धर्म के नाम पर वोट मांगना गैरकानूनी: सुप्रीम कोर्ट

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

captureनई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संवैधानिक पीठ ने आज एक अहम फैसले में प्रत्याशियों और उनके समर्थकों के धर्म, जाति, समुदाय, भाषा के नाम पर वोट मांगने को गैरकानूनी करार दिया है।
कोर्ट ने कहा है कि चुनाव एक धर्मनिरपेक्ष पद्धति है। इस आधार पर वोट मांगना संविधान की भावना के खिलाफ है। जन प्रतिनिधियों को भी अपना कामकाज धर्मनिरपेक्ष आधार पर ही करना चाहिए। यदि कोई भी उम्मीदवार ऐसा करता है, तो ये जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत भ्रष्ट आचरण माना जाएगा। ये जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 123(3) की जद में होगा। इसलिए निश्चित तौर पर राजनीतिक दलों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। क्योंकि देश के अधिकांश राज्यों में जाति, धर्म और समुदाय के आधार पर ही राजनीतिक पार्टियां वोट मांगती रहती हैं। ऐसे में पांच राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में इसका असर दिखने की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई के दौरान कहा कि न केवल प्रत्याशी बल्कि उसके विरोधी उम्मीदवार के धर्म, भाषा, समुदाय और जाति का इस्तेमाल भी चुनाव में वोट मांगने के लिए नहीं किया जा सकता है। चुनाव एक धर्मनिरपेक्ष प्रक्रिया है और चुने गए उम्मीदवार का कार्यकलाप भी धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए। कोर्ट ने टिप्पणी की है कि भगवान और मनुष्य के बीच का रिश्ता व्यक्तिगत मामला है।

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