धरती के भगवान बने मौत के सौदागर

एक हफ्ते में डॉक्टरों की लापरवाही के चलते तीन मरीजों की गई जान

  • सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे डॉक्टर

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। एक हफ्ते में लालची डॉक्टरों की लापरवाही से तीन मरीजों की जान जा चुकी है। धरती के भगवान हैवान बन चुके हैं। इन डॉक्टरों की ओर से डॉक्टरी जैसे पवित्र पेशे को कलंकित किया जा रहा है। केवल पैसे के भूखे डॉक्टरों को न मरीजों की बीमारी से मतलब है और न ही उनकी जान से। उन्हें तो बस अपनी जेब भरने से मतलब है। डाक्टरों की कोशिश होती है कि ज्यादा से ज्यादा दिन मरीज को रोककर पैसे बनाए जाए। पैसे के लिए डॉक्टरों की ओर से मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।
राजधानी में सरकारी डॉक्टरों की ओर से लगातार प्रॉइवेट प्रैक्टिस की जा रही ही लेकिन स्वास्थ्य विभाग की आंखें तब खुलती हैं जब कोई बड़ा केस सामने आता है। लोहिया के डॉ. एके श्रीवास्तव की ओर से सुरेंद्रनगर स्थित निजी क्लीनिक में सालों से प्रॉइवेट प्रैक्टिस की जा रही थी लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से केाई ध्यान नहीं दिया जा रहा था। फतेहपुर निवासी शिवम के परिजनों ने बताया कि पहले हम शिवम को लेकर लोहिया अस्पताल गये थे जहां पर डॉ. एके श्रीवास्तव ने उन्हें सुरेन्द्रनगर स्थित क्लीनिक पर आने के लिए कहा। उसके बाद डॉक्टर श्रीवास्तव ने 20 जुलाई को ऑपरेशन की डेट रखी। ऑपेरशन के दौरान मरीज की हालत बिगडऩे पर डॉक्टर घबराकर मरीज को लोहिया अस्पताल लाये जहां पर मरीज की मृत्यु हो गई।
ये केस तो मात्र एक बानगी है। राजधानी में सरकारी अस्पताल मरीजों से धन उगाही का केंद्र बन गया है। यहां पर डॉक्टरों की ओर से मरीजों को बहला-फुसलाकर अपने निजी प्रॉइवेट क्लीनिक पर बुलाया जाता है और मरीजों से मनमानी ढंग से ईलाज के नाम पर वसूली की जाती है। ये हाल केवल लोहिया अस्पताल का नहीं है। राजधानी के तमाम बड़े सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर प्रॉइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा हुआ है। लोहिया अस्पताल की तरह जब कोई दुर्घटना होती हैे तो विभाग की ओर से तेजी दिखाई जाती है। कु छ दिन बीतने के बाद फिर से मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

पिछले एक सप्ताह में लापरवाही के मामले

  • 14 जुलाई को राम मनोहर लोहिया संस्थान में मरीज शब्बीर (71) की ऑक्सीजन न लगाने से मौत, डॉ. मधुप रस्तोगी पर आरोप।
  • 17 जुलाई को लावण्या अस्पताल में लाबुआ (16 ) को ऑक्सीजन देने में लापरवाही से लडक़ी कोमा में, डॉ. आरेंद्र पर लापरवाही का आरोप।
  • 20 जुलाई को शिवम शुक्ला(22) की लोहिया अस्पताल में मौत, डॉ. एके श्रीवास्तव दोषी।

आये दिन मरीजों से वसूली के मामले आते हैं सामने
सपा सरकार की ओर से प्रदेश के मरीजों को बेहतर चिकित्सा देने के लिए रोजाना नये-नये अस्पताल व संसाधन लगाये जा रहे हैं लेकिन सरकार की मंशा पर चिकित्सकों की ओर से पानी फेरा जा रहा है। हालात ये है कि मरीजों के साथ आये दिन वसूली और लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं।
केजीएमयू के भी डॉक्टर करते हैं प्राइवेट प्रैक्टिस
सिविल, लोहिया, बलरामपुर सहित केजीएमयू के कुछ डॉक्टरों की ओर से प्राइवेट प्रैक्टिस की जा रही है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और वीसी रविकांत के सख्त आदेश के बाद भी केजीएमयू के डॉक्टरों की ओर से मनमानी की जा रही है। यही कारण है कि मरीजोंं को केजीएमयू सहित सरकारी अस्पतालों में सही ईलाज नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में ड्यूटी के दौरान अधिकांश डॉक्टर गायब रहते हैं और प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। अस्पताल में मरीजों को वार्डब्वॉय सफाईकर्मियों के माथे छोड़ दिया जाता है।

स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टर को किया निलंबित, क्लीनिक का लाइसेंस रद्ïद

स्वास्थ्य मंत्री के आदेश के बाद डॉक्टर एके श्रीवास्तव पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है और डॉक्टर एके श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है। लोहिया अस्पताल में मरीज की मौत का मामला गर्माने के बाद डीजी हेल्थ डॉ. विजयलक्ष्मी लोहिया अस्पताल पहुंची। उन्होंने जांच के दौरान अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरसी अग्रवाल से बात की। इसके आलावा सीएमओ एसएनएस यादव ने सुरेंद्रनगर स्थित डॉ. एके श्रीवास्तव के सुरेंद्रनगर स्थित क्लीनिक में छापेमारी की। बताते चलें कि गौरतलब है कि स्वास्थ्य मंत्री के मामले का संज्ञान लेने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है।

डॉक्टर भी खड़े हुए मरीज के पक्ष में

लोहिया अस्पताल में शिवम कर मौत में लापरवाही को लोहिया के प्रशासनिक अधिकारियोंने स्वीकार किया है। अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरसी अग्रवाल ने कहा कि डॉ. एके श्रीवास्तव को कई बार अस्पताल में ड्यूटी पर समय से आने के लिए टोकना पड़ता था। इसके बावजूद उनकी ओर से लापरवाही की जाती थी।

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