नहीं दूर हो रहा राजधानी में पानी का संकट

गलत प्रबंधन से लोगों को नहीं मिल पा रहा पर्याप्त पानी
Captureपानी लीकेज समस्या बन रही बड़ी वजह

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। एक तरफ राजधानी के लोग पानी के संकट से जूझते हैं, तो दूसरी तरफ विभाग की लापरवाही और आमजन की लापरवाही के चलते पानी की समस्या दूर नहीं हो रही है। आए दिन कहीं न कहीं पाइप से पानी का लीकेज होता है तो कहीं टोटी खुली करके छोड़ दी जाती है। ऐसा नजारा अधिकांश जगहों पर देखने को मिल जाता है। सबसे ज्यादा लापरवाही सरकारी संस्थानों में देखने को मिलती है। विभागीय लोग जल्द समस्या से निजात दिलाने का आश्वासन देते हैं पर सुधार होता नहीं दिख रहा है।
राजधानी में अधिकांश जगहों पर लोगों को पानी की किल्लत से जूझना पड़ता है। कहीं गंदे पानी की सप्लाई की जाती है तो कहीं बहुत कम समय के लिए पानी की आपूर्ति की जाती है। इसका परिणाम है कि लोग अपनी जरूरत के हिसाब से पानी नहीं पाते। राजधानी के हुसैनगंज, गढ़ीकनौरा, मवैया, चौक, ऐशबाग, राजाजीपुरम, रूचि खंड के अलावा गोमतीनगर में लोगों को पानी की परेशानी से दो-चार होना पड़ता है। जबकि सच्चाई यह है कि यह समस्या विभाग के अधिकारियों के खराब प्रबंधन की वजह से होती है। 190 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन (एलपीसीडी) उत्पादन हो रहा है फिर भी पानी की किल्लत बनी हुई है। पानी की किल्लत का सबसे बड़ा कारण है लीकेज। इसके अलावा इलाकों में मौजूद छोटे नलकूप से आपूर्ति बाधित होना, लीकेज की वजह से गंदे पानी की आपूर्ति तथा इलाकों में बिछी पाइप लाइन पर घरेलू पंप बड़ी वजह है। गोमतीनगर विस्तार सेक्टर चार में पिछले 15 दिन से पाइप टूटने की वजह से पानी की बर्बादी हो रही है और इस तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। दूसरा कारण, इलाकों में आपूर्त किए जा रहे पानी में बड़ा अंतर है। कहीं मानक पूरा नहीं हो रहा तो कई इलाकों में मानक से दोगुने तक पानी की आपूर्ति हो रही है।
पानी की बर्बादी हो रही है यह विभाग के आला अफसर जानते हैं और इसे रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की भी वकालत करते हैं। अपर निदेशक डॉ. एके गुप्ता का कहना है कि जलकल का औसत उत्पादन 190 एलपीसीडी इस समय है। अगर शहरी इलाकों में जल आपूर्ति का राष्टï्रीय मानक 135 एलपीसीडी से इसकी तुलना करें तो यह काफी ज्यादा है। ऐसे में पानी की कमी से निपटने के लिए बेहतर प्रबंधन की जरूरत है। इसमें सबसे पहले लीकेज से होने वाली बर्बादी को रोकना होगा। यह बर्बादी 40 प्रतिशत तक है। जरूरी है कि पानी की बर्बादी को तुरंत प्रबंधन कर रोका जाए। एक तरफ लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाने की तैयारी चल रही है दूसरी तरफ पानी की बड़ी समस्या है। गर्मियों में पानी की समस्या विकराल रूप ले लेती है। स्मार्ट सिटी के लिए जलकल के आंकड़ों के आकलन के बाद रीजनल सेंटर फॉर अर्बन एंड एनवायरमेंटल स्टडीज (आरसीयूईएस) ने अब पानी के प्रबंधन की जरूरत बताई है। सिटी डवलपमेंट प्लान (रिवाइज्ड) की रिपोर्ट में भी यह मुद्दा उठाया गया है। इसमें कहा गया है कि हर रोज जलकल द्वारा करीब 8750 लाख लीटर पानी प्रोसेस किया जाता है। ऐसे में अगर शहर की 30 लाख की आबादी से इसका आकलन करें तो प्रति व्यक्ति आपूर्ति करीब 291 लीटर है। यह सीधे तौर पर मानक से दोगुने से भी ज्यादा है। इसके अलावा भी कई मुद्दे हैं। सीडीपी में कंसल्टेंट कंपनी ने रिपोर्ट दी कि मानक से ज्यादा पानी आपूर्ति करने के बाद भी पानी की किल्लत होना आपूर्ति व्यवस्था का खराब प्रबंधन है।
कुछ इलाकों में जहां पानी की आपूर्ति 200 एलपीसीडी से भी ज्यादा है वहीं कुछ इलाकों में यह 100 एलपीसीडी से भी कम है। 50 प्रतिशत से भी ज्यादा वार्ड ऐसे हैं जहां 1-3 घंटे ही पानी पहुंचता है। वहीं इस संबंध में मेयर दिनेश शर्मा कहते हैं कि कई वार्ड ऐसे हैं जिन्हें शहर में शामिल नहीं माना जाता। बावजूद इसके यहां पानी की सप्लाई की जाती है। यह सच है कि हमारे पास जरूरत के हिसाब से पानी है। लीकेज की समस्या पर काम किया जा रहा है, जल्द ही सुधार होगा।

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