नकल रोकने में नाकाम एलयू

बीएड परीक्षा में एलयू में नकलचियों का आकड़ा 50 के पार

4Captureपीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में बीएड की परीक्षा में पहले दिन से ही कई छात्र-छात्राएं नकल करते हुए पकड़े गए। विवि प्रशासन द्वारा परीक्षा में नकल रोकने के बड़े-बड़े दावों के बावजूद बीएड की परीक्षा में आए दिन नकलची पकड़े जा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जिन कॉलेजों के परीक्षार्थी यहां परीक्षा दे रहे हैं उन्हीं कॉलेजों के शिक्षक कक्ष निरीक्षक नियुक्त किए गए हैं।
विश्वविद्यालय में चल रही बीएड की परीक्षाओं में नकल रोकने के विवि प्रशासन के सारे दावों बेकार हो चुके हैं। पहले दिन की परीक्षा में तीन छात्राएं पकड़ी गईं। इसके बाद भी विवि प्रशासन ने कड़ाई बरतने के बजाय यह भी जानना जरूरी नहीं समझा कि चूक कहां हो रही है। प्रत्येक पेपर में ऐसे छात्रों का मिलना तो आम बात हो गई है जिनके हाथ पर और चिट पर कुछ न कुछ लिखा न हो। विवि के जिम्मेदारों ने इसे इसे मामूली समझकर छात्रों को बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया है। इसका नतीजा यह हुआ के शुक्रवार को बीएड के पेपर में एक साथ सात छात्रों को पकड़ा गया था लेकिन जिनमें से केवल पांच के खिलाफ ही शिकायत दर्ज की गई। इसकी सबसे बड़ी वजह तो यह है कि अधिकतर कक्षाओं में ऐसे शिक्षकों की ड्यूटी लगी थी जो उसी कॉलेज के थे। जिस कॉलेज के परीक्षार्थी पेपर दे रहे थे। अधिकांश परीक्षार्थियों ने बताया कि कालेज में प्रवेश के समय शिक्षक बोलते हैं परेशान होने की जरूरत नहीं है। परीक्षा में मदद की जाएगी।
शिक्षक ने पहले ही घर वालों को दी जानकारी
भाल चंद्रा कॉलेज से बीएड का पेपर देने वाली लडक़ी का नाम सुनीता कुमारी था जबकि प्रवेश पत्र पर छात्रा का नाम विनीता कुमारी लिखा था। पूछताछ करने पर छात्रा ने बताया कि वह उसकी बहन का नाम है। वह अपनी बहन की जगह परीक्षा दे रही थी। विवि के फ्लाइंग स्कार्ट ने इसके विषय में छात्र के घर पर फोन किया तो उससे पहले ही इसकी पूरी जानकारी उसके पति के पास मौजूद थी। जिसे कक्ष निरीक्षक ने पहले से ही उसके पति को फोन करके दे दी थी, जिसकी जानकारी भी फ्लाइंग स्कार्ट मौके पर ही मिली।

नहीं रुक रही परीक्षा कक्ष में अनियमितता

परीक्षा के पहले दिन से लेकर अब तक लगभग 50 नकलची पकड़े गये हैं। यह संख्या बढ़ती ही जा रही है। हर पेपर में नकलची तो कई पकड़े जाते हैं लेकिन शिकायत तो कुछ ही के खिलाफ दर्ज होती है। इसकी सबसे बड़ी वजह विवि में परीक्षा कक्ष में अनियमितता। इस संबंध में बात करने के लिए जब प्रॉक्टर को फोन किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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