दीपावली के उल्लास से सराबोर राजधानी

मां काली, गणेश और लक्ष्मी की मूर्तियों की जगह-जगह स्थापना
शहर की नामचीन इमारतें और सरकारी भवन झालरों से जगमग

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। दीपावली के त्यौहार पर सारा शहर रौशनी से जगमगा उठा है। कार्तिक मास की अमावस्या पर गणेश और माता लक्ष्मी की मूर्तियों को स्थापित करने में भक्तगण जुट गये हैं। इस दौरान सबसे मशहूर मानी जाने वाली बंगाली समाज की अमावस्या की पूजा को लेकर भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। बंगाली समाज के लोग अमावस्या पर मनोयोग से आधी रात के बाद काली माता की पूजा करते हैं। ऐसी मान्यता है कि विधि-विधान से पूजन करने पर मां भगवती प्रसन्न होती हैं। इसलिए भक्त पूजा-पाठ और मंत्रोच्चार में जुट गये हैं।
भारत विविधताओं का देश माना जाता है। यहां मनाये जाने वाले अनेकों त्यौहारों का अपना महत्व और हर त्यौहार पर रंगों और पूजा-पाठ की अलग परिभाषा होती है। देश में दीपावली का त्यौहार भी अलग-अलग हिस्सों में अपने-अपने तरीके से मनाया जाता है। देश का हर तबका दीपोत्सव के रूप में दीपावली का त्यौहार बनाता है। तब पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में भक्तगण विधि-विधान से देवी काली का पूजन करते हैं। इस बार दीपावली के एक दिन पहले मां काली की पूजा होगी। इस वजह से दीपावली वाली रात करीब 10 बजे अमावस्या खत्म हो जाएगी और मां काली की पूजा अमावस्या की अद्र्धरात्रि में ही होती है। इसी वजह से दीपावली के दिन अन्नकूट भी मनाया जायेगा।
लक्ष्मी-गणेश पूजन

दीपावली पर लक्ष्मी और गणेश का पूजन किया जाता है। इस अवसर पर अनेकों पूजा समितियां गणेश और लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करती हैं। इस दौरान रामायण और गणेश-लक्ष्मी पाठ का आयोजन किया जाता है। जिसमें सैकड़ों की संख्या में भक्तगण सम्मिलित होते हैं। इसके बाद दीपावली के दिन अपराह्न दो बजे के बाद पूजन करके भक्तों को प्रसाद वितरित किया जाता है।
पटाखों की खरीदारी जोरों पर
दीपावली पर पटाखों की खरीदारी भी जोरों पर हो रही है। रस्तोगी इंटर कालेज में लगी पटाखा की थोक दुकानों के अलावा शहर के अलग-अलग हिस्सों में सजी दुकानों से भी पटाखों की खरीदारी हो रही है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि दीपावली तक 40 लाख रुपये से अधिक के पटाखों की बिक्री हो जायेगी। इसी प्रकार घरों को सजाने में झालरों और मोमबत्ती के अलावा मिट्टी के दीये की खरीदारी भी हो रही है। शहर में अनेकों गली मोहल्लों, ऐतिहासिक इमारतों, सरकारी विभागों पर झालरें टांग दी गई हैं।
मिठाइयों की खरीदारी
शहर में जगह-जगह मिठाइयों, चूरा, लाई, कलश और अन्य पूजन सामग्रियों की खरीदारी हो रही है। दुकानों पर खरीदारी करने वालों की भीड़ जुटी हुई है। इस त्यौहार पर मिलावट खोर भी सक्रिय हैं, जिन पर लगाम कसने की नियत से खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं। इसके बावजूद मिलावट पर लगाम नहीं लग पा रही है।

शिव की महिमा से शांत हुआ था काली का क्रोध
पुराणों में ऐसी मान्यता है कि दानवों का नाश करने के दौरान रौद्र रूप धारण करने वाली मां काली के क्रोध को शांत करने के लिए भगवान शंकर को सामने आना पड़ा। वह क्रोध की प्रतिमूर्ति काली के सामने धरती पर लेट गये। ज्योंही काली मां के चरण शिव जी के शरीर पर पड़े, उनका क्रोध शांत हो गया। इसी रौद्र रूप को काली का प्रमुख रूप माना गया है। इसी वजह से उन्हें अनेकों मूर्तियों में अपनी जीभ को भी दांतों के बीच फंसाये दिखाया गया है। माता काली को प्रसन्न करने के लिए ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै मंत्र का जाप किया जाता है। इसमें शामिल हर अक्षर में ग्रहों को नियंत्रित करने की शक्ति है। इसलिए भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। भक्तगण दीपावली से एक दिन पूर्व ही घर में देवी काली की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित कर देते हैं। इसके बाद भोर में ही स्नान करके और साफ स्वच्छ कपड़े पहन कर माता काली की प्रतिमा को लाल गुड़हल, फूल, चंदन और पूजा की अन्य सामग्री प्रस्तुत करते हैं। भक्त दीप प्रज्ज्वलित कर माता की मूर्ति के सामने आसन लगाकर ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै का 108 बार जाप करते हैं। इससे मां काली प्रसन्न होती है।

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