निर्णायक मोड़ पर पहुंची जंग

शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी को हटाने की मांग

14 जून से जेल भरो आंदोलन की शुरुआत करेंगे कल्बे जव्वाद

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। कल्बे जव्वाद का सियासी जेहाद निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। डीएम/डीआईजी की पहल के बाद कल्बे जव्वाद की वार्ता सीएम अखिलेश यादव से उनके सरकारी निवास पर आधा घंटे से ज्यादा वक्त तक हुई। कल्बे जव्वाद ने शुरू से लेकर आखिर तक की घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा सीएम से बताया। सीएम ने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से बात करने के बाद इस विषय पर कोई निर्णय लेने की बात कही है। वहीं कल्बे जव्वाद ने 14 जून को इमामबाड़ा सिब्तैनाबाद से बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां देने का ऐलान कर महौल को गर्म कर दिया है।
वहीं समाजवादी पार्टी के आला नेताओं में भी इस बात को लेकर रोष है। पीलीभीत से विधायक और सपा के राज्यमंत्री हाजी रियाज अहमद ने भी शिवपाल सिंह यादव से इस बात को लेकर रोष जताया और ये भी कह दिया की अगर कोई ठोस कदम नहीं उठाएंगे तो मैं इस्तीफा दे दूंगा और इससे सरकार की बदनामी भी हो रही है। तमाम सुन्नी समुदाय के धर्मगुरुओं ने भी इस बात को लेकर नाराजगी जाहिर की। वहीं मुस्लिम धर्मगुरु कल्बे जव्वाद का कहना है की सपा सरकार अपने कानों में तेल डाल कर बैठी है और हम आगामी 14 जून के बाद सरकार के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन करेंगे।
दरअसल इस कहानी की शुरुआत शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन बनने को लेकर है क्योंकि वसीम रिजवी सपा के कद्ïदावर मंत्री आजम खान के करीबी माने जाते हैं। मुस्लिम धर्मगुरु कल्बे जव्वाद उनका विरोध कर रहे थे और इसके बावजूद भी वसीम रिजवी को शिया वक्फ बोर्ड का चेयरमैन बना दिया गया। जाहिर है जहां सपा के कद्ïदावर मंत्री आजम खान से जुड़ा मामला हो तो फिर सरकार आखिर कैसे कोई ठोस कदम उठा सकती है इसीलिए सरकार बैकफुट पर आ गयी है। सपा सरकार चाहते हुए भी कोई कदम नहीं उठा पा रही है। वहीं अगर बात करें तो असाउद्ïदीन ओवैसी के आगरा में रैली करने पर मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा था की मुलायम सिंह योगी आदित्य नाथ से तो गले मिलते हैं लेकिन ओवैसी को रैली की इजाजत नहीं देते। दरअसल सूत्रों के मुताबिक ये बात आ रही है की मौलाना कल्बे जव्वाद के प्रदर्शन पर सरकार ठोस कदम नहीं उठा रही है। इसलिये असाउद्दीन ओवैसी भी कल्बे जव्वाद का समर्थन कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक 14 के बाद विशाल प्रदर्शन में असाउद्दीन ओवैसी भी शामिल हो सकते हैं। अगर ओवैसी इस प्रदर्शन में शामिल होते हैं तो यूपी सरकार की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं और वहीं सपा सरकार के मंत्री इस बात का विरोध भी कर ही चुके हैं।
जाहिर है बुधवार को हुई इस मुलाकात का अगर जल्द कोई निष्कर्ष नहीं निकलता है तो सरकार के लिए कोई न कोई नयी मुसीबत खड़ी हो सकती है। अब देखना यही है आखिर सरकार और कल्बे जव्वाद की यह जंग कब तक मंजिले मकसूद तक पहुंचती है और इस लड़ाई में किसकी जीत होती है और इसको इस तरह भी कहना गलत नहीं होगा कि ये जंग वर्चस्व की जंग है।

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