देहदान के प्रति जागरूक हो रहे लोग, हुए 2035 रजिस्टे्रशन

Captureकेजीएमयू के एनाटमी विभाग में भारी संख्या में लोग करवा रहे हैं रजिस्ट्रेशन
29 जनवरी-1993 से हुई थी देहदान की शुरुआत

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। यदि आपकी मृत्यु के बाद भी आपक ा शरीर किसी की जरूरत बन सके तो शायद इससे बड़ा पुण्य कुछ नहीं होगा। शायद इसलिए देहदान को महादान कहा जाता है। बीते कुछ सालों में समाज में देहदान के प्रति जागरूकता आई है। इसीलिए तो केजीएमयू के एनाटमी विभाग में देहदान करने वालों की रजिस्ट्रेशन संख्या तेजी से बढ़ रही है। केजीएमयू के एनाटमी विभाग में रोजाना 5 से 6 लोग देहदान के लिए रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं।
बताते चलें कि केजीएमयू के एनाटमी विभाग में 29 जनवरी 1993 से देहदान की शुरूआत हुई थी। एनाटमी विभाग में देहदान की शुरूआत तो हो चुकी थी लेकिन साल 2005 तक विभाग में कोई भी देहदान नहीं हुआ था। हां कुछ रजिस्ट्रेशन जरूर हुए थे। साल 2006 में एनाटमी विभाग को पहला देहदान प्राप्त हुआ था। कारण लोगों में देहदान के प्रति जागरूकता का अभाव था। कुछ अंधविश्वासों की वजह से भी लोग देहदान करने से बचते थे, लेकिन जैसे-जैसे समाज में देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ती गई वैसे-वैसे देहदान करने वालों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी होती गई, जिसमें मीडिया का भी बहुत बड़ा योगदान है। आज केजीएमयू के एनाटमी विभाग में देहदान करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विभाग को अभी तक 162 बॉडी देहदान के रूप में मिल चुकी हैं वहीं कुल 2035 लोग रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं जोकि अपने में एक रिकार्ड है।

दंपति के लिए भी फ्री इलाज की सुविधा
एनाटमी विभाग में तैनात कर्मचारी एसके पांडेय ने बताया कि यदि किसी एक दंपति की ओर से देहदान किया गया है तो देहदान के बाद एक व्यक्ति को केजीएमयू में किसी भी तरह के इलाज की सुविधा मुफ्त दी जाती है। इसका उद्देश्य देहदान को लेकर समाज में जागरूकता फैलाना है। इसका असर भी हुआ है। लोग जागरूक हो रहे हैं।

बाहर जाने वाली बॉडीज को संभालता है एनाटमी विभाग
किसी बाहरी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी बॉडी को सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी भी एनाटमी विभाग की होती है। इसलिए विभाग की ओर से ऐसी बॉडी पर दवा का लेप लगाया जाता है ताकि बॉडी सडऩे न पाये। विभाग इसको लेकर बहुत सक्रिय रहता है। जैसे ही मृत व्यक्ति के परिजनों का फोन आता है विभाग सक्रिय हो जाता है।

इस वर्ष मेडिकल कॉलेज को मिलीं 15 बॉडी
साल 2015 में एनाटमी विभाग को कुल 15 बॉडी मिल चुकी हैं, जिसमें दो बाराबंकी की है और बाकी लखनऊ की हैं। इन बॉडीज में 4 महिलाओं के देहदान भी शामिल हैं। एनाटमी विभाग में अब तक हुए देहदान में महिलाओं और पुरुषों का औसत लगभग बराबर है। इसलिए हम सकते हैं कि देहदान के प्रति समाज का महिला वर्ग भी जागरूक हो रहा है।

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