दिल की बीमारियां कहीं बना न दें विकलांग

बदलते जीवनशैली से 74 प्रतिशत शहरी लोगों को दिल के गंभीर रोग होने का खतरा है।
दिल के रोगों, कैंसर, मोटापा, डायबिटीज, स्ट्रोक और अर्थराइटिस जैसी बीमारियां शारीरिक अक्षमता का कारण

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। सावधान दिल की बीमारियां कहीं आपको शारीरिक रूप से अक्षम न बना दें। प्रदेश में लाखों लोगों को किसी न किसी किस्म की विकलांगता है। इसके साथ ही जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की मौजूदगी इस सदी में इन समस्याओं को बढ़ा रही है।
डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ.भुवन तिवारी ने बताया कि दिल की बीमारी, कैंसर, मोटापा, डायबिटीज, स्ट्रोक और अर्थराइटिस जैसी बीमारियां देश में शारीरिक अक्षमता का कारण बन रही हैं। अनियमित जीवनशैली की वजह से शारीरिक अक्षमता की समस्या और बढ़ती जा रही है, इसलिए यह जरूरी है कि इसे रोका जाए। दिल का दौरा पडऩे के बाद यदि किसी ने समय पर इलाज नहीं कराया तो सामान्य जीवन जीना मुश्किल हो जाता है। जरा सी शारीरिक मेहनत थकान पैदा कर देती है। शारीरिक अक्षमता के लक्षणों में सबसे प्रमुख लक्षण है सांस फूलना। ऐसे लोगों की थोड़ी सी मेहनत के बाद ही सांस फूलने लगती है।
उन्होंने कहा कि लोग हेल्दी और पौष्टिक आहार लेने, उचित व्यायाम करने, पूरी नींद और धूप लेने, शारीरिक गतिविधियों में भाग लेने और स्ट्रेस फ्री रहने के लिए स्वस्थ तरीके अपनाएं। स्ट्रोक की स्थिति में मेडिकल हेल्प के बारे में पूर्ण रूप से जागरूक होना भी जरूरी है, क्योंकि यह सीधे अक्षमता का कारण बनता है। इन बीमारियों के प्रति जागरूक रहकर और प्राथमिक उपचार जैसी बातों को ध्यान रखकर आने वाली समस्याओं से बचा जा सकता है।
शारीरिक श्रम न करने और अनियमित खान-पान की वजह से 74 प्रतिशत शहरी लोगों को दिल के गंभीर रोग होने का खतरा बढ़ा है। इससे बचने के लिए व्यायाम करना जरूरी है, क्योंकि यह शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है और मोटापे पर भी विराम लगाता है। यही नहीं, व्यस्त दिनचर्या में आने वाले तनाव को कम करने में भी मदद करता है। धूम्रपान तंबाकू की वजह से राज्य में अब तक लाखों लोगों की जान जा चुकी है। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के रक्त में 400 जहरीले पदार्थ बनने लगते हैं, जो रक्त धमनियों को क्षति पहुंचाते हैं और वसा युक्त पदार्थ पैदा कर उनको तंग कर देते हैं, जो स्ट्रोक और दिल के दौरे का कारण बन सकता है।
तनाव करें कम
बदलती लाइफस्टाइल की वजह से बढऩे वाला स्ट्रेस भी ऐसी बीमारियों के बढऩे का कारण बन रहा है। कई बार तनाव अवसाद का रूप लेने लग जाते हैं। लोग आमतौर पर धूम्रपान, शराब और अन्य मादक पदार्थों का सेवन कर तनाव से बचने की कोशिश करते हैं। इससे लोगों का तनाव तो कम होता नहीं बल्कि यह नशा जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का कारण बन जाता है। दिल की बीमारी से बचने के लिये धूम्रपान नहीं करना चाहिये। मेडिटेशन, प्राणायाम और योग तनाव कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं।
समय पर लें इलाज

हार्ट अटैक पडऩे के बाद हृदय की मांसपेशियों की कार्य क्षमता 6० प्रतिशत तक कम हो जाती है। लोग सोंचते हैं कि किसी बड़े नाम के विशेषज्ञ के पास जाकर इलाज कराया जाय पर इसमें मरीज को खतरा ज्यादा रहता है। हार्ट अटैक पडऩे के बाद जो मरीज को सबसे पहले हृदय रोग चिकित्सक मिल जाये उसी से इलाज कराना चाहिए। जिससे हृदय की मांस पेशियां कम से कम क्षतिग्रस्त हों।

डायबिटिक मरीज हृदय रोगों के प्रति रहें सावधान

डॉ. भुवन तिवारी का कहना है जो लोग शुगर पेसेन्ट होते हैं उनको ज्यादा सावधान रहने की जरूरत होती है। जो लोग डायबिटिक होते हैं उनमें से पचास प्रतिशत लोगों में हृदय रोग का लक्षण समय पर दिखाई नहीं देता है। उनको केवल पसीना आता है।

दिल के लिए लें पौष्टिक आहार
हेल्दी और पौष्टिक आहार स्वस्थ जीवन की कुंजी हैं। अत्याधिक ट्रांस फैटी एसिड, डायट्री कोलेस्ट्रॉल और सेचुरेटड फैट से मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल, हाईपरटेंशन और डायबिटीज जैसी समस्याओं का जन्म होता है और यह सभी दिल के रोगों का कारण बन जाते हैं। हरी और पत्तेदार सब्जियां, ताजा फल, संपूर्ण अनाज, बीन्स, डाइट्री फाइबर, सूखे मेवे और मछली अच्छी सेहत के लिए जरूर खानी चाहिए।

नियमित स्वास्थ्य जांच
नियमित रूप से स्वास्थ्य की जांच बेहद जरूरी है। खासकर जब पहले से ही परिवार में बीमारियों का इतिहास रहा हो। गंभीर रोगों की जल्दी पहचान और इलाज करने से जान बचाई जा सकती है।

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