पड़ोसी राज्य में शराब बंदी का स्वागत

शराब बंदी को लेकर समाजिक संगठनों से लगाए आम लोगों ने सरकार की इस पहल पर एक बेहतरीन प्रतिक्रिया दी है। इससे बिहार सरकार उत्साहित है। यह समाज के सामूहिक मानस की भावना व्यक्त करती है। इसीलिए यह हलचल आम न रह कर खास बन जाती है।

sanjay sharma editor5बिहार में शराब बंदी को लेकर कई आशंकाएं थीं। इसकी बड़ी वजह सामाजिक जीवन में इस कानून की स्वीकार्यता को लेकर थी। शराब बंदी में बड़ी बात यह थी कि समाज इसे कितना स्वीकार करेगा। लेकिन शराब बंदी के बाद समाज में बढ़ी स्वीकार्यता से सरकार को अपने मंसूबे में कामयाबी मिलती दिख रही है। सरकार के इस फैसले का लोगों ने स्वागत किया है।
शराब बंदी को लेकर समाजिक संगठनों से लगाए आम लोगों ने सरकार की इस पहल पर एक बेहतरीन प्रतिक्रिया दी है। इससे बिहार सरकार उत्साहित है। यह समाज के सामूहिक मानस की भावना व्यक्त करती है। इसीलिए यह हलचल आम न रह कर खास बन जाती है। बिहार सरकार ने पहली अप्रैल से देसी शराब पर पूरी तरह पाबंदी तो लगा दी, पर शहरी इलाकों में विदेशी शराब के खिलाफ लोग जगह जगह सडक़ों पर उतरे तो सरकार ने पूरी तरह से शराब बंदी को लागू किया। इस कदम को सामाजिक सशक्तीकरण के तौर पर देखे जाने की जरूरत है।
आम लोगों की यह जागरूकता बदलते समाज का भी आईना है, पहले जहां लोग चुप रह कर तमाशा देखा करते थे, अब वे इसका विरोध कर रहे हैं। सामाजिक जीवन में शराब के दुष्प्रभावों ने लोगों को सडक़ पर उतरने के लिए बाध्य कर दिया। सरकार का शराब को लेकर यह सकारात्मक फैसला जनता की तरफ से काफी सराहा जा रहा है। बिहार सरकार ने शराबबंदी की ऐतिहासिक पहल को एक मुकाम तक पहुंचाया। यह अपने आप में बेहद सकारात्मक रहा कि जनता की ओर से उठने वाली आवाज को सरकार ने अनसुना नहीं किया। शराब पर पाबंदी लगने के बाद अनेक जगहों पर लोगों ने खुशियां मनायीं।
हालांकि शराब बंदी की असली चुनौती अभी बाकी है। कानूनी सख्ती के अलावा सामाजिक स्तर पर इसकी रोक से ही सरकार को बड़ी सफलता मिल सकेगी। केवल सरकारी तंत्र के भरोसे इस पर रोक संभव नहीं है। दूसरे चरण में विदेशी शराब पर पाबंदी राज्य सरकार ने तय तिथि से पहले कर अपनी जिम्मेदारी दिखाई। ऐसे में हर किस्म के शराब का विरोध बताता है कि लोग किसी भी कीमत पर पूर्ण शराब बंदी के लिए तैयार दिख रहे हैं। बिहार में शराब बंदी दूसरे राज्यों के लिए एक सबक है।

Pin It