देश में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने किसी सरकार का लोकायुक्त चुना

जस्टिस वीरेन्द्र सिंह बने नए लोकायुक्त

सुप्रीम कोर्ट लोकायुक्त चयन को लेकर यूपी सरकार से बेहद नाराज
यूपी सरकार के वकील कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल से पूछा- कहां है लोकायुक्त का नियुक्ति पत्र
बदनाम लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा को बचाने में झुलसे यूपी सरकार के हाथ
नाराज सुप्रीम कोर्ट ने खुद तय कर दिया लोकायुक्त का नाम

4HG1पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। यूपी सरकार को अब समझ में आ रहा होगा कि किसी बदनाम और भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे व्यक्ति को बचाने की कोशिशे कितनी भारी पड़ जाती है। मौजूदा एनके मेहरोत्रा को लगातार सेवा विस्तार देना और फिर सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद अपने मनचाहे व्यक्ति को लोकायुक्त बनवाने की कोशिशे आज यूपी सरकार को बहुत भारी पड़ गई। नाराज सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार के वकील से गहरी नाराजगी जताई और पूछा लोकायुक्त का नियुक्ति पत्र कहा हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 12.30 बजे फिर सुनवाई करी और जस्टिस वीरेन्द्र सिंह को यूपी का लोकायुक्त नियुक्त कर दिया।
दरअसल अपने पूरे कार्यकाल में यूपी सरकार इस तरह कभी नहीं घिरी। मौजूदा लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा जिस तरह सरकार के दागी मंत्रियों और अफसरों को बचाने में जुटे थे उससे सरकार यही चाह रही थी कि वही लोकायुक्त बने रहे, मगर जब सुप्रीम कोर्ट ने नये लोकायुक्त चयन के आदेश दिए तब सरकार को लगा कि अब नया लोकायुक्त नियुक्त करना ही पड़ेगा।
सरकार इसके बाद जस्टिस रविन्द्र यादव को नया लोकायुक्त बनाना चाहती थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस उनके नाम पर सहमत नहीं थे क्योंकि वह कई विवादास्पद लोगों के साथ मंच साझा कर चुके थे। सरकार ने इसके बाद चीफ जस्टिस को ही किनारे करने का मन बना लिया। विधानसभा से विधयेक पारित कराकर लोकायुक्त चयन में चीफ जस्टिस की भूमिका को ही खत्म कर दिया। हालांकि बाद में गर्वनर ने इस विधेयक को रोककर सरकार की परेशानी बढ़ा दी।
इस बीच सुप्रीम कोर्ट में इसको लेकर अवमानना याचिका दायर कर दी गई। शुरूआती दौर में सरकार ने इसे भी उतनी गंभीरता से नहीं लिया। इस पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के तेवर तीखे हो गए और उन्होंने सरकार को ४८ घंटे का समय देते हुए कहा कि बुधवार तक लोकायुक्त का चयन करें। सुप्रीम कोर्ट के तेवर देखकर सरकार में खलबली मची। मंगलवार को आनन-फानन में लोकायुक्त के चयन को लेकर बैठक बुलाई गई जो लगभग 5 घंटे चली। मगर इस बैठक पर भी कोई फैसला नहीं हो सका। चूंकि बुधवार को इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में फिर बैठक थी, लिहाजा आज सुबह नौ बजे फिर लोकायुक्त के चयन पर बैठक शुरू हुई मगर फिर कोई नाम पर फैसला नहीं हुआ। इसके बाद 5 बजे फिर बैठक बुलाने का फैसला किया गया। तब तक कबिल सिब्बल वह पांच नाम सुप्रीम कोर्ट को दे चुके थे, जिन पर सहमति बनने की उम्मीद थी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि शाम को 5 बजे फिर बैठक है मगर कोर्ट ने 5 बजने का इंतजार नहीं किया और कहा कि उसे कानून का पालन कराना आता है और जस्टिस वीरेन्द्र सिंह को यूपी का नया लोकायुक्त नियुक्त कर दिया।

जस्टिस वीरेंद्र सिंह
नये लोकायुक्त वीरेन्द्र सिंह वर्ष 2009 से 2011 तक इलाहाबाद हाईकोर्ट में जज रह चुके हैं। यह मेरठ के रहने वाले हैं, सरकार ने इन्हें राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का अध्यक्ष भी बनाया था। जानकारों के मुताबिक इनका एक अच्छा ट्रैक रिकार्ड रहा है। इनके कर्र्ई निर्णय न्यायपालिका की नजीर भी बने हैं। इन्होंने मेरठ विवि से वर्ष 1972 में वकालत में स्तानक की उपाधि ली। वर्र्ष 1977 में पीसीएस (जे) के जरिए न्यायिक सेवा में आयें और उच्च न्यायिक सेवा में वर्र्ष 1989 में प्रोन्नति पायी। वर्ष 2005 में इन्हें सेशन और जिला जल के पद पर प्रोन्नति दी गयी और फिर 13 अप्रैल 2009 में हाईकोर्ट में जज के रूप में नियुक्त हुए।

यूपी सरकार के लिए इससे बड़ी शर्मनाक बात कोई दूसरी नहीं हो सकती थी कि लोकायुक्त का चयन भी सुप्रीम कोर्ट को करना पड़ा। हालंकि यह राहत की बात है कि लोकायुक्त का चयन सुप्रीम कोर्ट ने किया है तो यह उम्मीद जगी है कि अब प्रदेश में एक ऐसा ईमानदार लोकायुक्त बनेगा, जो सरकार के कारनामों पर ईमानदारी से फैसला देगा और जिससे लोग न्याय की आशा कर सकेंगे। इस नियुक्ति से साबित हो गया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट का आदेश का पालन करने में असफल रही।
-लक्ष्मीकांत वाजपेई, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा

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