नए साल पर अपराधियों ने पुलिस को दी चुनौती

तीन दिन के भीतर ताबड़तोड़ वारदातों को दिया अंजाम

डकैती और दिनदहाड़े लूट से राजधानी में दहशत
पुलिस को अभी तक नहीं मिले बदमाशों के सुराग

captureआमिर अब्बास
लखनऊ। नए साल में बदमाशों ने राजधानी की हाईटेक पुलिस को एक बार फिर चुनौती दी है। तीन दिन के भीतर बेखौफ अपराधियों ने कई संगीन अपराधों को अंजाम दिया। दिनदाहड़े सर्राफा कारोबारी के यहां लूटपाट की और लाखों का जेवर लेकर फरार हो गए। एक किसान के घर लूटपाट की। वहीं डकैतों ने मलिहाबाद में एक परिवार को बंधक बनाकर लाखों के जेवर और नगदी लूट लिए। सभी मामलों में पुलिस को बदमाशों का सुराग नहीं मिल सका है। इन वारदातों से साफ है कि अपराधियों के भीतर कानून-व्यवस्था का कोई खौफ नहीं है। वहीं पुलिस इन अपराधियों के सामने पूरी तरह बेबस नजर आ रही है।
राजधानी में अपराधों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। पुलिस इन पर शिकंजा कसने में पूरी तरह विफल रही है। हैरत यह कि अपराधी अपराध कर गायब हो जाते हंै और पुलिस को उनकी भनक तक नहीं मिल पाती है। अपराधियों ने तीन दिन के भीतर ताबड़तोड़ वारदातों को अंजाम दिया है। इसमें लूट से लेकर डकैती तक की वारदातें शामिल हैं। इन वारदातों ने पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। अपराधियों के बढ़ते हौसलों से राजधानीवासी दहशत में हैं। ताजा मामले में अलीगंज थाना क्षेत्र में बेखौफ बदमाशों ने एक ज्वैलरी शॉप को निशाना बनाया। तिरुपति ज्वैलर्स के संचालक निखिल अग्रवाल ने मंगलवार को जैसे ही दुकान खोली, तीन बदमाश आए। बदमाशों ने हथियार के बल पर ८ सोने के हार लूट लिए। इसका कुल वजन करीब २५० ग्राम था। इसकी कीमत लाखों में है। फिलहाल पुलिस बदमाशों की तलाश कर रही है। इसके दो दिन पहले यानी रविवार की रात माल थाना क्षेत्र स्थित नबीपनाह निवासी मोहम्मद हनीफ पुत्र हमीद के घर डकैतों ने धावा बोल दिया। पांच बदमाश घर में घुसे और असलहों के बल पर पूरे परिवार को बंधक बना लिया। बदमाशों ने घर में रखे ५० हजार रुपये व करीब ३.५ लाख जेवर लूट ले गए। विरोध करने पर बदमाशों ने जान से मारने की धमकी दी। ये जेवर हनीफ ने अपनी बेटी की शादी के लिए बनवाए थे। इसके अलावा मलिहाबाद थाना क्षेत्र स्थित हिम्मतखेड़ा मजरा निवासी संजू रावत के घर पर बदमाशों ने धावा बोला। बदमाशों ने रावत को बंधक बना लिया और घर में रखी नगदी व जेवर लेकर फरार हो गए। ये घटनाएं राजधानी में लगातार बढ़ रहे अपराधों की बानगी भर है। इन सभी मामलों में पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। मौके का मुआयना भी कर आई है। सीसीटीवी भी खंगाल रही है। खानापूर्ति के लिए पुलिस ने एक दो लोगों से पूछताछ भी की। लेकिन तमाम कवायदों के बावजूद पुलिस के हाथ एक भी पुख्ता सबूत नहीं लगे हैं। हकीकत यह है कि ऐसी वारदातों पर पुलिस एक-दो दिन तो सक्रिय दिखती है लेकिन इसके बाद वह सुस्त पड़ जाती है। बदमाशों तक पहुंचने के लिए पुलिस के पास अधिकांश बार कोई रणनीति नहीं होती है। वह अंधेरे में तीर चलाती है। यह दीगर है कि कई बार बदमाश पुलिस के हत्थे चढ़ जाते हैं। ऐसा भी तभी हो पाता है जब पुलिस को इसकी सूचना कोई दे दे। कई बार तो सूचना देने के बाद भी पुलिस सक्रियता नहीं दिखाती है। यह स्थिति तब है जब प्रदेश सरकार ने राजधानी पुलिस को हर तरीके से हाईटेक कर रखा है। उन्हें तमाम तरह की सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। हैरत यह भी है कि लगातार पेट्रोलिंग के बावजूद अपराधी वारदातों को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं और पुलिस हाथ ही मलती रह जाती है।

कमजोर है खुफिया नेटवर्क
राजधानी में बढ़ रही वारदातों के पीछे कहीं न कहीं पुलिस का कमजोर खुफिया तंत्र भी जिम्मेदार है। स्थानीय ख्ुाफिया तंत्र और मुखबिर का जैसा जाल पुलिस के पास होना चाहिए वैसा नहीं है। कई बार खुफिया तंत्र के पास वारदात की जानकारी तक नहीं होती है। यही वजह है कि अपराधी अपना काम करके आसानी से फरार हो जाते हैं। खुफिया तंत्र की विफलता के कारण भी कई बार अपराधी हाथ से निकल जाते हैं और पुलिस हाथ मलती रह जाती है।

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