नाबालिग मां

हमारे समाज में ऐसे लोगों को किस नजर से देखा जाता है यह बताने की जरूरत नहीं है। किसी लडक़ी के साथ बलात्कार जैसी घटना होती है तो हमारा समाज लडक़ी को दोषी मानता है, जबकि यह बड़ी सच्चाई है कि इसके लिए लडक़ी कहीं से जिम्मेदार नहीं होती। इसके लिए जिम्मेदार इस घृणित कार्य को करने वाला आदमी होता है।

sanjay sharma editor5बाराबंकी की 13 साल की रेप विक्टिम बच्ची ने एक बच्ची को जन्म दिया है। मां और बच्ची दोनों की हालत ठीक नहीं है। मां-बेटी दोनों राजधानी के एक अस्पताल में आईसीयू में हैं। 13 साल की उम्र में मां बनना कल्पना से परे है। जिस बच्ची को अभी खुद मां के लाड-प्यार और सहारे की जरूरत है वह अपना बच्चा कैसे पालेगी बड़ा सवाल है? क्या वह मां बनने की जिम्मेदारी उठा पाएगी? क्या उस बच्ची के भीतर ममता का भाव होगा? ऐसे अनेक सवाल हैं जो उस बच्ची के सामने मुंह बाए खड़े हैं। निश्चित ही उस बच्ची के आगे की राह बहुत कठिन होगी। जिसका खुद का कोई भविष्य नहीं है वह अपने बच्चे का भविष्य कैसे संवारेगी।
इस बच्ची की मां के मुताबिक बीते 17 फरवरी को गांव के ही एक व्यक्ति ने उस बच्ची के साथ रेप किया और उसे धमकी दी कि किसी को बताया तो उसके घरवालों को मार डालेगा। जुलाई में जब उसकी तबियत बिगड़ी और डॉक्टरों ने उसकी सोनोग्राफी की तो पता चला कि वह गर्भवती है। परिवार के लोगों ने पुलिस में शिकायत की और पिता ने बाराबंकी मजिस्ट्रेट कोर्ट से गर्भपात की इजाजत भी मांगी तो जिला अस्पताल भेज दिया गया। सीएमओ से मिले तो वह कोर्ट जाने को बोल दिए। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने 7 सितंबर को मेडिकल जांच कराने का आदेश दिया। जांच में डॉक्टरों की टीम ने यह कहकर मना कर दिया कि बच्चा 7 महीने का हो गया है। बच्ची की जान जा सकती है। कोर्ट-कचहरी और डॉक्टरी जांच में इतना समय लग गया कि गर्भपात का समय निकल गया। यदि समय रहते फैसला आ गया होता तो शायद आज उस बच्ची की ऐसी हालत नहीं होती। अभी तो वह अस्पताल में है लेकिन जब वह अपने गांव जाएगी तो वहां के लोगों का उसके साथ कैसा व्यवहार होगा, यह सोचने का विषय है।
हमारे समाज में ऐसे लोगों को किस नजर से देखा जाता है यह बताने की जरूरत नहीं है। किसी लडक़ी के साथ बलात्कार जैसी घटना होती है तो हमारा समाज लडक़ी को दोषी मानता है, जबकि यह बड़ी सच्चाई है कि इसके लिए लडक़ी कहीं से जिम्मेदार नहीं होती। इसके लिए जिम्मेदार इस घृणित कार्य को करने वाला आदमी होता है। यदि आदमी जिम्मेदार न होता तो कानून में सजा का प्रावधान नहीं होता। लेकिन फिर भी हमारे समाज की मानसिकता नहीं बदल रही है। रेप विक्टिम लड़कियों को ही नकारात्मक दृष्टिï से देखा जाता है। उसे ताने दिए जाते हैं। उस लडक़ी का हाथ थामने के लिए जल्दी कोई तैयार नहीं होता। उस लडक़ी के साथ-साथ उसके परिवार के लोगों का भी अपमान किया जाता है। शायद इसी कारण से बहुत सी बलात्कार की घटनाएं सामने नहीं आ पाती। हमे ऐसे लोगों के साथ खड़े होने की जरूरत है, न कि उन्हें नफरत के भाव से देखने की।

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