नीतीश ने लखनऊ में ठोंकी ताल तो उधर लालू ने कहा यूपी में चुनाव नहीं लड़ेगा राष्ट्रीय जनता दल

  • छोटे दलों के सहारे यूपी में अपनी राजनीति चमकाने में जुटे नीतीश
  • बीएस4 की रैली को लेकर पार्टी और प्रशासन आमने-सामने

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

Capture3लखनऊ। बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष नीतीश कुमार छोटे दलों के सहारे यूपी में अपनी राजनीति चमकाने में जुटे हैं। उन्होंने शराब बंदी के मुद्दे के साथ ही यूपी में पिछड़ों को अपने साथ जोडऩे की मुहिम तेज कर दी है। इसी वजह से बीएस4 की तरफ से आयोजित रैली में नीतीश कुमार ने सभी छोटे दलों से एकजुट होने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि यूपी में पिछड़ों का वोट बैंक हासिल करने के मकसद से लंबे-चौड़े वादे करने वाले राजनीतिक दलों की पोल खुल चुकी है। जो पार्टियां खुद को पिछड़ों और दलितों का हितैषी बताती हैं, हकीकत में उनको पिछड़ों और दलितों के सम्मान की नहीं बल्कि अपने वोट बैंक की चिन्ता रहती है। उधर नीतीश के सपनों पर उनके ही पार्टनर लालू यादव ने आज पानी फेर दिया। उन्होंने कहा कि राजद उत्तर प्रदेश में चुनाव नहीं लड़ेगा बल्कि यहां धर्मनिरपेक्ष ताकतों को मजबूत करेगा। नीतीश जहां उत्तर प्रदेश में बड़ी संभावनाएं देखकर चुनाव में उतरने की तैयारी कर रहे हैं वहीं लालू के बयान ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया।
बिहार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी शराबबंदी की मांग कर आधी आबादी को अपने खेमे में करने के लिए मुख्यमंत्री नीतिश कुमार लगातार उत्तर प्रदेश में जनसभाएं कर रहे हैं। इसी क्रम में बसपा मुखिया मायावती के खिलाफ बगावत करके पार्टी छोड़ चुके आरके चौधरी की रैली में भी मुख्य अतिथि बनकर लखनऊ पहुंचे। इस कार्यक्रम में आरके चौधरी मायावती को अपनी ताकत दिखाने में जुटे हैं, जबकि नीतीश कुमार छोटे दलों के माध्यम से उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में जमीन तलाशने में जुटे हैं। इस रैली में नीतीश कुमार से लगातार संपर्क में जुटे छोटे राजनीतिक दलों को साथ लाने का भी निर्णय लिया गया है। जबकि अब तक बसपा से अलग होने के बाद केवल आरके चौधरी ही खुलकर नीतीश कुमार के साथ आये हैं। इसके अलावा अपना दल की कृष्णा पटेल भी लगातार नीतीश कुमार के संपर्क में है। इसके अलावा किसान मंच और अन्य कई छोटे दलों के साथ मिलकर नीतीश कुमार यूपी में एक थर्ड फ्रंट तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा है कि उनकी पार्टी यूपी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में हिस्सा नहीं लेगी। ये अलग बात है कि उनकी पार्टी चुनाव में किसी बड़ी पार्टी को समर्थन दे सकती है। इस बात के संकेत जरूर दिए हैं। प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए आज चौधरी की रैली में राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष नीतीश की मौजूदगी से प्रदेश में नये राजनीतिक समीकरणों के उभरने और थर्ड फ्रंट बनने के संकेत मिल रहे हैं, जो शराब बंदी अभियान के जरिए उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी पैठ बनाने की कोशिश में जुटे नीतीश कुमार की सबसे अहम रणनीति मानी जा सकती है। बिहार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी शराबबंदी की मांग कर आधी आबादी और छोटे दलों को अपने साथ करने में नीतीश कुमार कितने कामयाब होते हैं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन इतना तो तय है कि नीतीश कुमार का दखल यूपी की राजनीति में लगातार बढऩे से भाजपा, सपा और बसपा की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

बसपा में हो सकती है बड़ी बगावत

मायावती के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक चुके चौधरी ने यह भी कहा कि बसपा में किसी भी समय एक बड़ी बगावत हो सकती है। पार्टी के लोग किसी मजबूत विकल्प की तलाश में हैं। ऐसे लोगों को साथ लेकर उन्होंने शक्ति प्रदर्शन करने का निर्णय लिया था लेकिन जिला प्रशासन ने नीतीश कुमार की रैली पर पेंच फंसा दिया। राजधानी लखनऊ के बिजली पासी किले के पास निर्धारित रैली स्थल को असुरक्षित बताकर आखिरी वक्त पर अनुमति देने से इंकार कर दिया। इसके साथ ही रैली स्थल बदलकर स्मृति उपवन करने का निर्देश दिया, जिसे आरके चौधरी ने यह कहकर बदलने से इंकार कर दिया कि सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। ऐन वक्त पर कार्यक्रम स्थल में बदलाव संभव नहीं है।

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