नेता जी में सीएम और सीएम में दिखते हैं नेताजी: राजकिशोर

कैबिनेट मंत्री राजकिशोर सिंह ने राजनीति की शुरुआत वर्ष १९९२-९३ में बस्ती छात्रसंघ के अध्यक्ष के रूप में की थी। 2000 में जिला पंचायत सदस्य बने और 2002 में विधायक और फिर काबीना मंत्री बने। 2007 और 2012 में भी राजकिशोर सिंह ने जीत हासिल की। श्री सिंह अखिलेश सरकार के उन मंत्रियों में से हैं जिन्होंंने अपने संघर्ष से राजनीति में एक विशेष मुकाम हासिल किया है। जिला पंचायत के चुनावों में जहां पार्टी के बड़े से बड़े नेताओं के परिजनों की बहुत बुरी हालत हो गई, वहीं राजकिशोर सिंह के पुत्र ने प्रदेश में सर्वाधिक मतों से चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया। प्रदेश के पशुधन एवं लघु सिचाई मंत्री राजकिशोर सिंह ने  4पीएम के संपादक संजय शर्मा से अपने राजनैतिक अनुभवों पर विस्तार से बात की। पेश हैं उसके प्रमुख अंश….

Captureआपके बेटे ने पंचायत चुनाव में प्रदेश में रिकॉर्ड वोटों से जीत हासिल की। क्या मूल मंत्र है इस जीत का?
देखिये सच यह है कि कोई मूलमंत्र नहीं था। मेरा लडक़ा बहुत नकलची है मुख्यमंत्री जी का। मुख्यमंत्री जी के हर काम को टीवी पर देखता है और अखबारों में पढ़ कर वैसा ही बनने की कोशिश करता है। उन्हीं की स्टाइल की नकल करके लोगों के पास गया। चुनाव लड़ा और प्रदेश में सबसे ज्यादा वोटों से जीत गया।

आपने भी ताकत लगायी होगी पुत्र के राजतिलक के लिये?
नहीं मैं एक बार भी नहीं गया। यह तो मैं जानता था कि क्षेत्र के लोग बहुत प्यार करते हैं। मेरे भाई डिंपल को भी लोगों ने लोकसभा चुनाव में बहुत वोट दिये। मगर मेरा बेटा 86 प्रतिशत वोट हासिल कर लेगा इसकी कल्पना भी मैंने नहीं की थी।

तो आप मान रहे हैं सब कुछ सीएम की लोकप्रियता के कारण हो गया, तो 2017 में पार्टी अखिलेश यादव का चेहरा इसलिए सामने रख रही है कि वो नेता जी से ज्यादा लोकप्रिय हैं?
देखिये नेता जी तो हम सबके अभिभावक हैं। सब जानते हैं कि प्रदेश में 68 प्रतिशत नौजवान हैं। सबको मुख्यमंत्री जी में नेता जी और नेता जी में मुख्यमंत्री जी दिखायी पड़ते हैं। तो यह कहना असंभव है कि कौन ज्यादा लोकप्रिय है।

अगर तुलना करनी पड़े तो?
मैंने आपको बताया कि तुलना की ही नहीं जा सकती। मुख्यमंत्री जी जितनी फिक्र करते हैं। किसानों का आम आदमी का दर्द समझते हैं वैसा कोई विरला ही कर सकता है। किसानों की जितनी चिंता नेता जी करते थे उतनी ही चिंता अब मुख्यमंत्री जी भी
करने लगे हैं।

आप इतनी तारीफ कर रहे हैं अपने नेता और अपनी सरकार की मगर कानून व्यवस्था पर लगातार सवाल खड़े होते रहते हैं। लोग कहते हैं कि गुंडे हावी हो जाते हैं अपकी सरकार में?
आप किसी भी गांव में चले जाइये। गांव में एकदम स्वतंत्रता का और भरोसे का माहौल है। कुछ अराजक तत्व जरूर हैं जो सरकार बनते ही झंडा लगाकर घूमने लगते हैं। जो पार्टी के लिये एक कदम भी नहीं चले वो झंडा बांध कर घूमते हैं। ऐसे ही लोग बदनामी करा देते हैं।

लोग कहते हैं कि मायावती शासन में कानून व्यवस्था की हालत ज्यादा बेहतर थी?
उस सरकार में त्राहि-त्राहि मची थी। थाने में लडक़ी की हत्या हो जाती थी। बसपा विधायक अपनी नौकरानी से बलात्कार करते थे। पैसे न देने पर इंजीनियर को पीट-पीटकर मार दिया जाता था। हमारी सरकार में कानून व्यवस्था अच्छी है। कुछ लोग बेवजह सरकार को बदनाम करने की कोशिश
कर रहे हैं।

एक साल बाद चुनाव विधानसभा चुनाव हैं मुकाबला किससे होगा? बसपा से या भाजपा से?
देखिये बसपा तो कोमा में चली गयी है। बसपा आज सीबीआई के हाथ की कठपुतली है भाजपा उसे जैसे चाहे घुमा सकती है। हमारा किसी से मुकाबला नहीं है। हम अखिलेश यादव जी के नेतृत्व में अगली सरकार बनायेंगे।

आप बसपा के पीछे सीबीआई की बात कर रहे हैं। सीबीआई तो यादव सिंह के बहाने आप लोगों के भी पीछे है?
यह तो लोगों का भ्रम है। हमारे नेता कभी ऐसा कोई काम नहीं करते जिसके चलते उन्हें डरना पड़े। ये सब विरोधियों द्वारा रची गई साजिश ही लगती है। पार्टी को बदनाम करने के लिये ये सब किया जा रहा है।

आपका मानना है कि आपका भाजपा से मुकाबला होगा?
नहीं हमारा किसी से मुकाबला नहीं होगा। भाजपा को जनता अच्छी तरह से पहचान चुकी है। जिस दिन मोदी जी यहां प्रचार के लिये आयेंगे उसी दिन प्रदेश की जनता हिसाब मांगेगी कि पंद्रह लाख कहां चले गये? अच्छे दिन कहां चले गये? देखियेगा जिस दिन यह रियेक्शन होगा उस दिन भाजपा के सारे सपने टूट जायेंगे।

आपको पशुधन और लघु सिंचाई विभाग मिला है। पशुधन सीधे किसानों से जुड़ा विभाग है। क्या हाल है इस विभाग का?

बेहतरीन! प्रदेश में रोजाना पांच लाख लीटर दूध का रिकॉर्ड उत्पादन हो रहा है। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। कामधेनु योजना ने गांव की तस्वीर ही बदल दी है। आज भी गांव में एक गाय, एक बकरी और एक भैंस रखकर ग्रामीण जीवन यापन कर रहे हैं। हाईब्रिड की गायों से दूध की क्रांति हो गयी है।

मगर गाय तो किसी और पार्टी का ब्राण्ड हो गयी?
देखिये जो पार्टी गाय पर राजनीति करती है वो करती कुछ नहीं है। यह लोग गाय को लेकर सिर्फ तनाव पैदा करते हैं। हम गाय की दिल से सेवा करते हैं। यही कारण है कि पूरे देश में यूपी का पशुधन विभाग सबसे बेहतर साबित हुआ है।
साढ़े तीन सालों में विभाग की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या रही?
पहले पशुओं की बहुत मौत होती थी और टीकाकरण के लिये भी पैसा लगता था। सबसे पहले मुख्यमंत्री जी ने टीकाकरण मुफ्त किया जिसका नतीजा हुआ कि पशुओं की मृत्य दर में भारी कमी आयी। इसके अलावा पशुधन संरक्षण विकास के लिये बहुत कार्य किये जा रहे हैं जिससे आम लोगों को लाभ मिल रहा है।

गांव में लोग अभी भी परेशान हैं कि जानवरों के अस्पताल कम हैं, जो हैं वहां डॉक्टर नहीं हैं। जहां डॉक्टर हैं वहां दवा नहीं हैं?
नहीं अब हालात बदल गये हैं। अब गांव-गांव तक हमारे कर्मचारी हैं। पशुओं को अस्पताल तक लाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। हमारे पास ऐसी व्यवस्थायें हैं कि गांव में पशुओं को दिक्कत नहीं हो सकती।

आप खुद कोई जानवर पालते हैं?
जब से हम पैदा हुए हैं तबसे कभी ऐसा नहीं हुआ कि हमारे घर में दो दर्जन से कम गाय रही हों। कभी मेरे घर आइयेगा सबसे पहले गाय का दूध और दही मिलेगा, और मेरा दावा है कि ऐसा दही आपने पहले कभी नहीं खाया होगा।

Pin It