नगर निगम के लिए चुनौती बन रहे पटरी दुकानदार

सडक़ों के किनारे से दुकानें हटाये जाने का विरोध कर रहे पटरी व्यवसायी
दुकानें लगाने का वैकल्पिक स्थान मिलने तक दुकानें लगाते रहने की मांग पर अड़े

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। शहरी क्षेत्र की सडक़ों को अतिक्रमण मुक्त करवाने की कोशिश में लगे पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के लिए पटरी व्यवसायी चुनौती बनते जा रहे हैं। सडक़ों के किनारे से दुकाने हटाये जाने के विरोध में पटरी व्यवसायी आये दिन नगर निगम कार्यालय और जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना प्रदर्शन करते हैं। इसके बाद सडक़ों के किनारे से अतिक्रमण हटवाने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी जाती है लेकिन पटरी व्यवसायियों को अन्यत्र शिफ्ट करने का कोई ठोक प्रबंध नहीं हो पा रहा है, जिसकी वजह से बार-बार पटरी व्यवसायी धरना प्रदर्शन करते रहते हैं। इस कारण आये दिन आम जनता को भी काफी नुसकान उठाना पड़ता है।
लखनऊ फुटपाथ व्यापार संघ शहर में पथ विक्रेता अधिनियम की धारा-3, 20, 21, 22 और 25 लागू करवाने की मांग पर अड़ा है। समिति के अध्यक्ष गोकुल प्रसाद 9 सितंबर 2013 को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार समस्त नगर निगम परिक्षेत्र में पथ विक्रेता अधिनियम लागू करवाने का दबाव बना रहे हैं। लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाने का सपना देखने वाले अधिकारियों को पटरी व्यवसायियों के लिए नगर निगम परिक्षेत्र में वेडिंग जोन बनाने और वेंडिंग जोन न बन पाने की स्थिति में पीली पट्टी खींच कर रोजगार करने की अनुमति देने की बात कही है। इसके अलावा नगर निगम परिक्षेत्र में सडक़ के किनारे दुकानें लगाने वाले करीब एक लाख पटरी व्यवसायियों का पंजीकरण करवाने और उसका मासिक या सालाना शुल्क लेने की मांग कर रहे हैं। इन पटरी व्यवसायियों का आरोप है कि नगर निगम और पुलिस विभाग के अधिकारी सडक़ के किनारे दुकानें लगाने वाले गरीब दुकानदारों से रोजाना 50-100 रुपये प्रति दुकान की अवैध कमाई करते हैं। इसका लेखा-जोखा भी नहीं होता है। इसी वजह से एक बार अतिक्रमण हटवाने के बाद दोबारा नगर निगम और पुलिस विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से सडक़ों के किनारे दुकानें लग जाती हैं। यदि नगर निगम में नियमानुसार दुकानों का पंजीकरण करवाने की व्यवस्था कर ली जाये और सडक़ों के किनारे वेंडिंग जोन बनाकर दुकानें लगाने की अनुमति दी जाये, तो नगर निगम को लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त होगा।
अतिक्रमण हटवाने की कवायद फेल
शहरी क्षेत्र में सडक़ों के किनारे से पटरी दुकानदारों को हटवाने और सडक़ों को अतिक्रमण मुक्त करवाने की नगर निगम के अधिकारियों की कवायद फेल साबित हो रही है। चारबाग, आलमबाग, चन्दरनगर, कैसरबाग, लालबाग, अमीनाबाद, हजरतगंज, नरही, निशातगंज, महानगर, गोल मार्केट, भूतनाथ मार्केट, मुंशीपुलिया, अलीगंज, कपूरथला, नाका, नाजा मार्केट, नावेल्टी चौराहा, पालीटेक्निक चौराहा और इंजीनियरिंग कालेज क्षेत्र में सडक़ों के किनारे से अतिक्रमण हटवाने की कवायद फेल साबित हो रही है। नगर निगम के अधिकारी जिस दिन लाव लश्कर के साथ अतिक्रमण हटवाकर लौटते हैं, उसी दिन शाम को दोबारा सडक़ों के किनारे दुकानें सज जाती हैं। अमीनाबाद में तो सडक़ों के किनारे नगर निगम और प्रशासन के अधिकारियों ने पीली पट्टी भी खिचवा दी लेकिन पटरी दुकानदार पीली पट्टी को अनदेखा करके धड़ल्ले से दुकानें लगा रहे हैं। सडक़ों पर दोबारा अतिक्रमण करने वाले दुकानदारों से नगर निगम के कर्मचारी और पुलिस विभाग के लोग अवैध वसूली शुरू कर देते हैं। इसी वजह से नगर निगम के अधिकारियों को दोबारा अतिक्रमण हटवाने की कार्रवाई करनी पड़ती है। इस कार्रवाई में नगर निगम के अधिकारियों का समय तो बर्बाद होता ही है, पटरी दुकानदारों को हटवाने में काफी धन भी खर्च होता है।

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