पंछी, नदियां, पवन के झोंके कोई सरहद न इन्हें रोके….

Captureफिल्म रिफ्यूजी का यह गाना इन पक्षियों पर बिल्कुल सटीक बैठता है। मौसम में हल्की-हल्की नमी आने लगी है। इसी के साथ हर वर्ष की भांति साइबेरियन पक्षियों का आगमन भी देश के भिन्न-भिन्न हिस्सों में शुरू हो गया है। साइबेरिया में इन दिनों चारों तरफ सिर्फ बर्फ ही बर्फ हो जाती है। इसीलिये अपने आने वाले सदस्यों व खुद को जीवित रखने के लिये ये साइबेरियन पक्षी हजारों मील लम्बी उड़ान भरके भारत देश का रुख करते हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी इन पक्षियों का ठीक-ठाक संख्या में आगमन होता है। राजधानी से सटा बाराबंकी हो या उन्नाव जहां भी पोखरों व तालाबों की स्थिति अच्छी है, ये पक्षी अपना डेरा जमा लेते हैं। उन्नाव के पक्षी विहार में नवम्बर माह तक हजारों की संख्या में इन पक्षियों को देखा जा सकता है। नवम्बर से लेकर मार्च तक ये पक्षी नये महमानों को जन्म देने के साथ ही उनके बड़े होने का इंतजार करते हैं। मार्च के अंतिम दिनों में इनका वापस अपने देश लौटना शुरू हो जाता है। इन पक्षियों को देख कर हमें भी यह संदेश मिलता है कि सरहदें बनाकर किस तरह से हम इंसानों को बांटा गया। हवा से बात करने वाले इन पङ्क्षरदों को हम इंसानों की तरह कोई सरहद पार करने के लिये न किसी पासपोर्ट की जरूरत होती है और न ही किसी बीजा की। इन्हें जरूरत पड़ती है तो सिर्फ अपने पंखों को हवा में फैलाने की।

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