नाकारा तंत्र और बीमार होते लोग…

आजादी के इतने साल बाद भी हम यह व्यवस्था नहीं बना पाये कि गरीब आदमी को सरकारी अस्पताल में इलाज मिल जाये। अस्पतालों में डॉक्टर और दवा मिल जाये। दूर दराज के इलाकों में बुरा हाल है। दवा है तो डॉक्टर नहीं हैं।

sanjay sharma editor5कल एक काबीना मंत्री के यहां गया था। मुझे इस सरकार के सबसे अच्छे मंत्री लगते हैं वो। उनके घर पर जाओ तो कोई बंदूक वाला सुरक्षाकर्मी आपको नहीं रोकेगा। अगर मंत्री जी बैठे हैं तो आप सीधे घंटी बजा कर अंदर जा सकते हैं। कभी कभी मंत्री आपकी घंटी बजने पर खुद ही दरवाजा खोल देंगे। अच्छी बात है ऐसी सादगी होना। सुबह उनके यहाँ उनके छेत्र से आने वालों का ताँता लगा था। चाय पीते-पीते और मुझसे बाते करते-करते वो लोगों की बात सुन कर उनका काम भी करते जा रहे थे।
मैंने लोगों की समस्या देख कर उनसे सवाल किया कि आपके इलाके के लोग किस तरह की सबसे ज्यादा शिकायत करते हैं। उन्होंने कहा सबसे ज्यादा परेशानी लोगों को बीमारी और दवा न मिलने की होती है। मेरे सामने उन्होंने एक दर्जन से ज्यादा लोगों के लिए अलग अलग अस्पतालों में बात की और मरीजों को भेजा। कई डॉक्टरों से बात भी की। यह सब देख कर मन में सवाल आया कि जो लोग मंत्री तक नहीं पहुंच पाते होंगे उनका इलाज कैसे होता होगा?
आजादी के इतने साल बाद भी हम यह व्यवस्था नहीं बना पाये कि गरीब आदमी को सरकारी अस्पताल में इलाज मिल जाये। अस्पतालों में डॉक्टर और दवा मिल जाये। दूर दराज के इलाकों में बुरा हाल है। दवा है तो डॉक्टर नहीं है। अस्पतालों में जानवर बांधे जाते हैं क्योंकि दवा तो यहा मिलती नहीं। सीएमओ इन व्यवस्थों को सुधारने की जगह पैसा कमाने में लगे रहते हैं। क्या इन हालातों से लोगों को, उनके परिवारों को इलाज मिल सकेगा।
यह हाल उस वक्त है जब वल्र्ड बैंक समेत न जाने कितनी सारी स्वास्थ्य योजनाओं का पैसा भारत में लगाया जा रहा है। किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी हो या फिर क्वीन मेरी अस्पताल, बलरामपुर अस्पताल, सिविल, झलकारीबाई, रानी लक्ष्मी बाई, राम मनोहर लोहिया समेत सभी सरकारी अस्पतालों का इन्फ्रास्ट्रक्चर बेहतर बनाया गया फिर भी लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधायें नहीं मिल पा रही हैं।
यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वो लोगो को फ्री या फिर सस्ता इलाज उपलव्ध कराये। अगर ऐसा नहीं हो पाता तो लोगों का भरोसा सरकार से टूटेगा। अफसोस! बातें कितनी भी बड़ी-बड़ी हो रही हो मगर हकीकत यही है कि लोगों को वक्त पर इलाज नहीं मिल पाता। व्यवस्थाओं में सुधार होता फिलहाल नजर नहीं आ रहा।

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