पत्रकार की मौत के दोषी थानाध्यक्ष को बचाने में जुटे पुलिस के अफसर

राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष प्रांशु मिश्रा ने कहा कि पत्रकार की मौैत की हो उच्चस्तरीय जांच
पुलिस के आला अफसर दोषी थानाध्यक्ष को बचाने में जुटे

 Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। थाना सरोजनीनगर के थानाध्यक्ष सुधीर कुमार को बचाने के लिये आला अफसरों ने नियम कायदे ताक पर रख दिये हैं। शुरुआती जांच में ही साबित हो गया कि थानाध्यक्ष इस पत्रकार की मौत को लेकर झूठ बोल रहे हैंं। इसके बावजूद उन्हें निलंबित करने की जगह 10 दिन की छुट्ïटी पर भेज दिया गया है। जाहिर है यह बातें साबित कर रही हैं कि थानाध्यक्ष की पहुंच के आगे हर कोई नतमस्तक है और अब पत्रकार राजीव की मौत का सच सामने आ पायेगा, इसकी संभावना कम ही है।
यह बेहद शर्मनाक है कि पत्रकार राजीव की मौत किन परिस्थितियों में हुई यह जानने की जगह पुलिस के अफसर इस बात को प्रचारित करने में जुट गये कि राजीव के ऊपर धोखाधड़ी के कई केस चल रहे हैं। राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष प्रांशु मिश्रा का कहना है कि अगर राजीव पर कोई आरोप थे तो इसका मतलब यह कि थाने बुलाकर उनसे गैर कानूनी तरीके से पूछताछ की जाये। उन्होंने कहा कि इस घटना की न्यायिक जांच की जानी चाहिये।
सबसे हैरत की बात यह है कि राजीव चतुर्वेदी का ड्राइवर जो इस घटना का अहम गवाह था वह गायब है और उसका मोबाइल स्विच ऑफ है। इसके बावजूद पुलिस के आला अफसरों ने यह कोशिश नहीं कि उसकी तलाश करें और हकीकत तक पहुंचें।
पुलिस के आला अफसर इस मामले को रफा-दफा करना चाहते हैं, जिससे यह मामला तूल न पकड़े। भाजपा प्रवक्ता मनीष शुक्ला का कहना है कि यह बेहद शर्मनाक है कि थाने में बुलाकर एक पत्रकार की इस तरह हत्या कर दी जाये और पुलिस के अफसर आरोपी थानाध्यक्ष को बचाने में जुट जायें। उन्होंने कहा कि हर हालत में इस घटना की सीबीआई जांच होनी चाहिये जिससे हकीकत सामने आ सके।
लखनऊ पुलिस के आला अफसरों की भी अजब कहानी है। यहां एक इंस्पेक्टर को सिर्फ इसलिये निलंबित कर दिया जाता है क्येांकि उसने एक सपा नेता के स्कूटर के कागज मांग लिये थे। मगर जब थाने में एक पत्रकार की मौत हो जाती है तो उसे बचाने के लिये सभी अफसर एकजुट हो जाते हैं और उसका बाल भी बांका नहीं होता।
पत्रकारों में पुलिस के इस रवैये को लेकर खासी नाराजगी है। अलग-अलग पत्रकारों के संगठन ने मांग की है कि पत्रकार राजीव की मौत की सीबीआई जांच होनी चाहिये और दोषी पुलिस अफसर को तत्काल बर्खास्त करना चाहिये। मगर जिस तरह से लखनऊ के आला अफसर इस एसओ को बचाने के लिये सबकुछ दांव पर लगा रहे हैं उससे इस बात की उम्मीद कम ही है कि मृतक राजीव को न्याय मिल सकेगा।

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