न सूत न कपास, तंबाकू सेवन रुकने की आस

रोहित सिंह
Captureलखनऊ। मोदी सरकार के तंबाकू नियंत्रण अभियान पर खतरा मंडरा रहा है। वर्ष 2015-16 के लिए भारत सरकार की ओर से कोई बजट जारी नहीं हुआ है। इसके अलावा पिछले एक साल से अभियान में लगे कर्मचारियों की सैलरी नहीं मिल पाई है। साथ ही हैरानी वाली बात ये है कि राष्टï्रीय स्तर पर भी अभियान के लिए बजट कम कर दिया गया है। ऐसे में तंबाकू नियंत्रण अभियान का लक्ष्य कै से पूरा होगा इस बात पर संशय है। केंद्र सरकार की ओर से नामित राज्य कंसलटेंट सतीश त्रिपाठी के मुताबिक पिछले एक साल से सैलरी नहीं मिली है लेकिन हम लोगों की कोशिश यही रहती है कि इसका अभियान पर कोई असर न पड़े। केंद्र सरकार की ओर से तंबाकू नियंत्रण अभियान 2008-09 में पॉयलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत लखनऊ और कानपुर से शुरू किया गया। इन दो जिलों के बाद करीब 8 और जिलों को शामिल किया गया है। जिसमें बाराबंकी, हरदोई, फर्रूखाबाद, झांसी, इलाहाबाद, ललितपुर, मिर्जापुर प्रमुख रूप से शामिल हैं। वैसे तो तंबाकू सेवन प्रतिषेध कानून यानी कोटपा पूरे देश में लागू है। जिसके अंतर्गत परिसर में बीड़ी सिगरेट, पान मसाला, गुटखा आदि का सेवन करते हुए पकड़े जाने पर रुपये 200 तक का तत्काल आर्थिक दंड है। इसके आलावा चालान का भी नियम है।
वैसे तो यह कानून पूरे देश में लागू है। लेकिन केंद्र सरकार की ओर से बजट कम आने से यह योजना सीधे जिलों में लागू कर पाना मुश्किल हो पा रहा है। हालांकि इस क्षेत्र में काम करने वाले एनजीओ की मदद से यूपी के सभी जिलों में यह अभियान चल रहा है लेकिन अभियान के रिस्पांस की जानकारी का दबाव केवल नामित 10 जिलों के लिए ही है।

केंद्र सरकार की ओर से नामित 10 जिलों में कानपुर सबसे ज्यादा रेवन्यू देने वाला जिला है। माह अप्रैल-मई में कानपुर में 400 से अधिक चालानों से कुल 72 हजार रूपये का रेवन्यू आया है। इसके आलावा लखनऊ से 5300 रूपये , बरेली से 23625 रूपये, रामपुर से 25770 रुपये प्राप्त हुआ है। राज्य नोडल अधिकारी आलोक कुमार ने बताया कि तंबाकू नियंत्रण अभियान में कानपुर की डीएम रोशन जैकब की ओर से पूरी मदद दी जा रही है। जिसकी वजह से इतना रेवन्यू मिला है। 31 मई को विश्व तंबाकू नियंत्रण दिवस है। हर जिले के लिए प्रत्येक साल का बजट साढ़े सैतालीस लाख रुपये आता है।
तंबाकू नियंत्रण अभियान के प्रति जागरूकता जरूरी
तंबाकू नियंत्रण अभियान के स्टेट कंसल्टेंट सतीश त्रिपाठी का कहना है कि राज्य के सभी थानों सहित आम आदमी को तंबाकू नियंत्रण कानून कोटपा को लेकर जागरूकता आवश्यक है। कोटपा कानून बिल्कुल ट्रैफिक कानून की तरह काम करता है। इसमें भी चालान रसीद के साथ जुर्माने का प्रावधान है। इस कानून के अंतर्गत 21 विभागों को रखा गया है। जिसमें प्रमुख रूप से सभी शैक्षणिक संस्थान, सरकारी कार्यालय, रेलवे, सरकारी ओर प्राइवेट हॉस्पिटल, एयरपोर्ट सहित सभी सार्वजनिक स्थानों पर यह कानून केंद्र सरकार की ओर से लागू किया गया है।

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