पत्रकार राजीव को ही बदनाम करने में जुटी पुलिस, बदनाम थानाध्यक्ष पर कोई कार्रवाई नहीं

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद भी नहीं सुलझ पाई मौत की गुत्थी, हुआ अंतिम संस्कार

Capture 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। सरोजनीनगर थाना परिसर में पत्रकार व ब्लॉगर राजीव चतुर्वेदी की मौत की गुत्थी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बावजूद नहीं सुलझ सकी है। इस मामले में पुलिस अधिकारी एक ही रट लगाये हुए है कि राजीव थाने के गेट पर गिर गये थे। उन्हें दो अंजान लोगों की मदद से पुलिस ने सीएचसी में भर्ती कराया था। वहीं, देर शाम राजीव के बेटे ने भैंसाकुण्ड में मुख्याग्नि दी।
मूलरूप से इटावा के रहने वाले पूर्व पत्रकार व ब्लॉगर राजीव चतुवेदी कृष्णलोक कालोनी के बगल में अपने निजी मकान में रहते थे। मंगलवार को राजीव सरोजनीनगर थाने गये थे। उनकी थाने परिसर मौत हो गर्ई। पुलिस ने गुपचुप तरीके से सीएचसी में उन्हें मृत हालत में भर्ती कराया। उनकी मौत के बाद पुलिस अधिकारियों ने इस मामले की जांच एएसपी क्राइम को दी। राजीव के पोस्टमार्टम होने में काफी दुश्वारियां सामने आई। दोपहर करीब दो बजे तक थानाध्यक्ष सरोजनीनगर ने दस्तावेज नहीं भेजवाएं। इस बात से परिजन और उनके मित्र काफी परेशान रहे। एसएसपी के हस्तक्षेप के बाद दस्तावेज पहुंचे। उसके बाद पांच डॉॅक्टरों के पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया, जिसमें वीडियोग्राफी भी की गर्ई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में राजीव की मौत का कारण स्पष्टï नहीं हो सका। डॉक्टरों ने उनका बिसरा और दिल सुरक्षित कर लिया। उनके शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले।

हमेशा विवाद में रहे थानाध्यक्ष

सरोजनीनगर थानाध्यक्ष सुधीर कुमार हमेशा विवादों में रहे है। चाहे वह जमीन कब्जाने का मामला हो या शराब तस्कर को पकडऩे का। आशियाना में रहने वाले नगर निगम कर्मचारी के. के मौर्या की जमीन है। सुधीर जब आशियाना थानाध्यक्ष थे तो उन्होंने प्रापर्टी डीलर के साथ मिलकर इस जमीन को हथियाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद आशियाना में मामला दर्ज किया गया, जिसमें किसान मैकू, हरभन व एजेंट हारून को नामजद किया। सुधीर जब तक थानाध्यक्ष रहे तो इस मामले को ठंडे बस्ते में डाला रखा गया। इस मामले की पड़ताल कर रहे सब-इंस्पेक्टर से जांच ले ली गर्ई। जब सुधीर कुमार आशियाना थाना से हटे तो उसके दूसरे ही दिन हारून को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया।डीआईजी डीके ठाकुर के वक्त में हजरतगंज कोतवाली क्षेत्र से शराब का जखीरा पकड़ा गया था। तस्कर के ऊपर गैंगस्टर लगना था लेकिन सुधीर कुमार ने तस्कर से भारी रकम में तय तोड़ कर लिया था, लेकिन डीआईजी के आदेश पर गैंगस्टर लगा। रकम वापस करनी पड़ी थी।

साजिशन तो नहीं हुई पत्रकार राजीव चतुर्वेदी की मौत
राजीव चतुर्वेदी की मौत कहीं साजिश के तहत तो नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि कुछ अरसे पहले पत्रकार राजीव ने ट्रांसपोर्ट नगर में एक काम्प्लेक्स को करोड़ो रुपये में कद्दावर मंत्री को फरोख्त किया था। बताया जा रहा है कि उसमें कुछ रकम राजीव को मिली थी, बाकी रकम मिलने वाली थी। थानाध्यक्ष के मंत्री से करीबी संबंध बताये जा रहे हैं।

गेट पर ही गिर गये थे पत्रकार राजीव चतुर्वेदी: एएसपी क्राइम
राजीव की मौत की जांच कर रहे एएसपी क्राइम का कहना है कि राजीव थाना गेट पर गिर गये थे। दो अंजान लोगों ने उन्हें उठाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। राजीव की मौत हार्ट अटैक से हुई है। एएसपी क्राइम की इस बयान से साफ पता चलता है कि पुलिस महकमा थानाध्यक्ष सुधीर कुमार को बचाना चाह रहा है।

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