पठानकोट: दर्द आतंकवाद का, खेल सियासत का

नीरज कुमार दुबे
पठानकोट वायुसेना एअरबेस पर हुआ आतंकी हमला जितना निंदनीय था उतना ही निंदनीय इस मुद्दे पर राजनीति करना था। जब समय शहीद जवानों के परिवारों के साथ खड़े होने का हो, जब समय देश को एकजुट रखने का हो, जब समय एकजुटता के साथ आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब देने का हो, तब राजनीतिक दलों का आरोपों-प्रत्यारोपों में उलझना निराशा का भाव पैदा करता है। वैश्विक मंचों पर हम आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय एकजुटता की वकालत करते हैं लेकिन सवाल उठता है कि क्या अपने देश में ही हम एकजुट हैं? किसी हमले के बाद हम दूसरे की विफलताओं की सूची तैयार करने और उसके पूर्व के बयानों के जरिये उसे घेरने में लग जाते हैं बजाय इसके कि मिलकर कोई सख्त संदेश दे सकें।
हमारे यहाँ कुछ दल कभी आतंकवाद के रंग पर चर्चा कर विवाद खड़ा करते हैं तो कभी उसे किसी खास वर्ग से जोडऩे की गलती करते हैं तो कभी किसी को सजा सुनाए जाने पर उसके बचाव में उतर जाते हैं। वहीं आम लोग सोशल मीडिया मंचों पर शहीदों को श्रद्धांजलि देकर या कैंडल मार्च निकाल कर ही अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ लेते हैं। क्या कभी हमने सोचा है कि जिस परिवार को देश के लिए अपने बेटे के बलिदान पर गर्व है जब वह यह देखता होगा कि सत्ता पक्ष या विपक्ष को कोई फर्क नहीं पड़ा है तो उस पर क्या बीतती होगी? कमाऊ व्यक्ति के घर से चले जाने से परिवार पर जो आफत आती है उससे होने वाली वेदना तब और बढ़ जाती होगी जब यह दिखता होगा कि बलिदान व्यर्थ चला गया और किसी को उस बलिदान से ज्यादा लेना-देना नहीं है।
पठानकोट हमले के बाद आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई राजनीतिक लड़ाई में तब्दील होती नजर आई जब कांग्रेस ने सरकार से पूछा कि उसे पाकिस्तान सरकार से ऐसा क्या आश्वासन मिल गया कि प्रधानमंत्री लाहौर चले गये जबकि पहले उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के साथ तब तक बातचीत नहीं की जाएगी जब तक वह सीमापार आतंकवाद बंद नहीं करता। साथ ही कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के उन बयानों को भी जारी किया जोकि उन्होंने पाक आतंकियों के पिछले हमलों पर गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए दिये थे। भाजपा का जवाब आया कि कांग्रेस मुद्दे पर राजनीति कर रही है क्योंकि उसने यदि संसद में ध्यान दिया होता तो वहां विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बताया था कि पाकिस्तान की ओर से क्या आश्वासन दिये गये हैं। भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने भी तंज कसते हुए कहा कि एक चाय के बदले हमारे छह जवान शहीद हो गये। कांग्रेस ने सरकार से यह भी जानना चाहा कि हर मुद्दे पर बोलने वाले प्रधानमंत्री हमले के पीछे पाक का हाथ होने के बावजूद अब तक उसके खिलाफ बोले क्यों नहीं हैं? जवाब में भाजपा ने भी कांग्रेस के शासनकाल में हुए हमलों की सूची दर्शाते हुए तत्कालीन सरकार की कथित नाकामियों की चर्चा की।
इस समय जबकि पूरा देश पठानकोट आतंकी हमलों से दु:खी है ऐसे में यदि वरिष्ठ नेताओं के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जाकर शहीद परिवारों से मिलते तो कितना अच्छा रहता। संदेश जाता कि ऐसे संवेदनशील मसलों पर हमारे यहाँ राजनीति नहीं होती। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अब खतरा आईएसआई, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिज्बुल आदि संगठनों से ही नहीं है बल्कि आईएसआईएस और अल कायदा भी भारत में अपनी पैठ बढ़ाने को उत्सुक दिखाई दे रहे हैं। ऊपर से सबसे बड़ा खतरा हमारे अपने वह लोग हैं जो आतंकी संगठनों के हाथों में खेल रहे हैं। गौरतलब है कि पठानकोट हमले की पीछे भी यही कहा जा रहा है कि इसमें हमारे कुछ लोग भी मिले हुए थे। इसके अलावा खुफिया एजेंसियों ने सेना, वायुसेना और बीएसएफ से जुड़े कुछ लोगों की पिछले दिनों गिरफ्तारियाँ करते हुए दावा किया है कि यह लोग आईएसआई के हाथों में खेल रहे थे।
हाल ही में अमेरिकी अखबार ‘यूएस टुडे’ में प्रकाशित उस रिपोर्ट पर ध्यान देना चाहिए जिसमें बताया गया है कि आईएसआईएस की ओर से भारत में हमले की तैयारियां चल रही हैं और उसमें भविष्यवाणी की गई है कि यह हमला अमेरिका को ऐतिहासिक टकराव के लिए उकसाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक आईएस भारत में कई भारतीयों को आतंकी बनाने का जिम्मा सौंप चुका है। विदेशों में रह रहे भारतीय भी आईएस के ‘मिशन इंडिया’ को कामयाब बनाने के लिए लग गए हैं। इनके निशाने पर ऐसे मुस्लिम युवा हैं जो मुस्लिम राष्ट्र का ख्वाब देखते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक आईएस के निशाने पर नेट सैवी मुस्लिम युवा ज्यादा हैं। इसके साथ ही हाल ही में भारतीय सेना की ओर से भी देश में आईएसआईएस की बढ़ती पैठ को लेकर चिंता जताई गई थी।
बहरहाल, इसमें कोई दो राय नहीं कि इस बार पाकिस्तान सरकार अत्यधिक दबाव में है और सरकार के साथ ही आईएसआई और सेना ने भी पठानकोट हमले की निंदा की है। लेकिन यह दबाव भारत से ज्यादा शायद अमेरिका की ओर से है क्योंकि अमेरिका का मानना है कि अब पाकिस्तान के लिए समय आ गया है कि वह सार्वजनिक या निजी बातचीत में किए गए उन वादों को पूरा करे, जिनके तहत उसने कहा था कि आतंकी नेटवर्कों के खिलाफ कार्रवाई में और पठानकोट हमले के साजिशकर्ताओं को न्याय के कठघरे में लाने के मामले में कोई पक्षपात नहीं किया जाएगा।

Pin It