नोडल सेन्टरों पर बाहर से लिखी जांच रोकने की तैयारी

अस्पताल प्रशासन करेगा जांच रिपोर्ट्ïस का निरीक्षण

पैथालॉजी जांच में फर्जीवाड़ा रोकने की डॉक्टरों को दी गई जिम्मेदारी ताकि जरूरतमंद मरीजों की हो सके जांच

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। राजधानी में उत्तर प्रदेश हेल्थ सिस्टम स्ट्रेन्थनिंग प्रोजेक्ट (यूपीएचएसएसपी) के तहत पैथालॉजी जांचों के लिए शुरू हुए नोडल सेन्टर पर जांच के लिए आने वाले मरीजों की पूरी निगरानी चिकित्सकों के जिम्मे होगी। जांच लिखने से लेकर रिपोर्ट लेने तक का काम चिकित्सकों का होगा। रिपोर्ट भी डॉक्टरों तक पहुंचायी जायेगी ताकि नोडल सेंटरों पर कोई बाहर से लिखी जांच न करा पाये। पैथालॉजी जांच में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए ऐसा किया जा रहा है।
निदेशक यूपीएचएसएसपी आलोक कुमार का कहना है कि जब हर महीने अस्पताल प्रशासन स्वयं नोडल सेन्टर पर हुयी पैथालॉजी जांचों का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करेगा। तो गलत तरीके से जांच नही हो पायेगी। अस्पतालों में नोडल सेन्टर खोले जाने का मुख्य कारण था कि जरूरतमंद व अर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को जांच के लिए चक्कर न लगाना पड़े। यदि सही से निगरानी न की गयी तो यहां पर भी उन मरीजों का हक मरेगा, जिनको वाकई में इसकी जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में पैथालॉजी जांचों के लिए खुले नोडल सेन्टर पर होने वाली पैैथालॉजी जांचें बिलकुल मुफ्त हो रही हैं। जिनकी बाहर बाजार में कीमत 5 हजार रुपये तक है। जिन सरकारी अस्पतालों में नोडल सेन्टर खोले गये हैं वहां के अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी होगी की वह हर महीने इन सेन्टरों का निरीक्षण करें। जानकारों की मानें तो सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों को रोजाना सैकड़ों मरीज ओपीडी में देखने पड़ते हैं। ऐसे में अस्पतालों में नोडल सेन्टर खुल जाने से जहां एक तरफ मरीजों को फायदा होने की उम्मीद बंधी है। वहीं दूसरी तरफ चिकित्सकों के कंधों पर एक और बड़ी जिम्मेदारी आ गयी है। एक तरफ मरीजों को देखने के साथ ही यह भी ध्यान रखना होगा की कोई जांच ऐसी न लिखी जाये, जिस पर बाद में कोई सवाल उठे। साथ ही जरूरतमंद मरीजों की जांच में कोई समस्या न हो। बताते चलें कि दिसम्बर माह में राजधानी के पांच अस्पतालों में डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की तरफ से पैथालॉजी जांच के लिए नोडल सेन्टर खोले जाने थे। जिनमें से सिविल अस्पताल, बलरामपुर अस्पताल, अवंतीबाई बाल महिला चिकित्सालय में नोडल सेन्टर शुरू हो गये हैं। जहां पर 15० तरह की पैैथालॉजी जांचों के लिए खून के नमूने लिये जा रहे हंै।

डॉक्टर चाहें तो न हो दुरुपयोग
आलोक कुमार का कहना है कि जिन अस्पतालों में नोडल सेन्टर खोले गये हैं वहां के चिकित्सक चाहें तो किसी प्रकार का फर्जीवाड़ा नहीं होगा। उन्होंने सभी अस्पतालों के प्रमुखों को निर्देश देते हुए कहा है कि चिकित्सक वही जांचें लिखेें, जिसके वो विशेषज्ञ हों।

चिकित्सकों के हस्ताक्षर का होगा सत्यापन
मरीजों को देखने के बाद जरूरत होने पर चिकित्सक जांच लिखते हैं, अब जांच लिखने के बाद पर्चे पर हस्ताक्षर करना होगा। उसके बाद ही नोडल सेन्टर पर मरीज के खून के नमूने लिये जायेंगे। वहीं अस्पताल प्रशासन अपने अस्पताल में नियुक्त चिकित्सकों के हस्ताक्षर का सत्यान करेगा। जिससे पर्चे पर लिखी जांचें चिकित्सक की ही हैं या नहीं इसका पता लगाया जा सके।

बलरामपुर अस्पताल बनायेगा पहचान पत्र
नोडल सेन्टर पर मरीजों को चिकित्सक के द्वारा लिखी गयी जांचें कराने के लिए पहचाना पत्र की फोटो कॉपी ले जानी होती है लेकिन जिन मरीजों के पास पहचान पत्र नहीं होगा उनको बलरामपुर अस्पताल प्रशासन पहचान पत्र बना कर देगा। अस्पताल द्वारा बनाया जाने वाला पहचान पत्र नम्बरों का होगा। विशेष कर आईडी उन महिलाओं तथा बच्चों को दी जायेगी, जिनका पहचान पत्र नहीं बना होगा। नोडल सेन्टरों पर सिर्फ सरकार की तरफ से जारी पहचान पत्रों को मान्यता दी जायेगी।

रिपोर्ट लेने पर देनी होगी रिसीविंग
ओपीडी का मरीज हो या फिर भर्ती मरीज सभी को रिपोर्ट लेने के बाद रिसीविंग देनी होगी। भर्ती मरीजों की रिसीविंग रिपोर्ट लेने वाले वार्डब्वाय को देनी होगी।

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