नौकरी दिलाने के नाम पर रिश्वत मांग रहा स्वास्थ्य विभाग का बाबू

  • स्वास्थ्य विभाग के कार्यालयों में चार साल से नौकरी के लिए भटक रही नर्स ने लगाया आरोप
  • विभाग से न्याय नहीं मिलने पर दी आत्मदाह की चेतावनी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। स्वास्थ्य महकमें में भ्रष्टाचार चरम पर है। लखनऊ स्थित नर्सिंग विभाग के बाबू सीपी यादव पर कानपुर के लाला लाजपत राय बाल रोग चिकित्सालय में स्टाफ नर्स रही अनीता यादव ने ज्वाइनिंग दिलाने के नाम पर दो लाख रुपये घूस मांगने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही न्याय नहीं मिलने पर आत्मदाह की चेतावनी दी है।
अनीता यादव ने बताया कि उपचारिका के पद पर वह 1 जुलाई 1999 में तैनात हुई थी। इस पद पर 2 सितंबर 2002 तक कार्यरत रहीं। अचानक तबीयत खराब होने की वजह से वह मेडिकल लीव पर चली गयी। इसके बावजूद भी सेवा में योगदान के लिए बराबर प्रयासरत रही। इसलिए स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक द्वारा 29-10-2009 को सेवा में दोबारा लेने का आदेश दिया गया। उस आदेश के आधार पर उसने अस्पताल में अपने पद पर तैनाती को लेकर कई बार प्रयास किया। लेकिन नर्सिंग विभाग में तैनात बाबू सीपी यादव ने बार-बार अड़चने खड़ी करने की कोशिश की। इसके बाद नियुक्ति दिलवाने के नाम पर पैसों की डिमांड शुरू कर दी। नौकरी पाने के लिए अनीता यादव ने अपने जेवरात भी उनको दे दिये। जब दोबारा वह नर्सिंग विभाग में नियुक्ति से संबंधित प्रक्रिया की जानकारी के लिए पहुंची तो उनसे वहां तैनाक बाबू ने पैसों की मांग करते हुए कहा कि, डॉ. बद्री विशाल निदेशक नर्सिंग व अन्य अधिकारियों को दो लाख रुपये देने पर ही काम हो पायेगा। उनसे यह भी कहा गया कि पूरे पैसों की व्यवस्था करो, तभी फाईल पर निर्णय होगा। लेकिन पैसों की डिमाण्ड पूरी नहीं होने के कारण। उनको सेवा में नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि जेवरात लेने वाले
को वह नहीं पहचानती हैं। लेकिन मामले की जांच की जाए, तो सच्चाई सामने आ सकती है।

12 साल सेवा नहीं देने के बावजूद इनको मिल गयी ज्वाइनिंग
अनीता यादव ने बताया कि वह गंभीर बीमारी के कारण 6 वर्ष 6 माह तक मेडिकल अवकाश पर रहीं। इसलिए उनको उनके पद पर दोबारा ज्वाइनिंग नहीं दी गयी। जबकि इसी विभाग में चिकित्साधिकारी के पद पर 12 साल तक अनुपस्थित रहे लोगों को ज्वाइनिंग दी गयी है। यह कहां का न्याय है। उन्होंने न्याय के लिए उपाध्यक्ष महिला आयोग, प्रमुख सचिव चि.स्वा. लखनऊ, चि.स्वा. मंत्री समेत अन्य उच्च स्तरीय अधिकारियों और मुख्यमंत्री को भी शिकायती पत्र भेजा है, जिसमें मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कार्यवाही की मांग की है। अनीता यादव का कहना है कि वह विभागीय उच्च अधिकारियों व शासन स्तर पर न्याय की गुहार लगा चुकी हैं। लेकिन उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में वह दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। जबकि नौकरी नहीं होने की वजह से परिवार भुखमरी के कगार पर है। यदि 15 दिन के भीतर उनको न्याय नहीं मिला, तो मजबूर होकर विधान भवन के समक्ष आत्मदाह करेंगी।

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