नोटबंदी: अब मोदी और राहुल सडक़ पर ठोकेंगे ताल, गिनाएंगे नफा-नुकसान

19 को कानपुर में पीएम और जौनपुर में कांग्रेस उपाध्यक्ष जनसभा को करेंगे संबोधित
यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दोनों रैलियां मानी जा रही महत्वपूर्ण

captureसुनील शर्मा
लखनऊ। नोटबंदी पर संसद में हुए हंगामे के बाद अब इसकी लड़ाई सडक़ पर लाने की तैयारी हो रही है। इस मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व कांगे्रस उपाध्यक्ष राहुल गांधी एक ही दिन अलग-अलग स्थानों पर रैली को संबोधित करेंगे। एक नोटबंदी के फायदे गिनाएंगे तो दूसरे नुकसान। दोनों इसके जरिए अपने कार्यकर्ताओं व समर्थकों में उत्साह पैदा करने का प्रयास करेंगे। रैली की भीड़ उनकी लोकप्रियता का मापदंड होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को पांच सौ व हजार के नोट बंद करने की घोषणा की थी। जिसके विरोध में पूरा विपक्ष लामबंद हो गया है। 16 नवंबर से शुरू हुआ ससंद का शीतकालीन सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया है। नोटबंदी पर भाजपा से दो-दो हाथ करने की ठाने विपक्ष का नेतृत्व कर रही कांग्रेस अब सडक़ पर उतरने की तैयार कर रही है। इस मुद्दे पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के निजी भ्रष्टïाचार की जानकारी व उसके सबूत होने की बात कहकर राजनीति माहौल में गरमी पैदा कर दी है।
हालांकि कांग्रेस के सहयोगी दलों में इसे लेकर असमंजस की स्थिति है। उन्हें इस बात की शिकायत है कि राहुल को यह दावा करने से पहले सहयोगी दलों को विश्वास में लेना चाहिए था। फिलहाल राहुल इसे अब जनता के सामने पेश करने की बात कह रहे है। जिसके लिए कांग्रेस ने उसी दिन को चुना है जिस दिन प्रधानमंत्री की भी रैली होनी है। कानपुर में 19 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक जनसभा को संबोधित करेंगे तो वहीं इसी दिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी जौनपुर में नोटबंदी के विरोध में आयोजित रैली को संबोधित करेंगे। एक तरफ जनसभा में जहां प्रधानमंत्री मोदी नोटबंदी से होने वाले फायदे गिनाते नजर आएंगे वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी इससे हुए नुकसान को बताते हुए दिखेंगे।
राहुल के द्वारा मोदी के भ्रष्टïाचार के खिलाफ एकत्र सबूत देखने की बेसब्री के चलते विपक्षी दलों को इस दिन का इंतजार है। राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो मोदी की जनसभा व राहुल की रैली में जुटने वाली भीड़ भी दोनों की लोकप्रियता का मापदंड बनेगी। साथ ही नोटबंदी के पक्ष व विपक्ष में आमजन की राय को लेकर किए जा रहे दावों की सच्चाई का भी पता लगेगा। फिलहाल अभी तो राहुल गांधी प्रधानमंत्री के भ्रष्टïाचार को किस सबूत के आधार पर दुनिया के सामने लाएंगे, इसे लेकर उत्सुकता का माहौल बना हुआ है। दोनों दलों ने रैली को कामयाब बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। वहीं भाजपा भी मोदी की रैली की जोरशोर से तैयारी करने में जुटी है।
राहुल के आरोप बेबुनियाद: भाजपा
प्रधानमंत्री के द्वारा किए गए भ्रष्टïाचार का सबूत अपने पास होने की बात कह कर भले ही राहुल गांधी ने राजनीतिक माहौल को गरम कर दिया हो, लेकिन भाजपा इसे लेकर कतई चिंतित नहीं है। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता हृदय नारायण दीक्षित कहते हैं कि राहुल की बातों को खुद उनकी पार्टी के नेता गंभीरता से नहीं लेते तो आम जनता कहां तवज्जो देगी। वैसे भी वे काफी दिन से सबूत पास होने की बात कर रहे हैं, कभी कहते हैं कि उन्हें लोकसभा में इसके डर से बोलने नहीं दिया जा रहा तो कभी कहते हैं कि इसे जनता के सामने रखूंगा। जबकि सत्यता यह है कि उनके पास ऐसा कुछ भी नहीं है। करीब ढाई साल के केंद्र सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टïाचार हुआ ही नहीं है। इसलिए जनता भी उनके इस प्रोपोगंडे को समझ रही है।

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