दिमागी बुखार: वेंटिलेटर के अभाव में दम तोड़ रहे मासूम]

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी के अस्पतालों में दिमागी बुखार के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। केजीएमयू के बाल रोग विभाग में रोजाना दिमागी बुखार से पीडि़त 10 नये बच्चों कों भर्ती किया जा रहा है। वहीं बलरामपुर, सिविल और लोहिया में भी दिमागी बुखार से पीडि़त मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। बलरामपुर व सिविल अस्पताल में लगभग 10 मरीजों की हालत गंभीर है। इनको एंबुबैग के सहारे ऑक्सीजन दिया जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले 48 घंटों में दिमागी बुखार से 9 मासूमों की जान जा चुकी है।

बजट मिला लेकिन वेेंटिलेटर नहीं लगे
सिविल अस्पताल के बाल रोग विभाग में 10 वेंटिलेटर लगने थे। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से बजट भी जारी कर दिया गया था लेकिन अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण अभी तक वेंटिलेटर नहीं लगाये जा सके हैं। वर्ष 2014 में सिविल अस्पताल के बाल रोग विभाग को 10 वेंटिलेटर को तोहफ ा मिला लेकिन अभी भी वेंटिलेटर नहीं लगे। गंभीर बच्चों को एंबुबैग के सहारे ऑक्सीजन दिया जा रहा है। बीते रविवार को अस्पताल के बाल रोग विभाग में भर्ती दिमागी बुखार से दो बच्चों की मौत हो चुकी है वहीं 5 की हालत गंभीर है। गंभीर बच्चों में प्रतापगढ़ निवासी साजिद(4), हुसैनगंज निवासी सुब्रांतो(9), कल्याणपुर निवासी निरंजन (9), निगोहा निवासी प्रिया (8 माह), रायबरेली निवासी धर्मवीर (17) की हालत नाजुक बनी हुई है।

बलरामपुर में नहीं है वेंटिलेटर
राजधानी के बलरामपुर अस्पताल के बाल रोग विभाग में दिमागी बुखार से पीडि़त 4 मासूमों की हालात गंभीर है। चारों बच्चों को एंबुबैग से ऑक्सीजन दिया जा रहा है। दिमागी बुखार से पीडि़त गंभीर बच्चों में शिवानी(7) निवासी उमरावा लखनऊ, अजीत(6) निवासी हैदरगढ़, मोहित (9) निवासी बहराइच , चांदबाबू(11) निवासी सीतापुर की हालत नाजुक बनी हुई है। जिला अस्पताल होने के वावजूद बलरामपुर अस्पताल में वेंटीलेटर नहीं है, जिसके कारण मासूमों की जान पर लगातार ख़तरा बना रहता है। गौरतलब है कि पिछले 48 घंटों में बलरामपुर अस्पताल में दिमागी बुखार से 5 बच्चों की मौत हो चुकी है। वहीं लोहिया अस्पताल के बाल रोग विभाग में वेंटिलेटर नहीं है।

केजीएमयू के बाल रोग विभाग में मात्र 4 वेंटिलेटर
केजीएमयू के बाल रोग विभाग में मात्र 4 वेटिलेटर हैं जो हमेशा फुल रहते हैं, जबकि केजीएमयू के बाल रोग विभाग में दिमागी बुखार के रोजाना दस नये मरीज आ रहे हैं। दिसंबर 2014 में केजीएमयू क बाल रोग विभाग को 10 वेटिलेटर मिला था लेकिन अभी तक वेंटिलेटर नहीं लगाये जा सके हैं। यहां भी दिमागी बुखार के करीब 20 बच्चे भर्ती हैं।

दिसंबर 2014 में बाल रोग विभाग को 10 वेंटलेटर का प्रस्ताव मिल चुका है लेकिन वेंटिलेटर की खरीद की प्रक्रिया जटिल होने के कारण इसकी खरीदारी अभी तक नहीं हो सकी है। बहुत जल्द विभाग में वेंटिलेटरों को लगवाया जायेगा।
डॉ. रश्मि कुमार
हेड बाल रोग विभाग, केजीएमयू 

दिसंबर 2014 में बाल रोग विभाग को 10 वेटिलेटर का बजट मिला था लेकिन बजट की कमी और टेंडर कंपनियों की लापरवाही के चलते अभी तक वेंटिलेटर की खरीद नहीं की जा सकी है।
– डॉ. राजेश ओझा
सीएमएस, सिविल अस्पताल

बलरामपुर अस्पताल में वेंटीलेटर की व्यवस्था नहीं है। इसलिए गंभीर मरीजों को एंबुबैग से ऑक्सीजन दिया जाता है। वेंटीलेटर के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जायेगा।
– डॉ. प्रमोद, डायरेक्टर
बलरामपुर अस्पताल

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