धीमी गति से बन रही डायाफ्राम वॉल

Captureनदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए दोनों किनारों पर बनाई जा रही डायाफ्राम वॉल

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ । गोमती नदी को निर्मल, स्वच्छ व प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए भागीरथ प्रयास किया जा रहा है। सिंचाई विभाग करीब छह महीने से नदी में डायाफ्राम वॉल बनाने की कवायद शुरू कर दी है। जो नदी के एक सिरे से दूसरे सिरे तक बनाई जायेगी। इसकी ऊंचाई नदी तल से 12 से 15 मीटर गहरी होगी। प्रथम चरण में लामार्टिनियर बंधे से निशातगंज तक वाल बनाने का काम शुरू हो चुका है। लेकिन कार्यदायी संस्था के काम करने की गति धीमी होने की वजह से निर्धारित समय में काम हो पाना मुश्किल लग रहा है।
जिले में गोमती की सफाई का काम व्यापक स्तर पर किया जा रहा है। इसमें नदी की सिल्ट निकालने और किनारों को ऊंचा करने का काम चल रहा है। सिंचाई विभाग नदी के किनारों को ऊंचा करने और डायाफ्राम वॉल के बराबर लाने की योजना है। इसके साथ ही शहीद पथ से एक्वाडक्ट तक के विस्तार की भी तैयारी है। ङ्क्षसचाई विभाग के अधिशासी अभियंता के अनुसार निशातगंज पुल से लेकर लामाॢटनियर बंधे तक की दीवार आठ से 10 मीटर ऊंची बनाई जायेगी। इससे नदी के जलस्तर को सीमान्त रखने में आसानी होगी। नदी का जल स्तर 6 मीटर चौड़ा रखा जायेगा। प्रथम चरण का काम पूरा होने के बाद ही दूसरे चरण का काम शुरू किया जायेगा। इसमें निशातगंज से कुडिय़ाघाट तक डायाफ्रॉम वॉल का निर्माण होगा। शहीद पथ से लेकर इंदिरा कैनाल तक नदी किनारों को पक्का बनाने का काम भी शीघ्र ही शुरू करा दिया जायेगा। इस योजना के शुरुआती चरण में बंधा शहीद पथ से 2 किमी आगे बाघामऊ तक बनाया जायेगा। इसके लिए पहले 8 करोड़ रुपये आवास व शहरी नियोजन विभाग की ने स्वीकृत किया था। इसके बाद लगभग 60 करोड़ रुपये खर्च कर एक्वाडक्ट तक अनुमानित आठ किमी के विस्तार में बंधा तैयार किया जायेगा। लेकिन मौसम की गड़बड़ी और कुछ तकनीकी खामियों की वजह से काम की गति अपेक्षा से कम है।

गंदगी की वजह से घाटों पर सन्नाटा

नदी में जलकुंभी और गंदगी की वजह से लोग स्नान करने से भी बचते हैं। जबकि गर्मी के मौसम में तपिश बढने के साथ ही सुबह और शाम नदी में स्नान करने वालों की संख्या बढने लगती थी। नदियों के किनारे सैर सपाटा करने और पिकनिक मनाने वालों की भीड़ लगती थी लेकिन आज लोग नदी के किनारे आने और घाटों पर कुछ देर बैठने से भी गुरेज करते हैं। गर्मी के मौसम में कुडिय़ाघाट से कलाकोठी तक चलने वाले कई तैराकी क्लब बंद हो चुके हैं। इसका सबसे बड़ा कारण नदी में दूर-दूर तक फैली जलकुंभी और नदियों के प्रति उपेक्षात्मक प्रवृत्ति है। आलम ये है कि गोमती नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है। नदियों के किनारे सिमटते जा रहे हैं। प्रदेश सरकार की गोमती रिवरफ्रंट योजना के तहत गोमती नदी में सफार्ई और दोनों किनारों पर दीवार बनाने का कार्य चल रहा है। गोमती की सिल्ट निकालने के लिए कुडिय़ा घाट के निकट मिट्टी का एक स्थायी ब्रिज भी बनाया गया है। इसकी वजह से केवल एक तरफ से पानी निकलता रहता है लेकिन नदी में आने वाले नालों और फैक्ट्री की गंदगी को आने से रोक पाना प्रशासन के लिए चुनौती बनता जा रहा है।

चैनेलाइजेशन होने से सिमट कर बहेगी गोमती
रिवर फ्रंट डेवपलमेंट के तहत चैनेलाइजेशन किया जा रहा है, इसके बाद गोमती नदी का आकार घट जायेगा। गोमती की मौजूदा चौड़ाई चैनेलाइजेशन होने के बाद आधी हो जायेगी। जिसकी अनुमानित चौड़ाई करीब 100 मीटर हो जायेगी। गोमती के आकार में घटोतरी होने से नदी में सिल्टिंग की समस्या पर काबू पाने में सहायता मिलेगी। डायाफ्रॉम वॉल बनाने के लिए बड़े मिक्सर पेपर मिल कॉलोनी के निकट नदी के किनारे खाली स्थान पर प्लांट लगाया जायेगा। डायफ्रॉम वॉल निर्माण के दौरान यह स्थल केंद्र बिंदु रहेगा। यहीं से कंक्रीट को विभिन्न हिस्सों में भेजा जायेगा।

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