नयी उम्मीदों का बजट

बजट में तमाम क्षेत्रों के साथ सरकार का मुख्य जोर कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य पर ही रहा। इसके लिए सपा सरकार कटिबद्ध भी दिखाई देती है। चुनावी साल होने की वजह से सरकार की यह जवाबदेही का भी साल है। ऐसे में नई चुनौतियों के लिए सरकार तैयार दिखती है।

प्रदेश की सपा सरकार ने अपने चुनावी साल का बजट पेश कर दिया। बजट पेश करते समय मुख्यमंत्री ने संकल्प भी लिया। इन पक्तियों से अपने दिल का उद्गार भी जताया- जनता के लिए जिसके मन में प्यार नहीं है, जनतंत्र में वह कुर्सी का हकदार नहीं है। मुख्यमंत्री की यह पंक्तियां जनता के उनके प्रति प्रेम को दिखाती हैं। मुख्यमंत्री का यह बजट करीब 3.46 लाख करोड़ का बजट है। जो अब तक का सबसे बड़ा बजट हैsanjay sharma editor5
बजट में कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य पर मुख्यमंत्री ने जोर दिया है। जाहिर है किसानों की दशा बेहतर नहीं है। इनकी हालत में सुधार होना चाहिए। इसके लिए बजट में ओलावृष्टि से पीडि़त किसानों के लिए 4498 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गयी है। इतना ही नहीं किसानों के लिए फसल बीमा सहित सूखाराहत के लिए बजट दिया गया है। इलाहाबाद और लखनऊ विश्वविद्यालय के लिए भी बजट में राशि निर्धारित की गयी है। चिकित्सा के लिए भी बजट राशि का एक बड़ा भाग दिया है।
जाहिर है इससे किसानों की बेहतरी के साथ स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार आयेगा। बलिया में नया विश्वविद्यालय खोलने की बात भी बजट में रखी गयी है। जिससे पूर्वांचल के इस इलाके में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार आने की उम्मीदें हैं। बजट में एमबीबीएस की सीटों का एलान किया गया। जिससे शिक्षा और स्वास्थ्य में अहम बदलाव आयेगा।
चुनावी साल का बजट होने के नाते सरकार का यह बड़ी जिम्मेदारियों का बजट था। साथ ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का यह अब तक का सबसे बड़ा बजट है। सरकार ने गोमती नदी को भी प्राथमिकता पर रखा। इसके लिए बाकायदा 250 करोड़ रुपये की राशि दी गयी है। इसके साथ सरयू नहर परियोजना पर भी एक बड़ी राशि खर्च की जाएगी। इन योजनाओं के साथ सरकार समाजवादी पेंशन योजना को विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई देती है। जिससे करीब 55 लाख लोगों को फायदा पहुंचेगा। पावरलूम क्षेत्र के लिए भी सरकार ने खजाना खोला है। मेधावी छात्रों के लैपटॉप के लिए भी सरकार ने बजट रखा है। इन तमाम क्षेत्रों के साथ सरकार का मुख्य जोर कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य पर ही रहा। इसके लिए सपा सरकार कटिबद्ध भी दिखाई देती है। चुनावी साल होने की वजह से सरकार की यह जवाबदेही का भी साल है। ऐसे में नई चुनौतियों के लिए सरकार तैयार दिखती है।

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