नेताओं और अफसरों के करीबियों को यादव सिंह ने बांट दिए 13 हजार करोड़ के ठेके, रमा रमण देखते रहे…

  • यादव सिंह की तरह मायावती और मुलायम दोनों के दुलारे हैं नोएडा के सीईओ रमा रमण
  • यादव सिंह जब लूट रहा था नोएडा को तो उसके बॉस थे रमा रमण
  • सीबीआई को पता चला कि 13 हजार करोड़ के ठेके दिए गये थे प्रभावशाली लोगों को

DOLLY1संजय शर्मा
लखनऊ। यह भ्रष्टचार की इंतहा थी, जिस आईएएस अफसर पर नोएडा के भ्रष्टïाचार को रोकने की जिम्मेदारी थी वह ही यादव सिंह के काले कारोबार में भागीदार बन गया। किसी भी विकास प्राधिकरण में बिना सीईओ या उपाध्यक्ष की मर्जी के बिना कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ सकती। यादव सिंह हजारों करोड़ के ठेके और प्लाट बांटने में बेईमानी करता चला गया और नोएडा के सीईओ रमा रमण आंखें बंद करके बैठे रहे। जाहिर है यह भ्रष्टचार का ऐसा गठजोड़ था, जिससे लोगों के हजारों करोड़ के वारे-न्यारे होते चले गए। अब सीबीआई जिस तरह से इस भ्रष्टचार के गठजोड़ का खुलासा कर रही है। उससे तय हो गया है कि यादव सिंह के साथ-साथ अब रमा रमण के दिन भी अच्छे नहीं रहने वाले हैं।

सीबीआई की पहली पड़ताल में ही पता चला है कि यादव सिंह ने 13 हजार करोड़ के ठेके अफसरों और नेताओं के करीबियों में बांट दिए थे। यादव सिंह की रणनीति थी कि अगर वह खुद फंसे तो उसके साथ इतने बड़े लोग फंसें कि उसका बाल बांका भी न हो पाए। इसी रणनीति के तहत उसने इन बड़े लोगों को अपने जाल में फंसाना शुरू किया था। सीबीआई अब लगभग 75 ऐसी फर्मों के दस्तावेजों की तलाश कर रही है, जिन फर्मों में नेताओं और अफसरों के करीबियों की बड़ी पूंजी लगी है। सीबीआई जानती है कि अगर इन दस्तावेजों की सही से पड़ताल हो गई तो एक के बाद एक भ्रष्टïाचार की सारी परतें सामने आ जायेंगी।

सीबीआई की जांच से नोयडा के सीईओ रमा रमण भी खासे परेशान हैं। वह जानते हैं कि यादव सिंह की कारगुजारियों पर उनका आंखें मूंद कर बैठना अब उन्हें भारी पडऩे वाला है। रमा रमण भी यादव सिंह की तरह सत्ता के बेहद दुलारे हैं। वह मायावती की पसंद थे। मायावती ने ही उन्हें नोयडा में तैनात कराया था। माया शासन में रमा रमण और मायावती के भाई सिद्धार्थ की दोस्ती के किस्से नोयडा में हर किसी की जबान पर थे।
जब सत्ता बदली तो यह तय हो गया कि अब रमा रमण के बुरे दिन शुरू हो गए। मगर यादव सिंह की तरह रमा रमण भी जानते थे कि सत्ता के बड़े लोग किस तरह मैनेज किए जाते हैं। कुछ दिन बाद ही सपा महासचिव राम गोपाल यादव और रमा रमण की दोस्ती के किस्से भी नोयडा में आम हो गए थे। मुख्यमंत्री ने बीच में कई बार रमा रमण को हटाने का मन बनाया मगर हर बार रामगोपाल यादव की सरपरस्ती रमा रमण को बचा ले गई।

अब, जब सीबीआई जांच शुरू हो गई तब से सब लोग कहने लगे कि अगर वक्त रहते रमा रमण को हटा दिया गया होता तो शायद यादव सिंह इस हद तक अपने कारनामों को अंजाम नहीं दे पाता। सीबीआई अब रमा रमण की भी जन्म कुण्डली तलाश कर रही है। वे जानना चाहती है कि 13 हजार करोड़ के जो टेंडर गलत तरीके से बांटे गए उसमें रमा रमण की कितनी भागीदारी है। हैरानी की बात यह है कि देश भर में हंगामा होने और सीबीआई जांच शुरू होने के बावजूद अभी तक रमा रमण को नोयडा से हटाया नहीं गया।

उधर हजारों करोड़ के इस घोटाले में यादव सिंह पर ईडी का भी शिकंजा कस गया है। प्रवर्तन निदेशालय ने भी यादव सिंह से जुडे लोगों उनकी कंपनियों और बाकी फर्मों का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। प्रर्वतन निदेशालय ने आयकर विभाग से भी यादव सिंह की संपत्तियों का ब्योरा मांगा है। प्रवर्तन निदेशालय के अफसर भी हजारों करोड़ के इस बंदर बांट से हैरान है। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इन संपत्तियों की गणना कहां-कहां से करें।

राजनैतिक गलियारों में भी यादव सिंह का मामला अब लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनेता चर्चा कर रहे हैं कि यादव सिंह के जरिए कई बड़े नेताओं और अफसरों ने अपना काला धन विदेश में जमा कर दिया है। इसके लिए मनी लॉड्रिंग का सहारा लिया गया है। जाहिर है कि यह काला धन विदेश में कहां-कहां है, यह जानना अब खुफियां एजेंसियों के लिए खास महत्वपूर्ण बन गया है।

भाजपा के लिए यादव सिंह मामला बहुत महत्वपूर्ण है। भाजपा चाहती है कि 2017 के विधानसभा चुनाव से थोड़ा पहले ही सीबीआई की जांच रिपोर्ट आ जाए। भाजपा जानती है कि अगर ईमानदारी से जांच हो गई तो सपा और बसपा के कई नेता इसमें फंस जाएंगे। यह भाजपा के लिए बेहमद अनुकूल स्थिति होगी जब विधान सभा चुनाव से पहले यह कह सकेगी यह दोनों क्षेत्रीय पार्टियां भ्रष्टïाचार के दलदल में फंसी हुई है। लिहाजा इन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

मोदी सरकार भी जानती है कि सीबीआई का किस तरह इस्तेमाल किया जाता है। अमित शाह खुद सीबीआई का भयंकर रूप देख चुके हैं। लिहाजा मोदी टीम अब सीबीआई के जरिए सपा और बसपा को मैनेज करने की कोशिश करेगी। पिछले दिनों जब लोकसभा में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव कांग्रेस का साथ छोडक़र मोदी सरकार के संसद चलाने के मुद्दे पर समर्थन देते नजर आए, तो सबने कहा कि यह यादव सिंह के घर पड़े सीबीआई छापे का असर है। जाहिर यह आने वाले वक्त की तस्वीर है।

नोएडा के राजा हैं रमा रमण
नोएडा के किसी भी कारोबारी से पूछ लीजिए उसका रटा-रटाया जवाब होगा कि रमा रमण तो यहां के राजा हैं। उनकी मर्जी के बिना यहां पत्ता भी नहीं हिलता। ये लोग सुकून से बताएंगे कि किस तरह रमा रमण और यादव सिंह की हर काम में पार्टनरशिप थी। इन व्यापारियों का कहना है कि अगर कोई बड़ा प्लाट लेना हो या फिर हजारों करोड़ के ठेके। अगर रमा रमण से बात की जाती थी तो वह कह देते थे कि यादव सिंह से बात कर लो। वो जो कहेंगे वैसा ही हो जाएगा। जाहिर है कि
यादव सिंह के हर भ्रष्टचार पर रमा रमण की स्वीकृति थी

 

Pin It