पतंजलि पर मेहरबानी क्यों…

पतंजलि मैगी के अलावा ‘आकाश योग’ जो कि आटा नूडल्स उत्पादक है, उसने भी बिना लाइसेंस के उत्पादन शुरू कर दिया। इस मैनुफेक्चरर पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह तो सिर्फ उन कंपनियों के नाम हैं जो उजागर हो गये हैं। ऐसी न जाने कितनी कंपनियां होंगी जो इसी तरह के उत्पाद बेच रही हैं और लोगों से मोटी रकम वसूल रही हैं।

sanjay sharma editor5पतंजलि के आटा नूडल्स 15 दिनों के बाद ही विवादों में आ गई, क्योंकि उन्होंने फूड सेफ्टी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) से इजाजत लिये बिना नूडल्स बेचना शुरू कर दिया। इस मामले में एफएसएसएआई ने पतंजिल को नोटिस तो भेजा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसको लेकर देश भर में हर स्तर पर पतंजलि नूडल्स का विरोध होने लगा। देश के उच्च सदन राज्यसभा में भी इसका विरोध राजद नेता केसी त्यागी ने किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में कार्रवाई न होने कारण भाजपा सरकार और रामदेव के करीबी रिश्ते हैं। नियमों का उल्लंघन कर खाद्य पदार्थ बनाने वाली ऐसी कंपनियों पर सरकार द्वारा कार्रवाई न करना यही दर्शाता है कि कहीं न कहीं कंपनी को सहयोग किया जा रहा है। सवाल उठना लाजिमी भी है। आखिर पतंजलि पर केन्द्र सरकार इतनी मेहरबान क्यों हैं? पंतजलि ने बिना परमिट के नूडल्स बनाकर बाजार में उतार दिया और उसके बाद कई समस्याएं सामने आई। ऐसे में प्रश्न उठता है कि जब यह खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य की दृष्टिï से ठीक नहीं है तो इसे तत्काल क्यों नहीं बंद कराया गया। नेस्ले कंपनी के मैगी नूडल्स को भारत में इसलिये प्रतिबंधित कर दिया गया था क्योंकि उसमें सीसा की मात्रा पाई गई थी जो स्वास्थ्य के लिहाज से हानिकारक है। मैगी पर हुई कार्रवाई के बाद नेस्ले कंपनी का करोड़ों का नुकसान हुआ और लगभग छह माह तक मैगी बाजारों में नहीं आ सकी। यह कार्रवाई इसीलिये की गई कि इस नूडल्स को खाने से लोगों का स्वास्थ्य खराब न हो। अब जब पतंजलि के नूडल्स बिना मानक के बाजार में बिक रहे हैं तो आखिर इस मामले में कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। कहीं ऐसा तो नहीं कि सरकार और पतंजलि में गुपचुप तरीके से कोई समझौता हो गया हो? खैर जो भी हो लेकिन इस तरह के खाद्य पदार्थ जो गुणवत्ता के नाम पर बहुत महंगी कीमत पर बेचे जा रहे हैं उनका गंभीरता से परीक्षण तो होना ही चाहिये।
पतंजलि मैगी के अलावा ‘आकाश योग’ जो कि आटा नूडल्स उत्पादक है, उसने भी बिना लाइसेंस के उत्पादन शुरू कर दिया। इस मैनुफेक्चरर पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह तो सिर्फ उन कंपनियों के नाम हैं जो उजागर हो गये हैं। ऐसी न जाने कितनी कंपनियां होंगी जो इसी तरह के उत्पाद बाजारों में बेच रही हैं और लोगों से मोटी रकम वसूल रही हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य के साथ तो खिलवाड़ होता ही है, लाखों के सरकारी राजस्व को भी चूना लगता है। सरकार को चाहिये कि ऐसी कंपनियों के संबंध में तत्काल कार्रवाई करे और ऐसे खाद्य पदार्थों को बाजार में आने से रोके। अगर ऐसा नहीं होता है तो इसका मतलब साफ है कि सरकार को लोगों के स्वास्थ्य से कोई सरोकार नहीं है।

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