नववर्ष का जश्न आतंक और दुनिया

आतंकी जिस तरह विभिन्न देशों के नागरिकों को अपना निशाना बना रहे हैं उससे साफ है कि आतंकवाद की समस्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। रोज नए-नए आतंकी संगठन खड़े हो रहे हैं। उनके बीच गठबंधन हो रहा है। आईएसआईएस जैसा खूंखार आतंकी संगठन इन सबका अगुआ बना हुआ है। जहां तक एशिया का सवाल है, यहां के कई देश दशकों से आतंकवाद के शिकार हैं। एशिया में भारत सबसे ज्यादा आतंकियों के निशाने पर रहता है। इसकी एक बड़ी वजह पाकिस्तान है।

sajnaysharmaतुर्की के इस्तांबुल स्थित एक नाइट क्लब में नववर्ष का जश्न मना रहे लोगों पर आतंकियों ने ताबड़तोड़ गोलीबारी की। इसमें कम से कम 39 लोगों की मौत हो गई और चालीस से अधिक लोग घायल हो गए। ये आतंकवादी सैंटा क्लॉज की ड्रेस पहनकर पार्टी में शरीक हुए थे। हमले के दौरान आतंकी सीरिया का बदला लेने की बात कह रहे थे। सवाल यह है कि इस आतंकी हमले का निहितार्थ क्या है? क्या केवल खून खराबा करना और दहशत फैलाना इनका मकसद था? सवाल यह है कि क्या ये हमला दुनिया के लिए खतरे की घंटी नहीं है? क्या ताजा हमला दुनिया के अमन पसंद देशों को यह सोचने पर बाध्य नहीं करता कि आखिर इन मानवता के दुश्मनों का सफाया कैसे किया जाए? आज पूरे विश्व में आतंकवादी हमले हो रहे हैं। तमाम देश इसके शिकार हो रहे हैं। जहां तक तुर्की का सवाल है यहां इसके पहले भी आतंकी हमले हो चुके हैं और वहां की सरकार इनसे निपटने की लगातार कोशिश कर रही है। फिलहाल आतंकी जिस तरह विभिन्न देशों के नागरिकों को अपना निशाना बना रहे हैं उससे साफ है कि आतंकवाद की समस्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। रोज नए-नए आतंकी संगठन खड़े हो रहे हैं। उनके बीच गठबंधन हो रहा है। आईएसआईएस जैसा खूंखार आतंकी संगठन इन सबका अगुआ बना हुआ है। जहां तक एशिया का सवाल है, यहां के कई देश दशकों से आतंकवाद के शिकार हैं। एशिया में भारत सबसे ज्यादा आतंकियों के निशाने पर रहता है। इसकी एक बड़ी वजह पाकिस्तान है। दुनिया के सामने यह बात साफ हो चुकी है कि भारत में आतंकियों की फौज भेजने का काम पाकिस्तान लगातार कर रहा है। वह यहां अस्थिरता पैदा करना चाहता है। आतंकवादी घटनाओं में अब तक भारत में सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं, लेकिन आज जिस तरह आतंकवाद को लेकर विश्व के तमाम देश अपने निजी हितों की पूर्ति को लेकर दो फाड़ में बंट गए हैं, वह खतरनाक है। मसलन चीन पाकिस्तान के आतंकवादियों को शह देता रहता है तो पाकिस्तान भी इस बात से लगातार इंकार करता रहता है कि वह आतंकवादियों को संरक्षण नहीं दे रहा है। यह स्थिति तब है जब पाकिस्तान में रोज आतंकी घटनाएं घट रही हैं और निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं। कुल मिलाकर यदि हमें तुर्की जैसे आतंकी हमलों को रोकना है तो आतंकवाद के मुद्दे पर पूरी दुनिया को अपने निहित स्वार्थों को छोडक़र एक होना होगा और इसके सफाए के लिए एक सामूहिक रणनीति पर काम करना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो जो देश आज इन आतंकियों को पाल पोस रहे हैं ये उन्हीं देशों के लिए भस्मासुर बन जाएंगे।

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