पत्रकारों में दहशत

पत्रकारों पर हमले के मामले में भारत को 13वें नंबर पर रखा गया है। पिछले ढाई वर्षों में 70 से ज्यादा पत्रकारों की मौत होनाsanjay sharma editor5 चिंता का विषय है। पिछले दिनों में उत्तर प्रदेश में जिस तरह की घटनाएं हुई हैं उससे पत्रकारों में दहशत का माहौल कायम हो गया है। जिस तरीके से मीडिया मैनेजमेंट किया जा रहा है वो मीडिया की आजादी के लिए बहुत बड़ा खतरा हो गया है।

प्रदेश में आए दिन पत्रकारों पर हमले हो रहे हैं। दबंगों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब पत्रकार क्या मीडिया हाउस पर भी हमले करने में उन्हें डर नहीं लग रहा। लखनऊ में सभासद के भाई ने अपने समर्थकों के साथ एक प्रतिष्ठिïत अखबार के दफ्तर पर हमला कर दिया। दफ्तर पर हमला करने के बाद भी दबंग शांत नहीं हुए और अस्पताल में इलाज के लिए गए पत्रकारों पर पुन: हमला बोल दिया। इनके भीतर कानून का कोई डर नहीं बचा है। जिस तरीके से पत्रकारों पर हमले हो रहे हैं वह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है। समाज में दिन-प्रतिदिन पत्रकारों की गरिमा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है और पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों के हित में काम करते हैं पर आज उन्हीं की सुरक्षा खतरे में है।
पत्रकारों पर हमले के मामले में भारत को 13वें नंबर पर रखा गया है। पिछले ढाई वर्षों में 70 से ज्यादा पत्रकारों की मौत होना चिंता का विषय है। पिछले दिनों में उत्तर प्रदेश में जिस तरह की घटनाएं हुई हैं उससे पत्रकारों में दहशत का माहौल कायम हो गया है। जिस तरीके से मीडिया मैनेजमेंट किया जा रहा है वो मीडिया की आजादी के लिए बहुत बड़ा खतरा हो गया है। मीडिया का एक हिस्सा आर्थिक और सामाजिक दबावों की वजह से सरकारों के साथ भी हो गया है और जो कम संख्या में विद्रोही लोग हैं उन पर चुन-चुन कर हमला हो रहा है। समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में इसका घातक परिणाम सामने आएगा।
इस तरह की घटना पर पूरी मीडिया बिरादरी को एक होना जरूरी है ताकि मीडिया की ताकत का एहसास भ्रष्टïाचारियों को हो। यदि मीडिया अभी भी एकजुट होकर इस तरह के भ्रष्टïाचारियों के खिलाफ खुलकर सामने नहीं आता है तो आने वाले समय में सच जनता के बीच लाना और भी जोखिम भरा काम होता जायेगा। पत्रकारों पर जानलेवा हमला और इस तरह खुलेआम उनकी हत्या लोकतंत्र की हत्या की तरह है। पिछले दिनों पत्रकार जगेन्द्र के मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी पत्रकारों पर हो रहे हमले पर चिंता जतायी थी। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि पत्रकार कमजोर होंगे तो पूरा लोकतंत्र कमजोर हो जाएगा।
समाज को सच्चाई का आईना दिखाने वाले पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर जहां सुप्रीम कोर्ट भी संजीदा है वहीं चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें, पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कतई गंभीर नहीं दिखतीं।

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