पत्रकारों के चुनाव में घमासान, अपने-अपने पक्ष में लॉबिंग तेज

4Captureपीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राज्यस्तरीय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव को लेकर घमासान तेज हो गया है। पत्रकारों ने अपने-अपने पक्ष में लॉबिंग तेज कर दी है। विभिन्न पदों पर 58 लोगों ने अपना नामांकन करा दिया है। चुनाव 6 सितंबर को होना है। उधर चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद दूसरे गुट ने भी चुनाव का ऐलान करते हुये कहा है कि चुनाव 5 सितम्बर को कराये जायेंगे। पत्रकारों के इस विवाद से राजनेता और अधिकारी बेहद खुश हैं। पत्रकारों के आपसी विवाद का फायदा लोगों को मिलता रहे इसके लिये वह चाह रहे हैं कि यह विवाद अभी और बढ़े।
उल्लेखनीय है राज्यस्तरीय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का कार्यकाल दो वर्ष का होता है। नियमानुसार दो वर्ष के भीतर यह चुनाव हो जाने चाहिये थे मगर मौजूदा समिति ने तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी चुनाव नहीं कराये। इससे पत्रकारों में गुस्सा बढ़ता जा रहा था। कई पत्रकारों ने समिति के पदाधिकारियों से चुनाव कराने का अनुरोध किया मगर उन्होंने चुनाव कराने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसके बाद पत्रकारों ने बैठक करके फैसला किया कि अगर एक सप्ताह के भीतर मौजूदा समिति चुनाव कराने का फैसला नहीं करेगी तो पत्रकारा बैठक करके खुद चुनाव का फैसला कर लेंगे। इस निर्णय से समिति के पदाधिकारियों को भी अवगत कराया गया, मगर इसके बावजूद उन्होंने चुनाव कराने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसके बाद पत्रकारों की बैठक बुलाई गई और फैसला कर लिया गया कि अब चुनाव करा दिये जायें। चुनाव समिति घोषित कर दी गई। शनिवार को नामांकन कराने का आखिरी दिन था। इसमें लोगों ने भारी दिलचस्पी दिखाई और अलग-अलग पदों पर 58 पत्रकारों ने अपना नामांकन दखिल कर दिया।
चुनाव की घोषणा के बाद दूसरे खेमे में भी हड़बड़ी मची। मौजूद मान्यता समिति जिसका कार्यकाल एक साल पहले ही खत्म हो गया था, उसने भी पत्रकारों की जीवीएम बुलाई और दावा किया कि 390 पत्रकारों ने उनकी बैठक में भाग लिया। इस बैठक में भी चुनाव कराने के लिये एक समिति बनाई गई और कहा गया कि यह समिति ही तय करेगी कि कब चुनाव हों। अलबत्ता बातचीत के दौरान कहा गया कि चुनाव एक महीने बाद ही कराये जायेंगे। सभी समझ गये कि फिलहाल यह समिति अभी चुनाव कराने के पक्ष में नहीं है।
मगर इसके अगले दिन ही 600 पत्रकारों में से 490 पत्रकारों ने 6 सितम्बर को होने वाले चुनाव में अपनी सहमति जताते हुये 100 रुपये नामांकन शुल्क जमा भी कर दिया। इससे जाहिर हो गया कि चुनाव 6 सितम्बर को करा दिये जायेंगे। इतनी बड़ी संख्या में पत्रकारों के नामांकन कराने से हडक़ंप मच गया। दूसरा गुट समझ गया कि अगर यह चुनाव हो गये तो फिर इस गुट को मान्यता मिल जायेगी।
इसके बाद इस गुट ने भी आनन-फानन में घोषणा कर दी कि चुनाव 5 सितम्बर को कराये जायेंगे। जाहिर है जब दूसरा गुट 6 सितम्बर को चुनाव करा रहा है तो उससे एक दिन पहले ही चुनाव कराकर फायदा लिया जा सकता है। लिहाजा इस गुट ने यह भी नहीं सोचा कि 5 सितम्बर को जन्माष्टïमी है और त्यौहार के दिन चुनाव कराना उचित नहीं है।
स्वाभाविक है कि अब पत्रकारों की यह आपसी लड़ाई चर्चा का विषय बन गई है। राजनेता और अफसर चाह रहे हैं कि लड़ाई और बढ़े। पत्रकारों के विवाद में आखिर उन्हीं के हित सधते हैं।

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