नगर निगम में बंद सीसीटीवी कैमरों से हो रही निगरानी

  • चोरी की गाडिय़ां छुपाने का अड्डा बन गई हैं नगर निगम की पार्किंग
  • कार्यालय के सामने पार्किंग में लावारिस गाडिय़ां खड़ी करवाकर जेबें भरने में जुटे कर्मचारी

 अंकुश जायसवाल
captureलखनऊ। नगर निगम की पार्किंग लावारिस गाडिय़ों को खड़ी करने व चोरी के वाहनों को छुपाने का अड्डा बनती जा रही हैं। शहर की अधिकांश पार्किंगों में खड़े दर्जनों वाहनों का कोई मालिक नहीं है। इनमें बहुत सी गाडिय़ां चोरी की हैं, जिन्हें पुलिस से बचने और सही समय और सही दाम मिलने पर बेचने की उम्मीद में निगम की पार्किंग में छुपा दिया गया है। ऐसी गाडिय़ों को पार्किंग में अवैध रूप से खड़ा करवाने का काम निगम की पार्किंग में तैनात कर्मचारी ही करते हैं, जो कि पार्किंग में गाडिय़ां खड़ा करने के बदले मिलने वाली मुंहमांगी रकम और शराब की लालच में ऐसा करते हैं। इसी वजह से पार्किंग में लगे सीसीटीवी कैमरे खराब होने के बाद भी बनवाने की कोशिश नहीं की गई। नतीजतन खुलेआम पार्किंग में लावारिस वाहन खड़े करवाने और उनके नाम पर अवैध वसूली का खेल चल रहा है।
देश भर में हाईअलर्ट घोषित है। आतंकवादी प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी किसी बड़ी वारदात या आतंकी घटना को अंजाम दे सकते हैं। इस बात की चेतावनी इंटेलीजेंस एजेंसियों की तरफ से दी जा चुकी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ऐशबाग रामलीला में सम्मिलित होने लखनऊ आने वाले हैं। आतंकवादी उनको निशाना बनाने की कोशिश भी कर सकते हैं। ऐसे में शहर की सुरक्षा व्यवस्था में जरा सी चूक बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। इस बात से सभी वाकिफ हैं लेकिन नगर निगम के अधिकारियों को आतंकवादी घटनाओं और जनता की सुरक्षा व्यवस्था की बिल्कुल भी परवाह नहीं है। नगर निगम की अधिकांश पार्किंग में लावारिस गाडिय़ां खड़ी हैं। इन पार्किंग में आने-जाने वाले लोगों की पहचान करने और चोरी की गाडिय़ों व संदिग्ध गाडिय़ों का रिकार्ड सुरक्षित रखने के लिए लगा सीसीटीवी कैमरा खराब पड़ा है। यहां तक की नगर निगम कार्यालय के बाहर पार्किंग में लगा सीसीटीवी कैमरा भी खराब है। इन कैमरों को सही नहीं करवाया जा रहा है। इस बार में नगर निगम के अधिकारियों को जानकारी भी नहीं दी गई है।
बताते चलें कि नगर निगम के अधिकारियों के सुस्त रवैये के चलते लालबाग स्थित झण्डे वाली भूमिगत पार्किंग में सीसीटीवी व्यवस्था सालों से चौपट पड़ी है। पार्किंग में लाखों रुपये की लागत से लगवायी गयी एलईडी खराब हो चुकी है जबकि रोजाना हजारों गाडिय़ों का आना-जाना लगा रहता है। इसके बावजूद बिना मासिक पास के पार्किंग में आने वाली गाडिय़ों की पहचान करने और पास वाली गाडिय़ों के आने-जाने से संबंधित डाटा सुरक्षित रखने का काम बिल्कुल बंद है। पार्किंग में लगे 16 सीसीटीवी कैमरे शो-पीस बनकर रह गये हैं। पार्किंग के प्रवेश द्वार, निकासी द्वार और अन्य सभी फ्लोर पर दर्जनों लावारिस गाडिय़ां अवैध रूप से खड़ी हैं।

70 से 80 लावारिस गाडिय़ां पार्किंग में खड़ी

नगर निगम की झण्डेवाला पार्क, दयानिधान व अन्य भूमिगत पार्किंगों में वर्षों से लावारिस वाहनों को खड़ा करने का सिलसिला जारी है। पार्किंग में लावारिस वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। सूत्रों के अनुसार विभाग की तीनों पार्किंगों में लगभग 70 से 80 दो व चार पहिया वाहन लावारिस खड़े हैं। इन गाडिय़ों के मालिको का पता नहीं है। विभाग के अधिकारियों ने पार्किंग में खड़े लावारिस वाहन स्वामियों का पता लगाने के लिए पुलिस से लेकर आरटीओ तक को पत्र भेजकर जानकारी मांगी, लेकिन दोनों ही विभागों की तरफ से कोई जानकारी नहीं मिली। ऐसे में सीसीटीवी व्यवस्था खराब होने के कारण नगर निगम खुद ही सवालों के घेरे में खड़ा है।
अधिकारी झाड़ रहे पल्ला
निगम की पार्किंग में ध्वस्त पड़ी सीसीटीवी व्यवस्था के बारे में जब नगर निगम के व्यवस्था अधिकारी के पद पर तैनात नगर अभियंता मलयधर से बात की गई, तो उन्होंने इसकी जानकारी नहीं होने की बात कहते हुए अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया। इससे साफ जाहिर होता है कि जिनके भरोसे नगर निगम की पार्किंग और अन्य सुरक्षा व्यवस्था है, वही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं है, तो बाकियों पर दोष लगाने से क्या फायदा।

शाम होते ही लड़ते हैं जाम

नगर निगम की भूमिगत पार्किंग में सीसीटीवी व्यवस्था खराब होने से वहां तैनात कर्मचारी बेलगाम हो चुके हैं। पार्किंग में शाम होते ही मयखाने की महफिल जमने लगती है। जो रात के करीब 10 बजे तक चलती है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था का किसी को होश भी नहीं रहता है। वहीं नगर निगम के अधिकारी इन सब क्रिया कलापों से अनजान हैं। ऐसे में गाडिय़ों और लोगों की सुरक्षा व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है।

बिगाड़ा गया कैमरा

विभागीय सूत्रों की मानें तो नगर निगम की पार्किंग में तैनात कर्मचारियों ने जानबूझ कर सीसीटीवी व्यवस्था को चौपट किया है। इसी वजह से सालों से खराब पड़े सीसीटीवी कैमरों के बारे में अधिकारियों को सूचित नहीं किया गया। इसके पीछे मुख्य कारण कर्मचारियों द्वारा वाहनों से अवैध वसूली को माना जा रहा है। कर्मचारी अपने निजी स्वार्थ के कारण पार्किंग में वाहनों को खड़ा करवाकर लोगों से वसूली करते हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी

मामला मेरे संज्ञान में नहीं है, यदि सीसीटीवी कैमरे बन्द हैं, तो सम्बन्धित अधिकारियों से बातचीत करके चालू कराये जायेंगे।
नन्दलाल, अपर नगर आयुक्त
नगर निगम

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