दो और याचिकायें उच्च न्यायालय में दाखिल

यूपीसीपीएमटी रद्द को कराने के लिए

भविष्य को लेकर परेशान अभ्यर्थियों ने लिया कोर्ट का सहारा
अभ्यर्थी रितेश की याचिका पर आज होनी है सुनवाई

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। यूपीसीपीएमटी में धांधली को लेकर अभ्यर्थियों में गुस्सा है। यूपीसीपीएमटी परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों ने उच्च न्यायालय में इस परीक्षा को रद्द करने संबंधी याचिकाएं दाखिल की हैं। पहली याचिका दिलीप गुप्ता और नवनीत की तरफ से इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पीठ में माननीय न्यायाधीश अरूण टंडन की कोर्ट में दाखिल किया गया था। दूसरी याचिका निरूपमा और निर्भय चौहान की ओर से इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंड पीठ में न्यायाधीश राजन रॉय की कोर्ट में दाखिल की गई है। इसके आलावा एक याचिका छात्र रितेश की ओर से दाखिल की गई थी, जिस पर आज सुनवाई होनी है। अपने भविष्य को लेकर परेशान अभ्यर्थियों को कोर्ट का सहारा लेना पड़ा है।
स्वराज आंदोलन के प्रबंध ट्रस्टी घनश्याम श्रीवास्तव अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह से सक्रिय है। उन्होंने बताया कि गोरखपुर विश्वविद्यालय ने शुरू से ही छात्रों को परेशान किया है। पहला तो ये कि परीक्षा में प्रश्न पुस्तिका को वापस जमा करवाया गया, जबकि 10 मार्च को जारी शासनादेश में यह कही नहीं लिख हुआ था। इसके आलावा परीक्षा के आवेदन के घोषणापत्र को किसी राजपत्रित अधिकारी से प्रमाणित करने की अनिवार्यता रखी थी, जबकि प्रधानमंत्री कार्यालय से यह सर्कुलर पहले ही जारी हुआ था कि अब देश में अभ्यर्थियों के लिए स्वप्रमाणन ही मान्य होगा। परीक्षा समन्वयक अजेय गुप्ता का कहना है कि खुलासा हुआ है कि रामेश्वरम इंस्टीट्यूट के सुरेंद्र शुक्ल ने अपनी बेटी को लाभ पहुंचाया है, जबकि 15 जून 2015 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा निरस्त किए गए एआईपीएमटी केस में यह बात सामने आई कि जिस इलेक्ट्रानिक उपकरण से एआईपीएमटी परीक्षा के प्रश्नपत्र साल्व किए गए थो उसी उपकरण से प्रयोग सीपीएमटी के भी प्रश्नपत्र साल्व करने में हुआ।
कई प्रश्न थे गलत
प्रश्नों के बारे में अभ्यर्थी दिलीप कुमार गुप्ता ने बताया कि भौतिक विज्ञान के लॉजिकगेट के प्रश्न का कोई सही विकल्प था ही नहीं। ऊष्मागतिकी से पूछा गया प्रश्न अधूरा था। अभ्यर्थी नवनीत त्रिपाठी ने बताया कि रसायन विज्ञान के एक प्रश्न आयडोफार्म के उत्तर में दो विकल्प सही थे। दूसरे प्रश्न एंजाइम के उत्तर में कोई सही विकल्प नही था। तीसरा प्रश्न आयरन और अमोनियम हाइड्राक्साइड से संबंधित था, उसका भी कोई विकल्प सही नहीं था। बायोलॉजी का एक विकल्प जो नाइट्रोमोनास से संबंधित था, उसके दो विकल्प सही थे। बायोलॉजी के दूसरे प्रश्न बायोडायवर्सिटी डे का कोई भी सही विकल्प नहीं था। अभ्यर्थियों ने बताया कि इस तरह से पूरे प्रश्न पत्र में 20 प्रतिशत से जयादा त्रुटियां थी व कई सेलेबस के बाहर से थे।

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