न टॉयलेट न बाथरूम लखनऊ यूनीवर्सिटी की धूम

-हिना खान
Captureलखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय को गाहे -बगाहे लाखों करोड़ों का अनुदान मिलता रहता है। कभी नवीनीकरण के नाम पर तो कभी सुन्दरीकरण के नाम पर सरकार ये अनुदान देती रहती है। लाखों रुपए फूंकने के बाद भी विश्वविद्यालय और उसके संकायों की स्थिति में सुधार तो दूर इसकी हालत बद से बदतर होती जा रही है। ऐसे में परिसर के अंदर ही यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर विवि प्रशासन छात्रों को सामान्य सुविधाएं क्यों नहीं मुहैया करा पा रहा है?
यह महज आरोप नहीं बल्कि सच्चाई है। शिक्षकों का कहना है कि विभागों की हालत सुधरना तो दूर की बात है स्थिति यह है कि विवि के अधिकतर शौचालयों की स्थिति इतनी बदहाल है कि इसका इस्तेमाल करना तो दूर इसके दरवाजे तक जाना भी एक बड़ी चुनौती है। छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों की शिकायत पर टैगोर लाइब्रेरी के जिम्मेदारों ने विवि को पत्र लिखकर वास्तविकता से रूबरू कराने की कोशिश कई बार की। उनकी शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी। छात्रों का कहना है कि पानी और शौचालय जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने में विवि प्रशासन नाकाम रहा है। छात्र-छात्राएं विवि प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहते हैं कि आखिर सरकार से मिला पैसा कहां लगाया जा रहा है।
दिलचस्प पहलू तो यह है कि विवि ने एनजीओ और कई निजी कम्पनियों ने पिछले महीने एक इंटरनेशनल सेमिनार का आयोजन किया गया था। जिसमें शौचालय व स्वच्छता को मुद्ïदा बनाया गया। इस गंभीर मुद्दे पर बड़े-बड़े विद्वानों और विशेषज्ञों ने कई दिन तक अपने विचार रखे। इस सेमिनार में सभी ने स्वच्छता के लिए स्वच्छ शौचालय की आवश्यकता पर जोर दिया था पर सेमिनार खत्म होने के साथ यह बड़ी-बड़ी बातें भी प्रेस विज्ञप्ति से आगे नहीं बढ़ सकीं। इससे ये साफ जाहिर है कि विवि प्रशासन की कथनी और करनी मे फर्क है। कई विभागों के साथ टैगोर लाइब्रेरी में एक महिला और एक पुरुष शौचालय है जिसकी हालत किसी थर्ड क्लास रेलवे स्टेशन के सार्वजनिक शौचालय जैसी ही है। शौचालय की दीवारों और छतों से प्लास्टर गिरता रहता है साथ ही सीवर लाइनें पूरी तरह से चोक हो चुकी हैं, इसमें पानी भी जमा रहता है। ताज्जुब की बात तो यह है कि प्रतिदिन लाइब्रेरी में तीन से चार सौ लोगों का आवागमन होता है। छात्रों और शिक्षकों से लेकर कर्मचारी और अधिकारी तक के लिए केवल एक ही शौचालय है वह भी पैर रखने लायक नहीं है। इस बात की शिकायत कुलपति से कई बार पत्र लिखकर की गई है लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। लाइब्रेरी शिक्षकों को शौचालय की बदबू और गंदगी से जूझना पड़ रहा है। उनकी इन समस्याओं को दूर करने के लिए विवि प्रशासन ने अभी तक कोई पहल नहीं की है।

गंदगी का अम्बार
विवि के कई विभाग गंदे शौचालय की समस्या से जूझ रहे हैं वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक विभाग के वाटर कूलर के पास गन्दगी और पान की पीक का ढेर लगा हुआ है। यह वाटर कूलर विभाग में काम करने वाले बाबुओं के लिए है जिसकी न तो सफाई होती है न ही जिम्मेदारों को इसके रखरखाव करने की ही जरूरत महसूस होती है। दिलचस्प बात तो यह है कि यह वाटर कूलर तो उन्हीं के विभाग में लगा है जिस रास्ते से दिन भर मे कई बार कुलपति गुजरते रहते हैं इसके बाद भी हालत बदहाल बने रहना तो प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर जाता है।

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