नाकारा हुई लखनऊ पुलिस

दो डकैतियों का अभी तक कोई सुराग नहीं लगा सकी पुलिस

Captureनेताओं और अधिकारियों की चमचागिरी कर थानाध्यक्ष बने दारोगाओं को साक्ष्य एकत्र करने का भी नहीं आता है ढंग

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लखनऊ पुलिस को यदि नकारापन की उपाधि दी जाये तो गलत नहीं होगा। लगातार डकैतियों के बाद भी पुलिस गम्भीर नहीं दिख रही है। जब फरियादियों की सुनवाई थाने पर नहीं हो रही है तो पुलिस सुरक्षा के नाम पर कितनी गश्त करती होगी यह अधिकारियों को भी पता है। लेकिन सिपाही से लेकर थानाध्यक्ष तक किसी नेता का रिश्तेदार होने के कारण अधिकारी कार्रवाई करने से पीछे रहते है। ताबड़तोड़ दो डकैतियों में पुलिस को तीन दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिला है। इन डकैतियों ने लखनऊ पुलिस को नकारा साबित करके रख दिया है।
एसएसपी राजेश कुमार पांडेय लगातार गुंडों को गिरफ्तार करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दे रहे है। लेकिन उनके आदेश की धज्जियां कोई और नहीं बल्कि उनके मातहत ही उड़ा रहे है। जानकीपुरम में हुई डकैती में इसकी सच्चाई देखने को मिली थी। एसएसपी ने स्वयं डकैती की जानकारी सेट पर दी थी। इसके बाद भी पुलिस को पहुंचने में लगभग डेढ़ घंटे लग गये। सवाल उठता है कि क्या स्थानीय पुलिस को अपने क्षेत्र के बारे में जानकारी नहीं है या फिर डकैतों से पुलिस की मिलीभगत थी।
जानकीपुरम थाना क्षेत्र के रसूलपुर में लगभग दो दर्जन की संख्या में डकैतों ने गुरुवार की देर रात सबसे पहले विजयपाल के घर में धावा बोला। डकैतों ने विजयपाल की पत्नी उनकी बेटी मानवी सहित अन्य परिजनों को बंधक बनाकर जमकर पीटने के बाद घर में मौजूद एक लाख रुपये के जेवर और पांच हजार रुपये नकद लूटकर चले गये। इसके बाद डकैत पत्रकार अनुपम पांडेय के घर पर धावा बोल दिया। अनुपम को बंधक बनाकर घर में मौजूद नकद लगभग एक लाख रुपये का कैश, लैपटॉप और चार मोबाइल लूट लिये। इसी दौरान अनुपम के घर के पास छत पर सो रहे अनिल वर्मा ने शोर मचाया तो डकैतों ने उसकी हत्या कर दी। हैरान करने वाली बात यह है कि जब डकैत दरवाजा तोड़ रहे थे तो अनुपम ने पुलिस कंट्रोल रूम को कॉल करके सूचना दी। लेकिन पुलिस तब पहुंची जब डकैत हत्या और लूट करने के बाद वहां से फरार हो गये थे। इसके दूसरे दिन काकोरी थाना क्षेत्र में उकैतों ने हत्या करने के बाद परिजनों पर कहर बरपाया था। काकोरी थानाक्षेत्र के नरौनी में धावा बोलते हुये डकैतों ने लूट का विरोध करने पर एक बुजर्ग की पिटाई कर दी फिर उसका गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद घर में मौजूद मां-बेटी को बंधक बनाकर सारा सामान लूटने लगे।
सीओ मलिहाबाद जावेद खान का कहना है की पुलिस मामले की जांच में जुटी है। मुखबिरों द्वारा मिली सूचना के आधार पर कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही हैं। लगातार दो डकैतियों के बाद भी पुलिस गम्भीर नहीं दिख रही है। हालत यह है कि जिन थाना क्षेत्रों में डकैती की वारदात हुई है उस थाना के थानाध्यक्ष डकैतों का पता लगाने में दिलचस्पी कम मामले को मैनेज करने में दिलचस्पी ले रहे है। सफदपोश के इशारे और अधिकारियों की चमचागिरी कर थाने का चार्ज पाने दारोगाओं और इंस्पेक्टरों को यह भी तक पता नहीं होता है कि घटना के बाद साक्ष्य को एकत्र किया जाता है। कुल मिलाकर नकारापन के बाद यदि किसी और शब्द से लखनऊ पुलिस को नवाजा जाये तो गलत नहीं होगा।

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