर होगी यह तो वक्त बताएगा।

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