नये विभाग खोलकर अपनी पीठ थपथपाने में जुटा केजीएमयू

  • केजीएमयू प्रशासन ने कहा आने वाले वक्त में दिखेगा विभाग का काम
  • महज शोपीस बनकर के न रह जाएं केजीएमयू के नए विभाग
  • विश्वविद्यालय प्रशासन अक्सर रोता है वित्तिय संकट का रोना

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में बजट की कमी के बावजूद आए दिन नए विभाग खोले जा रहे हैं। नए विभाग खुलने से प्रशासनिक पदों की बाढ़ सी आ गई है। जानकारों की माने तो नये विभाग के लिए बजट की भी जरूरत है। एक तरफ असाध्य रोगियों और बीपीएल कार्ड धारकों के इलाज में वित्तीय संकट बाधा बन रहा है तो दूसरी तरफ आए दिन केजीएमयू में नए विभाग खुल रहे हैं। ऐसे में ये नए विभाग मरीजों को कितना फायदा पहुंचाएगा यह समय ही बता सकेगा।
केजीएमयू ने रायबरेली रोड के ट्रामा- टू के संचालन का जिम्मा अपने हाथ में तो ले लिया, लेकिन बजट की कमी के कारण मरीजों के इलाज के लिए यह सिर्फ रेफरल सेन्टर बनकर रह गया है। इसी तरह से आए दिन खुल रहे नए विभाग सिर्फ दिखावा न बनकर रह जाएं। सूत्रों की माने तो केजीएमयू प्रशासन यह सिर्फ अपनी पीठ थपथपाने के लिए कर रहा है। मामले को लेकर केजीएमयू प्रशासन का दवा है कि वर्तमान समय में यहां पर हो रहे काम मरीजों के इलाज में मील का पत्थर साबित होंगे।
विभागों को संस्थान बनाने की कोशिश
केजीएमयू के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ वेद प्रकाश का कहना है कि विभागों में नए विभाग बनाने से मरीजों का इलाज बेहतर हो सकेगा। नए विभाग बनने से एक ही व्यक्ति पर पडऩे वाला काम का दबाव कम होगा। इससे बीमारियों पर शोध हो सकेगा औप मरीजों को उच्चस्तरीय इलाज मिल पायेगा। उन्होंने कहा कि हम विभागों को संस्थान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जिस प्रकार बुजुर्गो के लिए पहले यहां एक विभाग था। लेकिन जिरियाटिक मेडिसिन विभाग के शुरू होते ही बुजुर्गो को बेहतर व उच्चस्तरीय इलाज आसानी से मिल पायेगा। बुजुर्गो में न्यूरोलॉजिकल, गैस्ट्रो, डायबिटीज, कार्डियक सहित काफी ऐसी बीमारियां है, जिनके लक्षण कुछ अलग ही दिखाई पड़ते हैं। जिसकी समय रहते पहचान नहीं हो पाती है। बाद में यही परेशानी का सबब बनते हैं। इनके लिए अलग ओपीडी, इंडोर की भी व्यवस्था होगी। इसके साथ बुजुर्गो की बीमारियों के लिए अलग विशेषज्ञ होने चाहिए। जिसकी जरूरत इस विभाग के खुल जाने से पूरी हो जायेगी। उन्होंने कहा कि सरकार बुजुर्गो के बीमारियों के इलाज के प्रति गंभीर है। इसके लिए विश्वविद्यालय के जिरियाटिक मेडिसिन विभाग में शोध शुरू हो जा रहा है। इस प्रकार बच्चों से लेकर बड़ों तक के इलाज में गुणवत्ता लाने के लिए विभागों को निर्माण किया जा रहा है। हमारे पास सभी प्रकार की बुनियादी सुविधाएं हैं। हमें सिर्फ काम बांट देना है। इससे व्यवस्था अपने आप दुरुस्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि पहले मेडिसिन के तहत ही कार्डियक विभाग भी था, लेकिन अब वह अलग विभाग है। इसके विशेषज्ञ अलग होते हैं। इसी तरह बच्चों के इलाज के लिए भी उच्चस्तरीय विभाग बनाये गये। यहां बच्चों के कई बीमारियों के लिए अलग से विशेषज्ञ हैं।
आने वाले वक्त में जिलों में भी मिलेंगे विशेषज्ञ
डॉ. वेद प्रकाश का कहना है कि इस समय हम जिस प्रकार से काम कर रहे हैं। इससे आने वाले समय में मरीजों को इलाज के लिए विशेषज्ञों की कमी नहीं होगी। आज केजीएमयू में दूर-दूर से मरीज इलाज के लिए आते हैं क्योंकि वहां उनका इलाज करने के लिए कोई विशेषज्ञ नहीं मिल पाता है। आने वाले सालों में प्रदेश के दूर-दराज के क्षेत्रों में चिकित्सीय विशेषज्ञ मिलेंगे। लोगों को अपने घर के पास ही उच्चस्तरीय इलाज मिल पाना संभव होगा। मरीजों को इलाज के लिए चक्कर नहीं काटने होंगे।

Pin It