दो साल बाद जेल से बाहर आयेंगे बेईमान पूर्व मंत्री जी…

हजारों करोड़ के घोटाले में दो साल से जेल की
G1वा खा रहा था भ्रष्टïाचारी पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्र

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। भ्रष्टïाचार के आरोप में दो साल से जेल में अपनी जिंदगी गुजार रहे अफसरों और नेताओं पर सुप्रीम कोर्ट थोड़ा मेहरबान हुआ है। पहले आईएएस प्रदीप शुक्ला को जमानत मिली और आज बसपा सरकार में मंत्री रहे रंगनाथ मिश्र को भी सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी। मायावती के कार्यकाल में हुए घोटालों की फेहरिस्त में कई अफसर और मंत्री जेल यात्रा कर आए हैं और कई जेल जाने की कतार में है। रंगनाथ मिश्र पर करोड़ों के घोटालों के आरोप लगे थे। मायावती सरकार में माध्यमिक शिक्षा मंत्री रहे रंगनाथ पर अवैध तरीके से एक हजार करोड़ रुपये की सम्पत्ति हासिल करने का आरोप था।

मायावती सरकार में माध्यमिक शिक्षा मंत्री रहे रंगनाथ मिश्र ने भ्रष्टïाचार की सभी हदें पार कर दी थीं। प्रदेश के चर्चित लैकफैड घोटाले में इनका नाम मुख्य अभियुक्त के रूप में सामने आया था। राष्टï्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अन्तर्गत इस बेईमान मंत्री ने सारी नैतिकता दांव पर रख दी थी। जबकि उनसे अपेक्षा थी कि वह शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए भरसक प्रयास करेंगे और स्कूलों को बेहतर बनवायेंगे।

मगर इस मंत्री ने लैकफेड जैसी संस्था को काम दे दिया और काम होने की जगह रंगनाथ मिश्र ने सांठ-गांठ के करके इस संस्था के जरिए करोड़ों की कमाई कर ली। उन्होंने इस अभियान में 2009-10 में स्वीकृत 254 प्राथमिक विद्यालय को हाईस्कूल स्तर पर उच्चीकृत करने हेतु प्रति विद्यालय 58.12 लाख रुपये की दर से 14762.48 लाख रुपये स्वीकृत किए। रंगनाथ मिश्र ने मेरठ, गाजियाबाद, मैनपुरी, बिजनौर, बदायूं, लखनऊ, बाराबंकी, महाराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, आजमगढ़, बलिया, चन्दौली और औरैया के 25 विद्यालय के निर्माण का काम लैकफेड को दे दिया और बदले में करोड़ों रुपया कमीशन ले लिया।

इस मामले की शिकायत लोकायुक्त से की गई और फिर लोकायुक्त ने गहनता से इस मामले की जांच की तो इस भ्रष्टïाचारी मंत्री की परत दर परत खुलती चली गई। लोकायुक्त की रिपोर्ट के बाद भ्रष्टïाचार निवारण अधिनियम के तहत रंगनाथ मिश्र पर मुकदमा दर्ज किया गया। लोकायुक्त की रिपोर्ट के बाद इन्हें मंत्रिमंण्डल से हटा दिया गया। जांच में पाया गया कि 13 मई 2007 से 5 अक्टूबर 2011 के बीच रंगनाथ मिश्र की आय 1 करोड़ 57 लाख रुपये थी। इस अवधि में उन्होंने अर्जित परिसम्पत्ति के मद में 7 करोड 61 लाख रुपये खर्च किए। साफ जाहिर था कि रंगनाथ मिश्र ने अपने कमाई से 6 करोड़ 4 लाख रुपया ज्यादा खर्च किए थे। इसके बाद सतर्कता अधिष्ठïान के पुलिस उपाधीक्षक रामपाल ने 30 अक्टूबर 2012 को भदोही जनपद के औराई थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया था। रंगनाथ मिश्र पर मनी लॉड्रिंग का केस भी दर्ज हुआ था और यह भी पता चला था कि उन्होंने अपना पैसा विदेशों में भी निवेश किया है। इसके बाद मंत्री को जेल भेज दिया गया था। रंगनाथ मिश्र ने हाईकोर्ट में आय से अधिक सम्पंत्ति के मामले में सेशन ट्रायल पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। आज सुप्रीम कोर्ट ने रंगनाथ मिश्र को जमानत पर रिहा करने के आदेश दे दिया है।
भ्रष्टïाचारियों को जल्दी मिले सजा
लैकफेड के पूर्व चेयरमैन और भाजपा प्रवक्ता आईपी सिंह ने कहा है कि जमानत मिलने से रंगनाथ मिश्र निर्दोष साबित नहीं हुए हैं। इन लोगों ने लैकफेड जैसी संस्था को बदनाम कर दिया। इसकी जांच पुलिस के सहकारिता प्रकोष्ठï ने की और पैसा लेकर जांच के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअदांज कर दिया गया।

ट्रायल कोर्ट में जल्दी हो फैसला
फोकस टीवी के यूपी हेड ज्ञानेन्द्र शुक्ला का कहना है कि जिन पर सरकार चलाने की जिम्मेदारी हो, अगर वही बेईमानी करे तो फिर न्याय कौन करेगा। इस मामले में नजीर पेश करते हुए ट्रायल कोर्ट में जल्दी से जल्दी फैसला करके इन भ्रष्टïाचारियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिये।

 

50 हजार का ईनामी शहाबुद्दीन का करीबी शूटर लखनऊ में हुआगिरफ्तार

बलिया में किया था डबल मर्डर, बिहार पुलिस ने भी 10 हजार का घोषित कर रखा था ईनाम
भाजपा नेता श्रीकांत भारती की हत्या में था वांछित, यहां किसी बड़ी योजना को आया था अंजाम देने

लखनऊ। एसटीएफ को आज उस समय बड़ी सफलता मिली जब उसने बिहार के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन के करीबी शूटर और कॉन्ट्रेक्ट किलर सुमित सिंह उर्फ मोनू चवन्नी को उसके एक साथी के साथ गिरफ्तार कर लिया। इन कुख्यात अपराधियों के पास से कारबाइन और पिस्टल भी बरामद हुआ। एसटीएफ के एसपी अमित पाठक ने बताया कि ये लोग लखनऊ में भी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने आये थे। उसी दौरान एसटीएफ ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
सुमित का यूपी और बिहार में खासा आतंक था। वह कान्ट्रेक्ट लेकर लोगों की हत्या करता था। शहाबुद्दीन के लिए विदेशों से वह हथियार भी मंगाता था और इन राज्यों में हथियारों की आपूर्ति भी करता था। उसने बिहार और यूपी के कई लोगों से रंगदारी भी वसूली थी। सुमित की गिनती पूर्व सांसद शहाबुद्दीन के करीबी लोगों में होती थी।
सुमित ने अपने साथियों के साथ 31 अगस्त 2014 को बलिया में परशुराम और उनके बेटे बिन्देश्वरी की हत्या कर दी थी और फरार हो गया था। इसके बाद यूपी पुलिस ने उस पर पचास हजार का इनाम घोषित किया था। बिहार के भाजपा नेता श्रीकांत भारती की हत्या उसने शहाबुद्दीन के कहने पर की थी। बीते दिनों ही उसने गोपालगंज के एक सर्राफा व्यापारी से दस लाख की रंगदारी वसूली थी।

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