नशे की गिरफ्त में युवा

एक तरफ सरकार नशे को प्रतिबंधित करने का काम करती है तो दूसरी ओर सिगरेट, बीड़ी, तंबाकू सहित कई ऐसे मादक पदार्थ है जिनके उत्पादन का लाइसेंस देती है। एक तरफ कंपनियों को आदेश देती है कि डिब्बों पर बीमारी से होने वाली बीमारियों के चित्र लगाएं और नुकसान के निर्देश दें। तो यहां सवाल उठता है कि जब सरकार को पता है कि यह नुकसानदेय है तो उसके उत्पादन की जरूरत क्या है?

sanjay sharma editor5भारत युवाओं का देश कहा जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने भाषणों में अक्सर यह कहते हैं कि भारत का भविष्य युवा तय करते हैं। यह सच है कि देश के विकास में युवाओं की महती भूमिका है। युवा देश को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं, लेकिन जब चर्चा होती है कि भारत का युवा नशे की चपेट में है तो इससे देश की छवि प्रभावित होती है। इस समय हमारा मुल्क दुनिया में नशाखोरी के मामले में दूसरे स्थान पर है। देश और समाज के लिए यह चिंताजनक स्थिति है। इस समय भारत में 10.80 करोड़ युवा आबादी धूम्रपान की गिरफ्त में है। आकंड़ों की मानें तो देश में प्रतिवर्ष धूम्रपान की वजह से दस लाख लोगों की मौत होती है। यह आंकड़ा देश में होने वाली कुल मौतों का दस फीसद है। छोटे-छोटे बच्चे नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। देश में नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है तो उसके पीछे सरकार की दोहरी नीति है।
एक तरफ सरकार नशे को प्रतिबंधित करने का काम करती है तो दूसरी ओर सिगरेट, बीड़ी, तंबाकू सहित कई ऐसे मादक पदार्थ हैं जिनके उत्पादन का लाइसेंस देती है। दूसरी तरफ कंपनियों को आदेश देती है कि डिब्बों पर बीमारी से होने वाली बीमारियों के चित्र लगाएं और नुकसान के निर्देश दें। तो यहां सवाल उठता है कि जब सरकार को पता है कि यह नुकसानदेय है तो उसके उत्पादन की जरूरत क्या है? भारत में सत्रह साल पहले धूम्रपान करने वाले पुरुषों की संख्या 7.9 करोड़ थी। इसमें 2.9 करोड़ का इजाफा हुआ है। शोध के अनुसार भारत में पिछले डेढ़ दशक में सिगरेट पीने वालों की तादाद काफी बढ़ी है। 15 से 29 वर्ष तक की आयु वर्ग के लोगों में धूम्रपान की लत में जबदस्त वृद्धि हुई है। सिगरेट पीने के मामले में आज भारत पूरी दुनिया में दूसरे स्थान पर है। अभी तक वह सिर्फ चीन से पीछे है। जिस रफ्तार से भारतीय युवाओं में सिगरेट पीने का चलन बढ़ रहा है, अगर यही गति बनी रही तो जल्द ही वह चीन को भी पीछे छोड़ देगा। हाल ही में टोरंटो विश्वविद्यालय में हुए एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि भारत में अठारह साल की उम्र में धूम्रपान करने वाले पुरुषों की संख्या में छत्तीस फीसद का इजाफा हुआ है। नशे को हमेशा से विनाशकारी चीजों में शुमार किया जाता रहा है। चीन जैसा ताकतवर देश एक जमाने में अफीमचियों का देश कहा जाने लगा था। उससे उबरने में उसे दशकों लगे। आज भी कई देश हैं जो अपने शत्रु-देशों से निपटने के लिए वहां के नागरिकों में नशे की लत डालने की कोशिश करते रहते हैं। देश में युवाओं में बढ़ते नशे के प्रचलन के प्रति सरकार को सजग होने की जरूरत है, नहीं तो वह दिन दूर नहीं कि जब भारत अपने विकास की वजह से नहीं बल्कि दूसरी वजहों से जाना जाएगा।

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