पंजाब में आतंकी हमला

सबसे बड़ी विडंबना तो यह है कि एक दिन पहले खुफिया एंजेसी आईबी के अलर्ट जारी करने के बावजूद इस घटना को रोकने में हम नाकाम रहे। आईबी ने कहा था कि देश में आतंकी हमले के मद्देनजर आतंकी घुसपैठ कर सकते हैं, फिर भी इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई।

sanjay sharma editor5आतंकवादियों ने एक बार फिर नापाक हरकत की है। अबकि बार आतंकियों ने पंजाब की धरती को चुना। एक बार फिर बेकुसूर लोग आतंकवाद के शिकार हुए। इस घटना ने मुम्बई के 26/11 आतंकी हमले के घाव को ताजा कर दिया। मुम्बई हमले का घाव अभी भरा नहीं कि आतंकवादियों ने एक और घाव दे दिया। यह हमला किसके इशारे पर हुआ है और यह आतंकी कहां से आए है, यह किसी से छिपा नहीं है।
सबसे बड़ी विडंबना तो यह है कि एक दिन पहले खूफिया एंजेसी आईबी के अलर्ट जारी करने के बावजूद इस घटना को रोकने में हम नाकाम रहे। आईबी ने कहा था कि देश में हमले के लिए आतंकी घुसपैठ कर सकते हैं, फिर भी इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई। पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने भी इस मुद्दे पर केन्द्र सरकार को घेरा कि जब पता था तो सीमा सील क्यों नहीं की गयी। आतंकियों को सीमा पर ही रोकने की कोशिश क्यों नहीं की गई। उनका भी कहना सही है। अलर्ट के बावजूद हम आतंकी घटना रोकने में नाकाम हैं तो यह हमारी कमी है।
अभी कुछ दिनों पहले ही उफा में भारत और पाक के प्रधानमंंत्रियों के बीच सार्थक बातचीत की पहल शुरू हुई थी। इसके बाद से ही पाकिस्तान लगातार नापाक हरकते कर रहा है। भारत लगातार सकारात्मक रुख अपनाए हुए है और पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। पंजाब के दीदानगर के हमले में आतंकवादियों के निशाने पर अमरनाथ यात्री थे। आतंकियों ने जिस बस पर हमला किया है, वो जम्मू जा रही थी। बस में बड़ी संख्या में अमरनाथ यात्री सवार थे। गौरतलब है कि अमरनाथ यात्रा से पहले से ही इस बार अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमले की आशंका जताई गई थी, फिर भी इसमें लापरवाही बरती गई। इस हमले में एक महिला आतंकी भी शामिल थी।
गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद ऐसा पहली बार है जब भारत में किसी आतंकी हमले में कोई महिला आत्मघाती हमलावर शामिल है। इस हमले के बाद पूरे देश में अलर्ट जारी कर दिया गया। केन्द्र सरकार ने कहा कि भारत सरकार इस तरह के हालात से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। सरकार कितनी भी दंभ भर ले कि आतंकवाद से निपटने के लिए हम तैयार हैं, पर ऐसा है नहीं। दर्जनों बेकुसूर लोगों की जान गवांं कर दो-चार आतंकवादियों को मारकर हम अपनी पीठ नहीं थपथपा सकते। आखिर उन निर्दोष लोगों का क्या कुसूर है जो इसमें अपनी जान गवां दिए। उनका क्या कुसूर है जिन्होंने अपना बेटा खोया है या पति।

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