नियंत्रित की जाए नशीले पदार्थों के सेवन की मात्रा

वर्तमान में गुजरात ही एकमात्र राज्य है जहां वर्षों से शराबबंदी लागू है। परंतु इस शराबबंदी के कारण गुजरात में अपराधों में कई गुनी वृद्धि हुई। गुजरात में अवैध शराब बनाने के बड़े-बड़े कारखाने हैं। अवैध शराब बनाने का धंधा दिन दूना रात चौगुना फल-फूल रहा है।

एल.एस. हरदेनिया
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने राज्य में शराबबंदी लागू कर दी है। ऐसा करके उन्होंने एक बड़ा खतरा मोल लिया है। बिहार एक ऐसा प्रदेश है जहां कायदे-कानून की धज्जियां उड़ाई जाती हैं। वह ऐसा प्रदेश है जहां ट्रेनों में आरक्षण का कोई अर्थ नहीं होता है। जहां बिना टिकट ट्रेन यात्रा का प्रतिशत आज भी सबसे ज्यादा है। ऐसे राज्य में शराबबंदी पर अमल करवाना काफी कठिन होगा। यह शायद नीतीश कुमार की अग्नि परीक्षा होगी।
वैसे बिहार पहला ऐसा राज्य नहीं है जहां शराबबंदी लागू की गई है। पूर्व में अनेक राज्यों में शराबबंदी की गई है। एक जमाने में तमिलनाडु में शराबबंदी थी। तत्कालीन बंबई राज्य, जिसमें आज के महाराष्ट्र और गुजरात राज्य शामिल थे, में भी उस दौरान शराबबंदी लागू की गई थी जब मोरारजी देसाई उस राज्य में विभिन्न पदों पर रहे। पंडित द्वारिकाप्रसाद मिश्र के मुख्यमंत्री बनने के पहले मध्यप्रदेश में भी शराबबंदी थी। मिश्रजी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद शराबबंदी समाप्त कर दी। इस नीतिगत परिवर्तन के लिए केन्द्रीय नेतृत्व की अनुमति प्राप्त करना आवश्यक था। मिश्रजी के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की गई। मिश्रजी ने जैसे ही अपनी मांग पेश की तो मोरारजी भाई ने उसका विरोध किया। कार्यकारिणी में हुई बहस का विवरण मिश्रजी ने मुझे बताया था। जब मोरारजी अपनी राय पर अड़े रहे तो मिश्रजी ने उनसे कहा कि मैं आपकी पोल खोल दूंगा। मोरारजी ने कहा खोल दो, मुझे इसकी परवाह नहीं है। मिश्रजी ने कहा कि मोरारजी भाई आयुर्वेद के एक ऐेसे टानिक का सेवन करते हैं जिसमें अल्कोहल की मात्रा लगभग स्कॉच व्हीस्की के बराबर है। मिश्रजी ने कहा कि गोल्ड आर्डर के दौरान मोरारजी भाई रायपुर आए हुए थे। उस समय उनकी जान को खतरा था इसलिए उनकी सुरक्षा का विशेष प्रबंध किया गया था। इसके अंतर्गत उनके सूटकेस की चाबी रायपुर के संभागायुक्त के पास रहती थी। उस समय आरसीव्हीपी नरोन्हा रायपुर संभाग के आयुक्त थे। एक दिन उन्होंने मोरारजी भाई के सूटकेस में रखी यह दवाई पी। नरोन्हा जी ने बाद में बताया कि उन पर इस दवाई का प्रभाव लगभग वैसा ही हुआ जैसा व्हीस्की का होता है। यह विवरण सुनने के बाद मोरारजी भाई का विरोध ठंडा पड़ गया और अंतत: मिश्रजी को शराबबंदी समाप्त करने की अनुमति मिल गई। मिश्रजी का तर्क यह था कि शराबबंदी लागू करना बहुत कठिन काम है। पूरी मुस्तैदी के बावजूद शराब का सेवन जारी है।
कुछ वर्षों पहले एनटी रामाराव आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने भी शराबबंदी लागू की थी। उस दौरान आंध्रप्रदेश से लगे हुए महाराष्ट्र के हिस्से में शराब की बड़ी-बड़ी दुकानें और बार खुल गए थे। आंध्र की सीमा के करीब स्थित रेल्वे स्टेशनों पर शराब वैसे ही बिकती थी जैसे चाय बिकती है। अंतत: आंध्र में शराबबंदी समाप्त करनी पड़ी। ऐसे ही अनुभव अन्य राज्यों के हैं।
प्रधानमंत्री बनने पर मोरारजी भाई ने सभी शासकीय पार्टियों में शराब पेश करने पर रोक लगा दी। इससे अनेक आयोजनों में शराब परोसा जाना बंद हो गया जो विदेशी मेहमानों के सम्मान में आयोजित होते थे। इसका दुष्प्रभाव यह हुआ कि ऐसे आयोजनों में पारस्परिक चर्चा से जो समस्याएं और मतभेद सुलझाए जाते थे, उन पर विपरीत प्रभाव पड़ा।
वर्तमान में गुजरात ही एकमात्र राज्य है जहां वर्षों से शराबबंदी लागू है। परंतु इस शराबबंदी के कारण गुजरात में अपराधों में कई गुनी वृद्धि हुई। गुजरात में अवैध शराब बनाने के बड़े-बड़े कारखाने हैं। अवैध शराब बनाने का धंधा दिन दूना रात चौगुना फल-फूल रहा है। गुजरात में अवैध शराब बेचने वाले हिन्दुओं और मुसलमानों के गिरोह हैं जिनके बीच आए दिन विवाद होते हैं, जो अक्सर हिंसक रूप ले लेते हैं। गुजरात में मेडिकल आधार पर शराब पीने की इजाजत मिल जाती है। इस प्रावधान के कारण वहां डाक्टरों की पौ बारह है। गुजरात से लोग केवल शराब पीने के लिए राजस्थान, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र जाते हैं।
अभी तक का अनुभव बताता है कि शराबबंदी की नीति किसी भी राज्य में पूर्णत: सफल नहीं हुई है। पाकिस्तान में भी शराबबंदी है, परंतु सिर्फ मुसलमानों के लिए। मैं तीन वर्ष पहले पाकिस्तान गया था। वहां आमतौर पर यह कहा जाता है कि यदि कोई चीज सबसे आसानी से उपलब्ध है तो वह है शराब। वहां महंगी होटलों में तो शराब बिना किसी रोक-टोक के उपलब्ध रहती है।
अंत में यह कहना उचित होगा कि आवश्यकता इस बात की है कि हर प्रकार के नशीले पदार्थों के सेवन की मात्रा नियंत्रित की जाए। क्योंकि अधिक मात्रा में इनके सेवन का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है और इन पदार्थों का अवैध कारोबार विभिन्न प्रकार के माफियाओं को जन्म देता है।

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