धोखा देने वाला ही बना भाजयुमो का प्रदेश महामंत्री

धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज, पुलिस नहीं कर रही गिरफ्तार

गणेश जी वर्मा
Captureलखनऊ। अपने दामन को पाक साफ बताने वाली भाजपा पार्टी की हकीकत यह है कि भाजपा कार्यकर्ता के साथ धोखाधड़ी करने वाले जालसाज को ही भाजयुमो का प्रदेश महामंत्री बना दिया गया। इतना ही नहीं कैसरबाग में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस उस पदाधिकारी को इसलिये नहीं गिरफ्तार कर पा रही है कि उसकी पकड़ भाजपा के दिग्गज नेताओं से है। फिलहाल आरोपी प्रतिदिन लखनऊ पुलिस को चुनौती देते हुए शहर के कई थानों से गुजर रहा है लेकिन पुलिस उसके गिरेबान के ऊपर हाथ तक नहीं डाल पा रही है

लालकुआं निवासी व भाजपा कार्यकर्ता विनोद कुमार तिवारी ने सुंदरबाग कोतवाली कैसरबाग में बिल्डर अफताब, आतिक और अन्य से सुंदर अपार्टमेंट में फ्लैट संख्या एफ-206 बुक कराया था। बुकिंग के दौरान विनोद ने बिल्डर अफताब को एसबीआई बैंक की शाखा एपीसेन रोड की चेक संख्या 705983 से चार लाख रुपये एवीसी कन्सट्रक्शन के नाम से दे दिये। इसी समय भाजयुमो के प्रदेश महामंत्री अभिजात मिश्रा ने उसी अपार्टमेंट में फ्लैट संख्या एफ-201 बुक कराया था। विनोद ने कुछ समय बाद फ्लैट की दूसरी किस्त अभिजात मिश्रा के भाई अभिषेक मिश्रा को इसी बैंक की शाखा से चेक संख्या 705984 से तीन लाख रुपये दे दिये। विनोद ने बताया कि कुछ समय बाद अभिजात के साथ वह आठ जुलाई 2010 को बिल्डर के पास पहुंचे और एक लाख रुपये मिलाकर बिल्डर को चार लाख रुपये दे दिये। भुगतान करने के बाद बिल्डर आफताब ने विनोद को दखल और मालिकाना हक दे दिया, जिससे विनोद अपने फ्लैट में रहने लगे। फ्लैट में रहने के दौरान विनोद को पता चला कि फ्लैट में कई कमियां हैं। विनोद ने कई बार इसकी शिकायत बिल्डर आफताब से की तो उसने मरम्मत कराने का वादा किया लेकिन मरम्मत नहीं कराया। इतना ही नहीं फ्लैट की रजिस्ट्री भी नहीं किया। विनोद का आरोप है कि इस मामले में अभिजात मिश्रा की मिलीभगत थी। कई माह व्यतीत होने के बाद अभिजात और विनोद में इसी फ्लैट की रजिस्ट्री को लेकर विवाद होने लगा। विवाद के दौरान विनोद ने बताया कि अभिजात मिश्रा को जहां उन्होंने अपनी बीमा पॉलिसी पर लोन लेकर 1,25,000 रुपये दिये वहीं अभिजात मिश्रा द्वारा चलाये जा रही फर्जी कम्पनी और कमेटी द्वारा अन्य रुपये गोपनीय तरीके से निकाल लिये गये। इसकी जानकारी विनोद को नहीं हो पाई। विनोद का आरोप है कि अभिजात मिश्रा ने बिल्डर से मिलकर उक्त फ्लैट की रजिस्ट्री गोपनीय तरीके से अपने नाम करा ली। विनोद ने बताया कि 15 मई 2013 को वह एक विवाह समारोह में शामिल होने श्रावस्ती गये थे। वापस आने पर पता चला कि अभिजात मिश्रा ने फ्लैट का ताला तोडक़र उसमें रखा हुआ सारा सामान बाहर फेंक दिया है। इतना ही नहीं अपना ताला लगा दिया है। इस मामले में जब विनोद ने अभिजात मिश्रा से बात की गई तो उसने आठ लाख रुपये लौटाने का आश्वासन दिया लेकिन अभी तक अभिजात मिश्रा ने रुपये वापस नहीं किये। इस मामले में विनोद ने कैसरबाग थाने में अभिजात सहित कई लोगों पर धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया। लेकिन डेढ़ वर्ष व्यतीत होने के बाद भी अभिजात और उसके साथियों को पुलिस गिरफ्तार करने में असफल रही

सूद पर देता है पैसा
एफआईआर में दर्ज है कि अभिजात
मिश्रा सूद का कार्य करता है। वह 10 प्रतिशत पर इसका धंधा करता है। सूत्रों की मानें तो अभिजात से सूद पर रुपये लेने वाले समय पर रुपये नहीं लौटाते हैं तो वह पुलिस की मिलीभगत से उनको प्रताडि़त कराता रहता है। भाजयुमो का प्रदेश महामंत्री होने के कारण उसके ऊपर पुलिस हाथ डालने से डरती रहती है।

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