दो लाख में घायल, पांच लाख में मौत

प्रॉपर्टी डीलर राज बहादुर की हत्या में दारोगा का बेटा भी शामिल

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। कृष्णानगर में प्रॉपर्टी डीलर राज बहादुर की हत्या के पीछे कोई और नहीं बल्कि हाईकोर्ट में कार्यरत अधिवक्ता गिरजाशंकर पाल ही मास्टरमाइंड था। अधिवक्ता के इस गंदे खेल में एक दारोगा के बेटे सहित छह अन्य अपराधी भी शामिल हैं। राज बहादुर की हत्या एक ऐसी साजिश के तहत की गई थी या यह कहें कि यह अपराध एक पूर्ण अपराध था तो गलत नहीं होगा। लेकिन एसएसपी सहित अन्य पुलिस अधिकारी काफी मेहनत के बाद इस हत्या का पर्दाफाश करने में सफल रहे। सबसे बड़ी बात यह रही कि अधिवक्ता गोली मारकर घायल करने के लिये दो लाख रुपये जबकि हत्या करने के लिये पांच लाख रुपये की सुपारी लेता था। एसएसपी ने कृष्णानगर पुलिस टीम को पांच हजार रुपये का नकद ईनाम जबकि एएसपी पूर्वी रोहित मिश्रा और सीओ कृष्णानगर बबिता सिंह को प्रशस्त्रि-पत्र देने की घोषणा की है।
कृष्णानगर के रुस्तमनगर निवासी प्रॉपर्टी डीलर राजबहादुर यादव की 18 जून को सुबह साढ़े आठ बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में जांच के बाद रायबरेली जनपद के मटिहा निवासी और हाईकोर्ट वकील गिरजाशंकर पाल, अलीनगर सुनहरा निवासी प्रॉपर्टी डीलर नागेंद्र कुमार यादव उर्फ नान, विकासनगर सेक्टर-7 निवासी दारोगा पुत्र अनिल दुबे उर्फ राजेश, अलीनगर सुनहरा निवासी दिनेश कुमार, शूटर मडि़य़ांव के फर्रुखाबाद गांव निवासी शुभकरन यादव व सीतापुर के महोली स्थित दौली गांव निवासी बच्चन अवस्थी उर्फ बब्लू और छब्बन खां को गिरफ्तार किया। जबकि इनके अन्य साथी सरोजनीनगर के अनौरा निवासी हिस्ट्रीशीटर राम नरेश, गहरू निवासी कैलाश, अलीनगर सुनहरा निवासी चंद्रभान यादव और बंथरा के किशनपुर कौडिय़ा निवासी संतोष यादव को पुलिस तलाश रही है। इनके पास से हत्या में इस्तेमाल की गई बाइक और दो तमंचा बरामद हुआ है।

लालच बना हत्या का कारण

एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि चिल्लावां में नगर निगम की दो बीघा जमीन है। यह जमीन राम जियावन माली के कब्जे में थी। प्रॉपर्टी डीलर राजबहादुर यादव एग्रीमेंट कराकर उसके प्लॉट बेच रहा था। पेशगी के तौर पर राम जियावन को 25 हजार रुपये दिए थे। राम जियावन की मौत के बाद उसके बेटे दिनेश को उसने रकम देने से इनकार कर दिया। इसीलिए दिनेश ने राजबहादुर के प्रतिद्वंद्वी प्रॉपर्टी डीलर नागेंद्र कुमार यादव से मिलकर हत्या करने की योजना बनाई। जहां स्कूटर इंडिया स्थित वकील गिरजाशंकर के चैंबर में राजबहादुर की हत्या की डील हुई और पांच लाख रुपये में वकील गिरजाशंकर को हत्या की सुपारी दी गई थी। गिरजाशंकर ने बताया कि उसने दरोगा पुत्र अनिल दुबे से संपर्क किया। अनिल वारदात के लिए राजी हो गया और अपने साथी शुभकरन से मिला। शुभकरन से उसकी मुलाकात रायबरेली जेल में हुई थी। जहां बाद में शुभकरन, बच्चन अवस्थी उर्फ बबलू, गिरजा शंकर और अनिल दुबे शामिल हुए। राज बहादुर को बुलाने के लिये नाम बदलकर अनिल दुबे ने अपना नाम राजेश रख लिया था। इसी नाम को लेकर पुलिस कई दिनों तक परेशान रही।

ये रहे पुलिस टीम में शामिल-सर्विलांस प्रभारी धीरेंद्र शुक्ल, एसआई धीरज सिंह, एसआई अनुराग मिश्रा, क्राइम ब्रांच निरीक्षक भगवान सिंह, इंस्पेक्टर नागेंद्र चौबे, कृष्णानगर थानाध्यक्ष अश्विनी कुमार पांडेय, एसआई एके ओझा, एसआई अजय कुमार त्रिपाठी, राजीव श्रीवास्तव सहित कई पुलिसकर्मी शामिल हैं।

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